एमपी के शिक्षकों को समय पर लगानी होगी ऑनलाइन हाजिरी! लेट हुए तो...

Amresh Kushwaha | Aug 11, 2026, 15:54 IST
शिक्षकों को समय पर लगानी होगी ऑनलाइन हाजिरी
मध्य प्रदेश में शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी का समय घटाकर सुबह 10 बजे किया जा सकता है। वहीं नेटवर्क विहीन इलाकों में काम कर रहे 70 हजार अतिथि शिक्षकों की री-ज्वाइनिंग और अटके मानदेय की समस्या भी जल्द सुलझेगी। जानें पूरी जानकारी...

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश में शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी का नियम बदल सकता है।
  • अभी शिक्षक सुबह 9:30 से 10:45 बजे तक हाजिरी लगाते हैं।
  • अब यह समय घटाकर सुबह 10 बजे किया जा सकता है।
  • प्रदेश के करीब 70 हजार अतिथि शिक्षकों को भी बड़ी राहत मिल सकती है।
  • नेटवर्क विहीन इलाकों में री-ज्वाइनिंग और मानदेय की समस्या सुलझाई जाएगी।

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों से जुड़ी दो अहम खबरें सामने आई हैं। एक तरफ नियमित शिक्षकों की ऑनलाइन ई-अटेंडेंस को सख्त किया जा रहा है। दूसरी तरफ अतिथि शिक्षकों की पुरानी परेशानी दूर करने की कोशिश शुरू हुई है। यह दोनों फैसले लोक शिक्षण संचालनालय यानी डीपीआई (Directorate of Public Instruction) के स्तर पर लिए जा रहे हैं।



अटेंडेंस का नया नियम

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को ऑनलाइन हाजिरी लगानी होती है। अभी यह समय सुबह 9:30 से 10:45 बजे तक तय है। विभाग अब इस समय सीमा को घटाने की तैयारी में है। जल्द ही नई व्यवस्था लागू हो सकती है।



सुबह 10 बजे की सीमा

लोक शिक्षण आयुक्त की समीक्षा बैठक में यह मुद्दा उठा है। बैठक में हाजिरी की अंतिम समय सीमा कम करने के निर्देश दिए गए है। अब शिक्षकों को सुबह 10 बजे तक अटेंडेंस दर्ज करानी होगी। यह मौजूदा समय से करीब 45 मिनट कम है। हालांकि इसे लागू करने से पहले विभागीय प्रक्रिया पूरी होगी। इसमें अभी थोड़ा समय लग सकता है।



देर से हाजिरी अमान्य

मौजूदा नियम भी काफी सख्त है। अगर शिक्षक 10:45 बजे के बाद हाजिरी लगाते हैं तो वह मान्य नहीं होती। नई व्यवस्था लागू होने पर यह सीमा और घट जाएगी। इससे शिक्षकों को समय पर स्कूल पहुंचना जरूरी होगा। देर से पहुंचने वाले शिक्षकों की मुश्किल बढ़ सकती है।



इस बदलाव का सीधा असर नियमित शिक्षकों पर पड़ेगा। विभाग का मकसद साफ है। स्कूलों में शिक्षकों की समय पर मौजूदगी सुनिश्चित करना जरूरी माना जा रहा है। डिजिटल निगरानी से यह काम आसान हो रहा है। डीपीआई शिक्षकों की उपस्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।



समय सीमा घटने से शिक्षकों को स्कूल पहुंचते ही अटेंडेंस दर्ज करनी होगी। देरी की गुंजाइश अब पहले से कम रहेगी। विभाग की सख्ती आगे और बढ़ सकती है।



70 हजार अतिथि शिक्षकों को राहत

दूसरी बड़ी खबर अतिथि शिक्षकों से जुड़ी है। प्रदेश में करीब 70 हजार अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें से कई दूरस्थ और नेटवर्क विहीन इलाकों में पदस्थ हैं। इन शिक्षकों को ऑनलाइन प्रक्रिया में लगातार दिक्कत आ रही थी।



नेटवर्क समस्या के कारण री-ज्वाइनिंग और मानदेय भुगतान अटका हुआ है। कई शिक्षकों की सैलरी लंबे समय से रुकी है। यह समस्या खासकर ग्रामीण इलाकों में ज्यादा देखी जा रही है। अब विभाग ने इसे सुलझाने का फैसला किया है।





नेटवर्क विहीन स्कूल

लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजा है। पत्र में नेटवर्क विहीन स्कूलों की जानकारी मांगी गई है। जिलों से यह डेटा जल्द विभाग तक पहुंचेगा। इसमें उन स्कूलों की सूची होगी जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है।



इसके साथ ही वहां कार्यरत अतिथि शिक्षकों की जानकारी भी जुटाई जाएगी। लंबित मानदेय का पूरा ब्योरा भी इकट्ठा किया जाएगा। यह डेटा आगे की कार्रवाई के लिए इस्तेमाल होगा।



री-ज्वाइनिंग व मानदेय

जिलों से मिली जानकारी के आधार पर डीपीआई आगे कदम उठाएगा। नेटवर्क समस्या से प्रभावित शिक्षकों की री-ज्वाइनिंग जल्द होगी। साथ ही अटका हुआ मानदेय भी जारी किया जाएगा। इससे सैकड़ों शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है।



जिन शिक्षकों को सिर्फ तकनीकी वजह से परेशानी हो रही थी, उनकी मुश्किल अब दूर होगी। यह कदम शिक्षकों के लिए राहत भरा माना जा रहा है।



दूरस्थ क्षेत्रों का फायदा

मध्य प्रदेश के कई गांव अब भी नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे इलाकों में ऑनलाइन काम करना मुश्किल होता है। अटेंडेंस से लेकर री-ज्वाइनिंग तक हर प्रक्रिया प्रभावित होती है।



डीपीआई की नई पहल से इन क्षेत्रों के शिक्षकों को खास फायदा मिलेगा। पहली बार अलग से नेटवर्क विहीन स्कूलों की सूची तैयार हो रही है। इससे असली समस्या वाले शिक्षकों की पहचान आसान होगी। समाधान भी तेजी से हो सकेगा।



दोनों तरफ बदलाव

स्कूल शिक्षा विभाग एक साथ दो दिशाओं में काम कर रहा है। एक तरफ नियमित शिक्षकों के लिए नियम सख्त हो रहे हैं। दूसरी तरफ अतिथि शिक्षकों की पुरानी समस्या दूर करने की कोशिश हो रही है।



अगर सुबह 10 बजे का नियम लागू होता है तो शिक्षकों को समय की पाबंदी रखनी होगी। वहीं नेटवर्क विहीन इलाकों के अतिथि शिक्षकों को री-ज्वाइनिंग और मानदेय में जल्द राहत मिल सकती है। दोनों फैसले आने वाले समय में स्कूली व्यवस्था पर असर डालेंगे।



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