शिक्षकों के प्रमोशन के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची एमपी सरकार, पुराने नियमों से छूट देने की मांग

Aman Vaishnav | Aug 07, 2026, 09:30 IST
शिक्षकों के प्रमोशन के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची एमपी सरकार
मध्य प्रदेश सरकार ने 75 हजार शिक्षकों के प्रमोशन के लिए सुप्रीम कोर्ट में पूरक याचिका दायर की है। स्कूल शिक्षा विभाग ने याचिका दायर कर मांग की है कि 2005 और 2008 की संविदा परीक्षा को TET के बराबर माना जाए ताकि इन शिक्षकों को दोबारा परीक्षा न देनी पड़े।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है।
  • मामला 75 हजार शिक्षकों के प्रमोशन से जुड़ा है।
  • ये शिक्षक 2005 से 2009 के बीच नियुक्त हुए थे।
  • सरकार चाहती है पुरानी पात्रता परीक्षा को टीईटी माना जाए।
  • साथ ही 7500 नए शिक्षकों को पोस्टिंग बदलने का मौका मिलेगा।

सरकार ने क्यों दायर की याचिका

स्कूल शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में पूरक याचिका दायर की है। यह याचिका 75 हजार शिक्षकों के हित में है। इन शिक्षकों की नियुक्ति 2005 से 2009 के बीच हुई थी। विभाग चाहता है इनके प्रमोशन (शिक्षकों का प्रमोशन) का रास्ता खुले।



विभाग की मांग है कि 2005 और 2008 की संविदा शाला शिक्षक श्रेणी-2 पात्रता परीक्षा को टीईटी (TET) के बराबर माना जाए।



विभाग का कहना है कि उस समय की परीक्षा का पैटर्न टीईटी जैसा ही था। इसलिए शिक्षकों को दोबारा परीक्षा देने की जरूरत नहीं है।



शिक्षा के अधिकार का हवाला

विभाग ने कोर्ट में तर्क दिया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम अप्रैल 2010 में लागू हुआ। जबकि मध्य प्रदेश में पात्रता परीक्षा की व्यवस्था 2005 से ही चल रही थी। इसलिए विभाग का मानना है कि 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को राहत मिलनी चाहिए।



सरकार को उम्मीद है कि कोर्ट से राहत मिलने पर 2005-09 में नियुक्त शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता साफ हो जाएगा।



यह फैसला हजारों शिक्षकों के करियर के लिए अहम माना जा रहा है। लंबे समय से ये शिक्षक प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं।



मिसलेनियस एप्लीकेशन क्या होती है

मिसलेनियस एप्लीकेशन किसी चल रहे मामले में दायर होती है। इसमें अतिरिक्त राहत, समय बढ़ाने या दस्तावेज जोड़ने की मांग की जाती है।



यह नया मुकदमा नहीं, बल्कि पुराने मामले का ही हिस्सा होती है। इसी वजह से सरकार ने अलग मुकदमा दायर नहीं किया।



टीईटी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में साफ कर दिया है कि टीईटी पास करना अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा है कि अगस्त 2028 तक टीईटी पास न करने वाले शिक्षकों की सेवा समाप्त हो सकती है।



यही वजह है कि सरकार पुराने शिक्षकों के लिए राहत मांग रही है। यह फैसला हजारों शिक्षकों को सीधे प्रभावित करता है।



7500 नए शिक्षकों को पोस्टिंग बदलने का मौका

वहीं इसी साल नियुक्त हुए करीब सात हजार 500 प्राइमरी शिक्षकों के लिए भी बड़ी खबर है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इनकी पोस्टिंग बदलने के निर्देश जारी किए हैं। शिक्षक अब आपसी सहमति से जिला और स्कूल बदल सकेंगे।



शर्त यह है कि दोनों शिक्षकों को एक-दूसरे के ही स्कूल में जाना होगा। यानी अगर गांव का शिक्षक शहर आना चाहता है, तो शहर वाले शिक्षक को उसी गांव के स्कूल जाना होगा। इससे दोनों तरफ के पद खाली नहीं रहेंगे।



बदलाव की शर्तें

यह बदलाव सिर्फ समान श्रेणी में ही होगा। सामान्य वर्ग का शिक्षक सामान्य वर्ग से ही बदलेगा। एससी और एसटी शिक्षकों पर भी यही नियम लागू होगा।



आवेदन की प्रक्रिया 10 और 11 अगस्त को होगी। शिक्षकों को पोर्टल पर आवेदन करना होगा। दोनों पक्षों का लिखित सहमति पत्र भी पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।



पति-पत्नी शिक्षकों को राहत

अलग-अलग जिलों में पदस्थ पति-पत्नी शिक्षकों के लिए भी सुविधा दी गई है। वे अब एक ही जिले में आने का आवेदन कर सकेंगे। हालांकि इसके लिए उस जिले में पद खाली होना जरूरी होगा।



विभाग के इस फैसले से कई परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से कई शिक्षक अपने परिवार के पास पोस्टिंग की मांग कर रहे थे। अब उनके लिए यह मौका पोर्टल के जरिए खुल गया है।



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एमपी में टीईटी पास शिक्षकों को ही मिलेगा प्रमोशन



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