शिक्षक भर्ती पर शिक्षा मंत्री का बड़ा बयान, एक साथ नहीं भरेंगे सभी खाली पद

Sanjay Dhiman | Sept 02, 2026, 17:57 IST
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मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती को लेकर मंत्री उदय प्रताप सिंह का बड़ा बयान। कहा, दो साल में 18 हजार पद भरेंगे। अतिथि शिक्षकों और आरक्षण का भी रखा जाएगा हिसाब।

मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ा आंदोलन चल रहा है। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सरकार का रुख साफ किया है। अगले दो साल में करीब 18 हजार पदों पर भर्ती होगी। मंत्री ने कहा, सभी खाली पद एक साथ नहीं भरे जा सकते। आरक्षण, बैकलॉग और अतिथि शिक्षकों का हिसाब भी जरूरी है।



भोपाल से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां शिक्षक भर्ती को लेकर मंत्री ने अहम बयान दिया है।



पिछले कई दिनों से युवा भर्ती की मांग कर रहे हैं। वे शिक्षक बनने का सपना देख रहे हैं। वे लगातार आंदोलन कर रहे हैं। इसी बीच स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह का बयान सामने आया है।



मंत्री का बड़ा बयान

मंत्री उदय प्रताप सिंह ने साफ कहा है कि सभी खाली पद एक साथ नहीं भरे जा सकते। उन्होंने बताया कि अगले दो साल में करीब 18 हजार पदों पर भर्ती होगी। यह भर्ती चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी।



मंत्री का यह बयान उन अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है। वे लंबे समय से भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। मंत्री ने भर्ती की सीमाओं को भी खुलकर बताया।



शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर प्रदेश में माहौल गरम है। ऐसे में सरकार का यह बयान चर्चा का विषय बन गया है।



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अतिथि शिक्षकों का मुद्दा

मंत्री ने खाली पदों की गिनती पर भी बात की। उन्होंने कहा कि रिक्त पदों की संख्या बताते समय एक बात छूट जाती है। अतिथि शिक्षकों को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है।



प्रदेश में करीब 70 हजार अतिथि शिक्षक पहले से काम कर रहे हैं। मंत्री के अनुसार इन्हें भी रिक्त पदों की गणना में शामिल किया जाना चाहिए। इसी वजह से दिखने वाले खाली पद अलग हो सकते हैं। असल में भरे जाने वाले पद भी अलग हो सकते हैं।



मंत्री का तर्क है कि हर खाली जगह का नया आकलन ठीक नहीं। इससे भर्ती की असल तस्वीर उलझ सकती है।



आरक्षण और बैकलॉग का पेच

मंत्री ने भर्ती प्रक्रिया में आने वाली तकनीकी अड़चनों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि रिक्त पदों की गणना आसान नहीं है। इसमें आरक्षण व्यवस्था का भी ध्यान रखना होता है।



बैकलॉग पदों के अलावा ओबीसी (OBC – Other Backward Classes) आरक्षण के 13 फीसदी पद अलग रखे जाते हैं। इसी कारण रिक्त पद और तुरंत भरे जाने वाले पद अलग-अलग होते हैं।



यही तकनीकी पेच भर्ती प्रक्रिया को धीमा बना देता है। विभाग को हर पद का कानूनी हिसाब रखना पड़ता है।



मुख्यमंत्री का निर्देश

मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री ने विभाग को साफ निर्देश दिए हैं। निर्देश है कि जितने पद खाली हैं, उतने ही पद भरे जाएं।



हालांकि इस प्रक्रिया में आरक्षण, बैकलॉग और अन्य कानूनी प्रावधानों का पालन जरूरी है। इसी वजह से भर्ती में समय लग रहा है।



सरकार का कहना है कि वह भर्ती को लेकर गंभीर है। लेकिन नियमों का पालन करना भी उतना ही जरूरी है।



क्यों अटकी है भर्ती

शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया लंबे समय से उलझी हुई है। आरक्षण और बैकलॉग के नियम इसकी बड़ी वजह हैं।



अतिथि शिक्षकों की मौजूदगी भी हिसाब को जटिल बनाती है। यही वजह है कि रिक्त पदों का सही आंकड़ा तय करना आसान नहीं है।



बड़ी बातें एक नजर में

मंत्री के बयान से तीन बातें साफ हो गई हैं। पहली, एक साथ सभी पद नहीं भरेंगे। दूसरी, अगले दो साल में लगभग 18 हजार पदों पर भर्ती होगी। तीसरी, अतिथि शिक्षकों को भी हिसाब में जोड़ा जाएगा।



इन तीन बिंदुओं से भर्ती को लेकर सरकार की मंशा साफ झलकती है। सरकार चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ना चाहती है, जल्दबाजी में नहीं।



भर्ती से जुड़े जरूरी सवाल

शिक्षक भर्ती को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि कब और कितने पद भरे जाएंगे। मंत्री के बयान से इस पर कुछ हद तक स्पष्टता आई है।



दूसरा बड़ा सवाल अतिथि शिक्षकों की भूमिका को लेकर है। मंत्री ने साफ किया कि इन्हें भी हिसाब में रखा जाएगा। इससे रिक्त पदों की गिनती में बदलाव आ सकता है।



आगे क्या होगा

आने वाले समय में सरकार चरणबद्ध तरीके से भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। करीब 18 हजार पदों पर भर्ती की तैयारी बताई जा रही है।



अभ्यर्थियों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर टिकी है। भर्ती से जुड़ी आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार अभी बना हुआ है।



स्कूलों में शिक्षकों की कमी लंबे समय से एक बड़ा मुद्दा रही है। यह भर्ती प्रक्रिया प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए अहम मानी जा रही है।



सरकार और अभ्यर्थियों के बीच कई मुद्दों पर स्थिति साफ होनी अभी बाकी है। आने वाले दिनों में भर्ती को लेकर और जानकारी सामने आ सकती है।



फिलहाल मंत्री का बयान भर्ती प्रक्रिया की दिशा तय करता है। अभ्यर्थियों की निगाहें अब सरकार के अगले फैसले पर हैं।



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