अमेरिका के वीजा पॉज से MP के IT सेक्टर में हलचल, स्टार्टअप्स और प्रोफेशनल्स परेशान

Sandeep Kumar | Aug 27, 2026, 17:30 IST
वीजा पॉज से MP के IT सेक्टर में हलचल
अमेरिका ने इमिग्रेंट वीजा अपॉइंटमेंट्स पर अस्थाई रोक लगाई है। इससे मध्य प्रदेश के स्टार्टअप फाउंडर्स और टेक प्रोफेशनल्स की रिलोकेशन योजनाएं अटक गई हैं। H-1B वीजा पर असर नहीं पड़ेगा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • अमेरिका ने इमिग्रेंट वीजा अपॉइंटमेंट्स पर रोक लगाई है।
  • रोक से एमपी के टेक प्रोफेशनल्स प्रभावित हुए हैं।
  • स्थायी रूप से अमेरिका जाने वालों की योजनाएं रुकी हैं।
  • H-1B और बिजनेस वीजा रोक से बाहर हैं।
  • आईटी सेक्टर में फैसले को लेकर चर्चा बढ़ी है।

अमेरिका ने इमिग्रेंट वीजा अपॉइंटमेंट्स पर अस्थाई रोक लगा दी है। इसका सीधा असर मध्य प्रदेश के टेक प्रोफेशनल्स पर पड़ा है। परमानेंट रिलोकेशन की तैयारी कर रहे लोगों की योजनाएं अटक गई हैं। हालांकि H-1B और बिजनेस वीजा इस रोक के दायरे में नहीं हैं। इस फैसले से एमपी के आईटी सेक्टर में नई चर्चा शुरू हो गई है।



अमेरिका के एक फैसले ने मध्य प्रदेश के टेक सेक्टर में हलचल मचा दी है। देश ने इमिग्रेंट वीजा अपॉइंटमेंट्स पर अस्थाई रोक लगा दी है। इससे उन लोगों की योजनाएं अटक गई हैं जो अमेरिका में स्थायी रूप से बसने की तैयारी कर रहे थे।



राहत की बात यह है कि इस रोक का दायरा सीमित है। H-1B वर्क वीजा इससे प्रभावित नहीं होगा। छोटी अवधि के बिजनेस ट्रिप वाले वीजा भी इसके दायरे से बाहर हैं।



भारतीय स्टार्टअप्स पर मंडराई अनिश्चितता

इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन प्रोफेशनल्स पर पड़ा है जो इमिग्रेंट वीजा के जरिए अमेरिका में जॉइनिंग का इंतजार कर रहे थे। कुछ लोग अपने कारोबार का विस्तार अमेरिका में करना चाहते थे। उनकी योजनाएं फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई हैं।



मध्य प्रदेश में टेक इंडस्ट्री का दायरा काफी बड़ा है। राज्य में 2,000 से अधिक आईटी और आईटीईएस यूनिट्स काम कर रही हैं। यहां 1,200 से ज्यादा टेक स्टार्टअप्स भी सक्रिय हैं। इनमें करीब 1.5 लाख लोगों को सीधा रोजगार मिला हुआ है।



टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल नीलेश माहेश्वरी का कहना है कि असली चिंता सिर्फ देरी की नहीं है। उनके मुताबिक इस देरी से पैदा हुई अनिश्चितता ज्यादा बड़ी समस्या है। इसका असर स्टार्टअप्स के कस्टमर डेवलपमेंट और फंडिंग पर पड़ सकता है।



रोक क्यों लगाई गई है

अमेरिकी प्रशासन ने यह रोक कंसुलर ऑफिसर्स की ट्रेनिंग के लिए लगाई है। जो आवेदक देश के बाहर कंसुलर प्रोसेसिंग के जरिए परमानेंट रेजिडेंसी चाहते हैं, वे इससे प्रभावित हुए हैं। अभी तक यह साफ नहीं है कि अपॉइंटमेंट्स कब दोबारा शुरू होंगे।



