शिक्षक पात्रता परीक्षा पर फिर विचार करे एमपी सरकार, रतलाम सांसद ने लोकसभा में उठाया मुद्दा

Sanjay Dhiman | Mar 27, 2026, 19:41 IST
Photograph: (the sootr)
रतलाम सांसद अनीता नागर ने लोकसभा में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर बढ़ते दबाव और असंतोष की बात उठाई। सांसद ने सरकार से पुनर्विचार की अपील की।

मध्य प्रदेश में सरकारी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अब अनिवार्य किया गया है। यह आदेश, जो हाल ही में मध्य प्रदेश के लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा जारी किया गया, 2009 से पहले नियुक्त हुए सभी शिक्षकों के लिए लागू होता है। इन शिक्षकों से यह परीक्षा फिर से पास करवाने का निर्णय लिया गया है, जो पिछले 20-25 सालों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं।



रतलाम से बीजेपी सांसद अनीता नागर सिंह चौहान ने लोकसभा में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि ऐसे शिक्षक जो कई सालों से कक्षा में बच्चों को पढ़ा रहे हैं, अब उन्हें परीक्षा देने के लिए कहना उनके मनोबल को गिरा सकता है। उनका कहना था कि यह कदम शिक्षकों पर मानसिक दबाव बना सकता है, और इससे उनकी कार्यक्षमता पर असर पड़ेगा। सांसद ने सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की अपील की।



मध्य प्रदेश सरकार का आदेश क्या है?

मार्च 2026 में जारी DPI के निर्देश के अनुसार, उन सभी शिक्षकों को टीईटी (TET) पास करना होगा, जिनकी सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) में पांच साल से अधिक का समय बाकी है। यदि वे परीक्षा पास नहीं करते, तो उन्हें सेवा से पृथक (कंपल्सरी रिटायरमेंट) किया जा सकता है। इसके लिए विशेष परीक्षा जुलाई-अगस्त 2026 में आयोजित की जाएगी।



सुप्रीम कोर्ट का आदेश और शिक्षक संगठनों का विरोध

1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह विवाद बढ़ा। कोर्ट ने कहा कि RTE एक्ट की धारा 23 के तहत TET अनिवार्य है, और सभी कार्यरत शिक्षकों को इसे पास करना होगा। केवल उन शिक्षकों को इससे छूट दी गई है जिनकी सेवानिवृत्ति में पांच साल से कम का समय बचा है।



शिक्षक संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि उनकी नियुक्ति वैध नियमों के तहत हुई थी और सेवा शर्तों में इस तरह का बदलाव असंवैधानिक है।



सरकार का वर्तमान रुख

फिलहाल, मध्य प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कर रही है। हालांकि, बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रही है कि क्या वह इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर कर सकती है या केंद्र सरकार से RTE नियमों में संशोधन का आग्रह कर सकती है।



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