राजगढ़ में 10 गुरुजी निकले फर्जी, विभाग की नाक के नीचे सालों तक किया घोटाला
समझें क्या है पूरा मामला...
- राजगढ़ जिले में 10 सरकारी शिक्षक फर्जी डीएड मार्कशीट से नौकरी पाते मिले हैं।
- इन शिक्षकों की मार्कशीट माध्यमिक शिक्षा मंडल के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाई।
- 6 शिक्षकों के रोल नंबर का बोर्ड में कोई रिकॉर्ड ही नहीं मिला है।
- 3 मामलों में दूसरों के रोल नंबर चुराकर फर्जी मार्कशीट बनाई गई थी।
- शिक्षा विभाग अब इन नियुक्तियों की जांच करा रहा है।
कैसे सामने आया फर्जीवाड़ा
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया अब सवालों में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजगढ़ के 10 शिक्षक ऐसे सामने आए हैं। इन्होंने डीएड (D.Ed – Diploma in Education) की फर्जी मार्कशीट के सहारे सरकारी नौकरी हासिल की। ये सभी सालों से वेतन भी ले रहे थे।
जब इन शिक्षकों की मार्कशीट का सत्यापन कराया गया तब जाकर ये हकीकत सामने आई। माशिमं (MPBSE – Madhya Pradesh Board of Secondary Education) के मूल रिकॉर्ड से मार्कशीट मिलाई गई। पता चला कि 10 में से 6 शिक्षकों के रोल नंबर का बोर्ड में कोई रिकॉर्ड ही नहीं है।
तीन मामलों में तरीका और भी चौंकाने वाला निकला है। इन मामलों में दूसरे छात्रों के असली रोल नंबर चुराए गए। उन्हीं नंबरों पर इन शिक्षकों के नाम की फर्जी मार्कशीट छपवाई गई।
एक और मामले में कर्नाटक बोर्ड की डिग्री अमान्य पाई गई। इन सभी शिक्षकों की नियुक्ति 2007 से 2013 के बीच हुई थी।
किन शिक्षकों पर सवाल
- जांच में जिन नामों की मार्कशीट फर्जी मिली, वे इस प्रकार हैं।
- रमेश चंद यादव प्राथमिक स्कूल आगरी में पदस्थ हैं। इनके रोल नंबर का माशिमं रिकॉर्ड में कोई अस्तित्व नहीं मिला है।
- पवन शर्मा प्राथमिक स्कूल आगर में कार्यरत हैं। इनके रोल नंबर पर बोर्ड रिकॉर्ड में दिनेश कुमार नाम का छात्र दर्ज है।
- सुनील कुमार प्राथमिक स्कूल सीलखेड़ा में पदस्थ हैं। इनके रोल नंबर का भी माशिमं के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है।
- हिम्मत सिंह मीणा प्राथमिक विद्यालय घाघरीफला से जुड़े हैं। इनका नाम बोर्ड रिकॉर्ड में दर्ज नहीं मिला। रिपोर्ट के अनुसार ये फिलहाल हत्या के आरोप में जेल में बंद हैं।
- हेमंत शर्मा प्राथमिक स्कूल भगवतीपुर में पदस्थ हैं। इनके रोल नंबर पर बोर्ड रिकॉर्ड में सत्यनारायण आर्य नाम दर्ज है।
- साकीर दांगी माध्यमिक स्कूल पाड़ली महाराजा में कार्यरत हैं। इनका नाम भी बोर्ड के मूल रिकॉर्ड में नहीं मिला।
दस्तावेज सत्यापन में कहां चूक हुई
इस पूरे मामले ने भर्ती के समय होने वाली जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। आम तौर पर नियुक्ति से पहले हर उम्मीदवार की मार्कशीट बोर्ड से सत्यापित कराई जाती है।
इस मामले में यह प्रक्रिया या तो हुई ही नहीं, या ठीक से नहीं हुई। यही वजह है कि फर्जी दस्तावेज वाले उम्मीदवार भी नौकरी पाने में सफल रहे।
यह पहली बार नहीं है जब सरकारी भर्ती में फर्जी दस्तावेजों का मामला सामने आया हो। इससे पहले भी कई राज्यों में इसी तरह के मामले उजागर हो चुके हैं।
शिक्षकों जैसे संवेदनशील पद पर यह गड़बड़ी ज्यादा गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है।
जिम्मेदार अधिकारी क्या बोले
मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी और मंत्री, दोनों ने प्रतिक्रिया दी है। दोनों ने सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह ने इसे गंभीर मामला बताते हुए त्वरित कार्रवाई की बात कही है।
वहीं मध्यप्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की बात कही है।
शिक्षा व्यवस्था पर असर
इस तरह के मामलों से आम अभिभावकों का भरोसा प्रभावित होता है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता सीधे शिक्षकों की योग्यता पर निर्भर करती है।
अगर योग्यता के दस्तावेज ही फर्जी हों, तो कक्षा में पढ़ाई का स्तर भी सवालों में आ जाता है। इसीलिए यह मामला सिर्फ प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं, बल्कि शिक्षा गुणवत्ता से जुड़ा मुद्दा भी है।
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