राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी खर्च का हिसाब न देने वाले 28 उम्मीदवार को बताया अयोग्य
News In Short
- चुनाव आयोग ने 28 उम्मीदवारों को चुनाव नियमों के उल्लंघन के चलते अयोग्य घोषित कर दिया है।
- जो उम्मीदवार अभी पार्षद के पद पर हैं, अयोग्य घोषित होने के बाद उनकी सदस्यता खत्म हो जाएगी।
- इन प्रत्याशियों ने 2022 के चुनाव के बाद अपने खर्च का हिसाब और ऑडिट रिपोर्ट जमा नहीं की थी।
- पांच हजार रुपए से ज्यादा का नकद भुगतान करने वाले उम्मीदवारों को भी एक साल के लिए बैन किया गया है।
- अयोग्य घोषित प्रत्याशी अब 2027 में होने वाले नगर निगम और नगर पालिका चुनावों में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।
News In Detail
मध्य प्रदेश में अगले साल होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग इस बार चुनाव को पूरी तरह से पारदर्शी और साफ-सुथरा बनाने के लिए कड़े कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में आयोग ने उन लोगों पर सख्त रुख अपनाया है जिन्होंने पिछले चुनाव में नियमों की अनदेखी की थी।
जानकारी के अनुसार साल 2022 के नगरीय निकाय चुनाव में जिन उम्मीदवारों ने अपने चुनावी खर्च का हिसाब नहीं दिया था, उन पर आयोग ने सख्ती दिखाई है।
आयोग ने जिलेके अलग-अलग निकायों के 28 उम्मीदवारों को 2027 में होने वाले चुनावों के लिए अयोग्य करार दे दिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इनमें से कुछ उम्मीदवार अभी पार्षद के पद पर हैं, जिनकी सदस्यता अब अपने आप ही खत्म हो जाएगी।
दो साल के लिए बताया अयोग्य
जो प्रत्याशी चुनाव परिणाम के 30 दिन के भीतर अपना खर्च और ऑडिट रिपोर्ट नहीं दे पाए, उन्हें दो साल के लिए अयोग्य करार दे दिया गया है। इनमें विदिशा नगर पालिका से रोहित मोहन सिंह घेंघट और गंजबासौदा से सीमा बहिन भी शामिल हैं।
इसके अलावा ऐसे उम्मीदवार जिन्होंने नकद भुगतान के नियमों का उल्लंघन किया, उन्हें अगले एक साल के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है। इनमें वे प्रत्याशी शामिल हैं, जिन्होंने चुनाव खर्च का हिसाब तो दिया, लेकिन पांच हजार रुपए से ज्यादा का भुगतान नकद में किया था।
कद भुगतान पर भी पाबंदी
मध्य प्रदेश निर्वाचन आयोग ने 2022 में पार्षदों के लिए भी चुनाव खर्च का ब्यौरा 30 दिन के भीतर आयोग में जमा करना अनिवार्य कर दिया था। इसके साथ ही पांच हजार रुपए से अधिक के नकद भुगतान पर भी पाबंदी लगा दी थी। यह नियम सांसद और विधायकों के लिए भी लागू किए गए थे।
इन उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित किया
- नगरपालिका परिषद विदिशा: तीन उम्मीदवार (रोहित मोहन सिंह घेंघट, धीरज सोनी, राहुल रत्नाकर)
- नगरपालिका गंजबासौदा: छह उम्मीदवार (अमित पाल, रामराज, सीमा बहिन जी, कोमल प्रसाद अहिरवार, चंद्र प्रकाश, संजीव कुमार उर्फ संजीव शर्मा)
- नगर परिषद लटेरी: चार उम्मीदवार (नारन सहरिया, सरोज बाई सहरिया, नीतू नरेश सक्सेना, गीता देवी अहिरवार)
- नप कुरवाई: 15 उम्मीदवार (रोशन जहां मजाज मोहम्मद, कमला बाई बनवारी बागड़ी, नीतू अहिरवार, सरोज राकेश सप्रे, इदरीश खां, फेमीदा बी इदरीश खां, मंजू आदि)
ये खबर क्यों जरूरी है?
यह खबर इसलिए जरूरी है क्योंकि यह हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करती है। जब चुनाव आयोग नियमों की अनदेखी करने वाले जनप्रतिनिधियों पर सख्त कार्रवाई करता है, तो इससे समाज में यह संदेश जाता है कि कानून सबके लिए बराबर है।
खर्च का हिसाब न देना या नकद सीमा का उल्लंघन करना चुनावी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है, जिसे रोकने के लिए ऐसी कार्रवाई अनिवार्य है।
इससे भविष्य के उम्मीदवारों में डर बना रहेगा और वे नियमों का पालन करेंगे।इससे अंततः जनता को साफ-सुथरी राजनीति और ईमानदार प्रतिनिधि मिल सकेंगे।
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