इन्फूबींस के सह-संस्थापक सिद्धार्थ सेठी के अनुसार इस रोक का बड़ा असर नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि यह मुख्य रूप से ग्रीन कार्ड आवेदकों को प्रभावित करेगी। उनके मुताबिक यह उपाय पूरी तरह अस्थाई प्रकृति का है।



कंपनियों की रणनीति में बदलाव के आसार

विशेषज्ञों का मानना है कि इस अनिश्चितता से कंपनियों की सोच बदल सकती है। वे अपने कर्मचारियों के काम करने के तरीकों की समीक्षा कर सकती हैं। अगर प्रोफेशनल्स अमेरिका नहीं जा पा रहे, तो स्थानीय हायरिंग बढ़ सकती है।



कई कंपनियां भारत स्थित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स यानी जीसीसी (GCC – Global Capability Center) पर जोर दे सकती हैं। इसके साथ ही एआई (AI – Artificial Intelligence) के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिल सकता है। यह बदलाव आने वाले महीनों में और स्पष्ट हो सकता है।



टीआईई (TiE – The Indus Entrepreneurs) के अध्यक्ष सावन लड्ढा के मुताबिक ऑफशोर डिलीवरी बढ़ने की संभावना है। उनका कहना है कि इससे कैप्चिव सेंटर्स और मिनी-जीसीसी को बढ़ावा मिल सकता है। यानी भारत में ही ज्यादा काम होने की गुंजाइश बन रही है।



आगे क्या, एआई की बढ़ेगी भूमिका

विशेषज्ञों की राय में इस अस्थाई रोक का असर लंबे समय तक रह सकता है। एमपी की आईटी फर्मों को अब सिर्फ मैनपावर सेवाओं पर निर्भर नहीं रहना होगा। उन्हें स्पेशलाइज्ड और एआई-इनेबल सॉल्यूशंस पर फोकस करना होगा।



कंपनियों के लिए अब भारतीय टीमों से काम कराना मजबूत विकल्प बनता जा रहा है। इससे प्रोफेशनल्स को अमेरिका भेजने की जरूरत कम हो सकती है। आने वाले समय में यह ट्रेंड और तेज हो सकता है।



प्रोफेशनल्स के लिए क्या विकल्प हैं

फिलहाल जिन प्रोफेशनल्स के इमिग्रेंट वीजा आवेदन लंबित हैं, उनके पास इंतजार के अलावा कोई सीधा रास्ता नहीं है। अमेरिकी प्रशासन ने अभी तक कोई वैकल्पिक प्रक्रिया नहीं बताई है। ऐसे में कई लोग अपने करियर की योजना दोबारा बना रहे हैं।



कुछ प्रोफेशनल्स भारत में ही बड़ी कंपनियों के जीसीसी में मौके तलाश रहे हैं। इससे उन्हें विदेश जाने का इंतजार नहीं करना पड़ता। साथ ही उन्हें अपने परिवार और सामाजिक दायरे में बने रहने का फायदा भी मिलता है।



एमपी सरकार और उद्योग संगठनों के लिए भी यह एक संकेत है। उन्हें स्थानीय टेक इकोसिस्टम को और मजबूत करने पर ध्यान देना होगा। इससे भविष्य में इस तरह की अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं का असर कम किया जा सकता है।



निवेशकों की नजर से देखें तो यह स्थिति मिलाजुला संकेत देती है। अल्पकालिक रूप से कुछ योजनाएं धीमी जरूर हो सकती हैं। लेकिन लंबी अवधि में भारत केंद्रित मॉडल मजबूत होने की उम्मीद है।



टेक इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि यह बदलाव सिर्फ मजबूरी नहीं, बल्कि अवसर भी है। कंपनियां भारत में ही बड़े पैमाने पर टैलेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर सकती हैं। इससे आने वाले वर्षों में एमपी का टेक सेक्टर और मजबूत हो सकता है।



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