एमपी में दो साल में 32 पटवारी रिश्वत लेते पकड़ाए, इंदौर-उज्जैन में सबसे ज्यादा, अब मुफ्त रजिस्ट्री से भी बना रहे दूरी!
एमपी में स्वामित्व योजना को लेकर फंसा पेंच
हालात यह हैं कि जिलों के कलेक्टर्स कई बार पटवारियों को फटकार लगा चुके हैं। साथ ही नौकरी से बर्खास्त करने की चेतावनी भी दे चुके हैं। यहां तक कि प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल भी कलेक्टर्स के सामने अपनी भारी नाराजगी जता चुके हैं। इसके बावजूद पटवारी इस आदेश को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं। पटवारियों का कहना है कि अगर जिले के अफसर बदल गए तो कोई भी उन्हें बचाने नहीं आएगा
लोकायुक्त की कार्रवाई ने दिखाई असल तस्वीर
पटवारी भले ही खुद को नियमों में बंधा बता रहे हों, लेकिन लोकायुक्त की कार्रवाई कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैृ। पिछले दो साल में इंदौर और उज्जैन संभाग के 16 जिलों में 32 पटवारी को रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा है।
हैरानी की बात यह है कि ये सभी मामले जमीन से जुड़े थे। कहीं जमीन का नामांतरण कराने, तो कहीं ऋण पुस्तिका बनवाने के लिए रिश्वत मांगी गई। सरकारी रिकॉर्ड में नाम चढ़ाने के बदले भी पटवारी घूस लेते पकड़े गए। इन मामलों में रिश्वत की रकम दो हजार रुपए से लेकर एक लाख रुपए तक थी।
वहीं लोकायुक्त एसपी डॉ. राजेश सहाय का कहना है कि अकेले इंदौर संभाग में 15 मामले दर्ज किए गए हैं। इन सभी मामलों में पीड़ित गरीब किसान और आदिवासी थे। उनकी जमीन का बंटान, सीमांकन, ऋण पुस्तिका और सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने के बदले में रिश्वत मांगी जा रही थी। जब शिकायतों की पूरी जांच और सत्यापन हुआ, तब यह कार्रवाई की गई।
इन मामलों में रंगेहाथ पकड़े गए पटवारी
पटवारियों की कार्यशैली को इन बड़े मामलों से आसानी से समझा जा सकता है:
- 2 लाख रुपए की रिश्वत में नपे दो पटवारी: पटवारी खूबसिंह धारवे और कुलदीप यादव को बीते 29 सितंबर को 2 लाख रुपए की घूस लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा गया था। ये पटवारी पट्टेदारों को रजिस्ट्री करवाने से मना कर रहे थे, लेकिन उसी किसान का नामांतरण करने के लिए 2 लाख रुपए की मांग पर अड़े थे। बिना पैसे लिए वे काम करने को तैयार नहीं थे, जिसके बाद पीड़ित किसान ने लोकायुक्त से शिकायत कर दी।
- छोटे से प्लॉट के लिए 3 हजार की घूस: पटवारी दिनेश जगताप ने महज 450 वर्ग फीट के प्लॉट का नामांतरण करने के लिए 3 हजार रुपए की मांग की थी। लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगेहाथ दबोच लिया। कोर्ट से सजा मिलने के बाद उसे नौकरी से बर्खास्त तक कर दिया गया।
- कांकड़ की नपती के लिए 10 हजार की मांग: पटवारी कला भट्ट ने जमीन के कांकड़ के सीमांकन (Land Demarcation) यानी नपती के लिए किसान से 10 हजार रुपए मांगे थे। जब किसान ने पैसे देने से मना किया, तो काम पूरी तरह रोक दिया गया। बाद में लोकायुक्त ने जाल बिछाकर उसे 10 हजार रुपए लेते हुए पकड़ लिया।