स्वामित्व योजना उद्घाटन से ही ठप, पटवारी नहीं तैयार, भोपाल में बैठक में भी कोई हल नहीं

Sanjay Gupta | Sept 20, 2026, 12:05 IST
स्वामित्व योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर के मौके पर प्रदेश में स्वामित्व अधिकार योजना लागू हुई। लेकिन इसके बाद से ही इसमें कोई रजिस्ट्री नहीं हुई है। पटवारी काम के लिए तैयार नहीं हैं।

देश में स्वामित्व योजना लागू करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य है। लेकिन पटवारियों ने इसमें काम करने से इनकार कर दिया है। इसके चलते योजना लागू होने के बाद भी कोई रजिस्ट्री नहीं हो रही है। मध्यप्रदेश में इसके तहत 50 लाख निजी भू-स्वामियों की निशुल्क रजिस्ट्री होना है। इस योजना में पटवारी सबसे अहम भूमिका में हैं।

क्यों कर रहे पटवारी विरोध

पटवारी योजना में भू-स्वामी और सरकार के बीच की पहली कड़ी है। इसमें कब्जाधारी ग्रामीण को क्रेता और पटवारी को इस सरकारी जमीन का विक्रेता बताया गया है। पटवारी को ही निष्पादक/विक्रेता की भूमिका निभानी है और रजिस्ट्री डीड तैयार करानी है। इसके बाद ही तहसीलदार स्तर पर यह रजिस्ट्री हो सकेगी। लेकिन पटवारी खुद को निष्पादक/विक्रेता बताए जाने के खिलाफ हैं। वहीं उनका साफ कहना है कि वह सरकारी जमीन के विक्रेता कैसे हो सकते हैं। कल को कोई कानूनी विवाद हुआ तो वह उलझन में आएंगे।

भोपाल में हुई बैठक

मध्यप्रदेश में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 योजना के तहत पटवारियों को रजिस्ट्री दस्तावेज का निष्पादक बनाए जाने को लेकर विवाद चल रहा है। अब यह विवाद शासन स्तर की बातचीत तक पहुंच गया है। इसी सिलसिले में 19 सितंबर 2026 को भोपाल में आयुक्त भू-संसाधन एवं प्रबंधन कार्यालय में बैठक आयोजित की गई। इसमें मध्यप्रदेश पटवारी संघ सहित प्रदेश के अन्य पटवारी संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए।

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क्या हुआ बैठक में

मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष उपेन्द्र सिंह बघेल ने बताया कि, बैठक में पटवारी संगठनों ने एकमत होकर कहा कि उनका विरोध स्वामित्व योजना अथवा ग्रामीणों को मिलने वाले स्वामित्व अधिकार के खिलाफ नहीं है। बल्कि पटवारी को व्यक्तिगत रूप से रजिस्ट्री दस्तावेज का निष्पादक बनाए जाने को लेकर है। पटवारी कैडर को इस प्रकार के दस्तावेज का कानूनी निष्पादन करने की पात्रता और अधिकार स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं हैं। ऐसे में भविष्य में स्वामित्व, कब्जे, वारिस, सीमांकन, चौहद्दी अथवा अभिलेख संबंधी विवाद सामने आने पर व्यक्तिगत रूप से पटवारी की जवाबदेही तय होने की आशंका है।

सर्वे में कई त्रुटि रह जाती है

पटवारी संगठनों ने यह भी सवाल उठाया कि ड्रोन सर्वे, आबादी रिकॉर्ड, नक्शे, प्लॉट की सीमा अथवा हितग्राही की पहचान में भविष्य में कोई त्रुटि सामने आती है, तो उसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर निर्धारित होगी। यही वजह है कि संघ स्पष्ट कानूनी व्यवस्था और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग कर रहा है।

बैठक में कैडर रिव्यू की मांग भी उठी

बैठक में पटवारियों ने अपने कैडर एवं वेतनमान रिव्यू की लंबित मांग को भी प्रमुखता से रखा। संघ की ओर से कहा गया कि शासन पटवारी संवर्ग की कैडर रिव्यू संबंधी मांग को पूरा करे। साथ ही स्वामित्व योजना में पटवारी की भूमिका को निष्पादक के बजाय सहयोगी के रूप में तय करे तो वह काम के लिए तैयार हैं।

अधिकारी बना रहे दबाव

बैठक के दौरान मंडला और रायसेन जिलों में पटवारियों के साथ अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर किए जा रहे दबावपूर्ण व्यवहार का मुद्दा भी उठाया गया। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि मैदानी स्तर पर पटवारियों पर लगातार अतिरिक्त कार्यों और विभिन्न योजनाओं का दबाव बनाया जा रहा है। यदि अधिकारियों द्वारा इसी प्रकार का कथित दबाव और कार्रवाई जारी रही तो प्रदेश का पटवारी संवर्ग आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होगा।

अब शासन के निर्णय पर टिकी नजर

अब भोपाल में हुई इस बैठक के बाद पटवारी संगठनों की नजर शासन के अगले कदम पर है। संघ का रुख स्पष्ट है कि स्वामित्व योजना के कार्य में सहयोग किया जा सकता है, लेकिन पटवारियों को व्यक्तिगत कानूनी जोखिम वाली निष्पादक की भूमिका स्वीकार नहीं है। साथ ही कैडर रिव्यू तथा मैदानी अधिकारियों के कथित दबाव से जुड़े मुद्दों के समाधान की मांग भी संघ ने शासन के समक्ष रख दी है।

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