एमपी में छात्रों के असल मुद्दे- भर्ती घोटालों को दबाया, जांच रिपोर्ट नहीं दी, हजारों पद पड़े हैं खाली
मध्यप्रदेश में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 19 सितंबर को छात्रों की गूंज कार्यक्रम में शामिल होंगे। कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे के बाद यह उनका पांचवां कार्यक्रम है।
कार्यक्रम से पहले ही राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए इसे देश की सबसे भ्रष्ट सरकार बताया है। उन्होंने छिंदवाड़ा कफ कांड, सागर शराब कांड और इंदौर के भागीरथपुरा पानी कांड का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में दवा, शराब और पानी तक में जहर का मामला सामने आया है।
अब इन मुद्दों के बाद राहुल गांधी छात्रों और युवाओं से जुड़े सवालों को उठाने की तैयारी में हैं। ऐसे में सवाल है कि मध्यप्रदेश के युवाओं की वे कौन-सी समस्याएं हैं, जिनको लेकर वे पिछले कई सालों से आवाज उठा रहे हैं।
रिक्त पद फिर भी नहीं निकल रही भर्तियां
मध्य प्रदेश में सीएम डॉ. मोहन यादव लगातार ढाई लाख पदों पर भर्ती करने की बात कह रहे हैं। लेकिन पीएससी और ईएसबी के जरिए निकल रही भर्तियों को देखें तो तस्वीर कुछ अलग नजर आती है।
राज्य सेवा जैसी बड़ी परीक्षा में भी पदों की संख्या काफी कम रही है। साल 2024 में सिर्फ 110 पद, साल 2025 में 158 और साल 2026 में 156 पदों पर भर्ती निकली। यही वजह है कि कभी इन परीक्षाओं में करीब पौने चार लाख उम्मीदवार शामिल होते थे, अब यह संख्या घटकर लगभग एक लाख रह गई है।
मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग में हजारों पद खाली हैं, वहीं चयन और पद बढ़ाने की मांग को लेकर शिक्षक भोपाल में आंदोलन कर रहे हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्तियां निकल रही हैं, लेकिन इसके बाद भी कई पद खाली हैं।
राज्य इंजीनियरिंग सेवा, एडीपीओ और दूसरी परीक्षाओं में भी पदों की कमी बनी हुई है। फूड सेफ्टी ऑफिसर की परीक्षा तक 17 साल बाद आयोजित हुई। हालांकि पुलिस विभाग में हाल के समय में सबसे ज्यादा भर्तियां देखने को मिली हैं।
भर्ती घोटाले, लेकिन कोई जांच और कार्रवाई नहीं
मध्यप्रदेश में व्यापमं घोटाले के बाद भर्ती परीक्षाओं पर उठ रहे सवाल अब भी खत्म नहीं हुए हैं। पटवारी भर्ती परीक्षा में भी गड़बड़ी के आरोप लगे थे। जांच हुई, लेकिन उसकी रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं की गई। बाद में चुपचाप मामले में क्लीन चिट दे दी गई और सभी को भर्ती भी मिल गई। जब आरटीआई के जरिए जांच रिपोर्ट मांगी गई तो जवाब मिला कि वह वल्लभ भवन की आग में जल गई।
इसी तरह ईएसबी ने आबकारी और पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में माना था कि कुछ सेंटरों पर उम्मीदवारों ने मिलीभगत कर गड़बड़ी की। लेकिन कार्रवाई सिर्फ उम्मीदवारों तक ही सीमित रही। इसके बाद इस मामले में आगे क्या हुआ, इसकी जानकारी सामने नहीं आई और किसी बड़े जिम्मेदार व्यक्ति पर कार्रवाई नहीं हुई।
दिव्यांग फर्जी प्रमाण पत्र के कई मामले भी सामने आए, लेकिन उन पर भी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। कई ऐसे लोग नियुक्तियां पाने में सफल रहे, जिनके प्रमाण पत्रों पर सवाल उठे थे।
वहीं, पीएससी में प्रोफेसर भर्ती से जुड़ा विवाद भी सामने आया था। उस समय प्रदीप जोशी मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष थे। आरोप लगे, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ा और कई लोग बाद में बड़े पदों तक पहुंच गए।
परीक्षा कैलेंडर के पते नहीं
छात्रों की दूसरी बड़ी परेशानी भर्ती एजेंसियों पीएससी और ईएसबी के परीक्षा कैलेंडर को लेकर है। कई बार कैलेंडर जारी तो कर दिए जाते हैं, लेकिन उनका पालन नहीं हो पाता। कई परीक्षाएं इसलिए भी नहीं हो पातीं क्योंकि संबंधित विभाग समय पर पदों की डिमांड नहीं भेजते।
उम्मीदवारों को यह तक पता नहीं होता कि कौन-सी परीक्षा कब होगी, रिजल्ट कब आएगा और भर्ती प्रक्रिया कब पूरी होगी। कोई तय शेड्यूल नहीं होने से छात्र लगातार असमंजस में रहते हैं। छोटी-छोटी जानकारियों के लिए भी उन्हें परेशान होना पड़ता है।
13 फीसदी पद होल्ड होते गए
मध्यप्रदेश में साल 2019 से ही ओबीसी आरक्षण का मामला सुलझ नहीं पाया है। इसके बाद सरकार ने 2020 से 13 फीसदी पदों को होल्ड करना शुरू कर दिया। अब तक हजारों पद इसी वजह से अटके हुए हैं।
सरकार एमपी हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस मामले में आगे बढ़ती रही, लेकिन 13 फीसदी पदों पर रोक बनी रही। अभी हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है।
अगर फैसला ओबीसी आरक्षण के खिलाफ आता है तो ये पद अभी भी होल्ड रह सकते हैं और सरकार फिर सुप्रीम कोर्ट जा सकती है। वहीं, अगर फैसला ओबीसी के पक्ष में आता है तो सामान्य वर्ग की ओर से सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना रहेगी। यानी इस पूरे मामले में उम्मीदवारों को अभी जल्द राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।
साल 2019 से कॉपियां ही नहीं दिखा रहे
पीएससी पहले मेंस परीक्षा की कॉपियां उम्मीदवारों को दिखाता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया भी बंद हो गई है। साल 2019 से लेकर 2024 तक की कई परीक्षाओं के अंतिम रिजल्ट जारी हो चुके हैं, लेकिन उम्मीदवारों को अभी तक कॉपियां नहीं दिखाई गई हैं।
इसमें 2020, 2021, 2022, 2023 और 2024 की परीक्षाएं भी शामिल हैं। उम्मीदवार लगातार कॉपियां दिखाने की मांग कर रहे हैं। अब आयोग की ओर से कहा गया है कि नवंबर महीने से कॉपियां दिखाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इंटरव्यू के अंकों को लेकर भी आंदोलन
एनईवाययू ने भर्ती परीक्षाओं में सुधार की मांग को लेकर लंबे समय तक आंदोलन किए। इसमें एक बड़ा मुद्दा इंटरव्यू में दिए जाने वाले अंकों का भी रहा। लगातार यह सवाल उठता रहा है कि लिखित परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने वाले कई उम्मीदवार इंटरव्यू में कम नंबर मिलने के कारण चयन से बाहर हो जाते हैं या उन्हें बेहतर पद नहीं मिल पाते।
उम्मीदवारों का आरोप है कि इंटरव्यू प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है, लेकिन इस दिशा में अब तक कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। इसे लेकर लगातार मांग और विरोध जारी है। असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती | MPPSC की फूड सेफ्टी ऑफिसर
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