एमपी में टीबी से हर दिन 13 मौतें, भोपाल सबसे आगे, सरकार चलाएगी 100 दिन का अभियान

Aman Vaishnav | Mar 24, 2026, 10:16 IST
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मध्यप्रदेश में टीबी की बीमारी अब डराने लगी है। प्रदेश में हर दिन औसतन 13 लोग इस बीमारी से दम तोड़ रहे हैं। दवाओं के प्रति लापरवाही भी मरीजों की जान का कारण बन रही है। सरकार अब गांव-गांव जाकर मरीजों की जांच करेगी।

आज वर्ल्ड टीबी डे है लेकिन मध्यप्रदेश के लिए यह दिन गहरी चिंता का दिन है, क्योंकिमध्यप्रदेश में टीबी की बीमारी एक साइलेंट किलर बन चुकी है। तमाम कोशिशों के बाद भी मौत का आंकड़ा थम नहीं रहा है। सबसे डरावनी बात यह है कि साधारण टीबी अब जानलेवा एमडीआर टीबी में बदल रही है। आखिर क्यों इन मौतों का सिलसिला रुक नहीं रहा हैं? आइए जानते हैं इस बीमारी के समाधान के लिए सरकार का नया प्लान क्या है?



रोजाना 13 लोग गंवा रहे जान

मध्यप्रदेश में टीबी (क्षय रोग) से रोजाना औसतन 13 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। 2025 में इलाज और निगरानी के बावजूद प्रदेश में चार हजार 733 लोगों की मौत हुई थी। इस समय प्रदेश में एक लाख 71 हजार टीबी के मरीज हैं। वहीं पिछले साल ये संख्या एक लाख 80 हजार थी। 2024 में खास अभियान चलाकर टीबी मरीजों को पहचानने की कोशिश की गई थी।



इसका उद्देश्य बीमारी का फैलाव रोकना था। इसके बावजूद मौतों और बीमारी का फैलाव लगातार जारी है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट (एमडीआर) टीबी के दो हजार 513 मामले सामने आए हैं जो और भी गंभीर स्थिति को दिखाते हैं।



समय पर नहीं ली दवा

ये वो मरीज हैं जिन्हें टीबी हुई लेकिन इन्होंने दवा समय पर नहीं ली थी। इसके अलावा एक्सडीआर-टीबी (एक्सटेंसिव ड्रग रेसिस्टेंट) के भी लगभग पांच मामले प्रदेश में सामने आए हैं।



रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ रेस्पिरेटरी डिजीज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विकास मिश्रा के अनुसार भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में टीबी का सबसे ज्यादा असर है। अब छह महीने की नई बी. पाल्म रेजिमेन दवा से इलाज करना आसान हो गया है।



आदिवासी बेल्ट में ज्यादा खतरा

मंदसौर और नीमच में मृत्यु दर छह प्रतिशत तक पाई गई है। ये राज्य की औसत 2.7% से काफी ज्यादा है। बैतूल में ये पांच प्रतिशत है। अलीराजपुर, डिंडोरी, शहडोल जैसे जिलों में मृत्यु दर 3-4% तक है। आदिवासी इलाकों में पोषण की कमी के कारण लोगों को ज्यादा खतरा हो रहा है।



ब्लड प्रेशर और शुगर की भी जांच

मध्यप्रदेश के प्रभारी स्टेट टीबी ऑफिसर डॉ. रूबी खान ने बताया कि, अब टीबी को खत्म करने के लिए और भी आक्रामक और व्यापक योजना बनाई गई है। 24 मार्च से 100 दिन का टीबी मुक्त अभियान शुरू होगा। गांव-गांव में हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों से स्क्रीनिंग की जाएगी।



सिर्फ टीबी ही नहीं बल्कि एनीमिया, बीएमआई, ब्लड प्रेशर और शुगर की भी जांच की जाएगी। शहरों और गांवों में हाई रिस्क इलाकों कीा पहचान की जाएगी। साथ ही यहां संभावित मरीजों और उनके संपर्क में आए लोगों की सक्रिय पहचान की जाएगी।



इन जिलों में टीबी के मरीज सबसे ज्यादा

जिला20232024जनवरी 2025 से अब तक
भोपाल11 हजार 67112 हजार 81813 हजार 224
इंदौर9 हजार 23610 हजार 55310 हजार 093
धार4 हजार 9085 हजार 1104 हजार 877
दमोह3 हजार 5783 हजार 6683 हजार 904
भिंड3 हजार 9014 हजार 103 हजार 65
बड़वानी2 हजार 3712 हजार 4152 हजार 285
देवास2 हजार 3682 हजार 5082 हजार 314
दतिया1 हजार 8661 हजार 9301 हजार 903
बुरहानपुर1 हजार 9192 हजार 2841 हजार 765
आगर मालवा1 हजार 2611 हजार 3361 हजार 114

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