एमपी : डेढ़ लाख शिक्षकों की TET परीक्षा लेगा शिक्षा विभाग, फेल हुए तो जाएगी नौकरी
मध्य प्रदेश में 2009 से पहले नौकरी पाने वाले डेढ़ लाख शिक्षकों को अब टीईटी परीक्षा देनी होगी। यह परीक्षा कर्मचारी चयन मंडल कराएगा। लोक शिक्षण संचालनालय ने इसके लिए सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है। परीक्षा में फेल होने पर शिक्षकों को नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह कदम उठाया जा रहा है।
डेढ़ लाख शिक्षकों की परीक्षा होगी
मध्य प्रदेश के स्कूलों में इस वक्त कुल साढ़े तीन लाख शिक्षक पढ़ा रहे हैं। इनमें से डेढ़ लाख वे हैं जिन्हें 2009 से पहले नौकरी मिली थी।
इन्हीं डेढ़ लाख शिक्षकों को टीईटी यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा देनी होगी। बाकी शिक्षक इस परीक्षा के दायरे से बाहर हैं। यह परीक्षा कर्मचारी चयन मंडल आयोजित करेगा। राजधानी भोपाल स्थित लोक शिक्षण संचालनालय ने इसके लिए एक गाइडलाइन तैयार की है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश था पहले से
यह परीक्षा अचानक नहीं हो रही। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इस बारे में निर्देश दिए थे। शिक्षकों ने परीक्षा के खिलाफ अदालत में याचिका भी दायर की थी। लेकिन कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने परीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। अब सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है और जल्द ही परीक्षा की तारीख तय होगी।
फेल हुए तो नौकरी जाएगी
इस परीक्षा में जो शिक्षक पास नहीं होंगे उनकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है। यही वजह है कि शिक्षकों में काफी डर और गुस्सा है।
प्रदेश के कई हिस्सों में शिक्षक इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। विरोध के बावजूद विभाग ने तैयारी जारी रखी है। शिक्षा विभाग का कहना है कि यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए जरूरी है। बच्चों को बेहतर पढ़ाई मिले इसके लिए शिक्षकों की काबिलियत जांचना जरूरी है।
किन्हें मिली है छूट
सभी शिक्षकों को यह परीक्षा नहीं देनी होगी। 2009 के बाद भर्ती हुए शिक्षकों को इससे बाहर रखा गया है। जो शिक्षक रिटायरमेंट के करीब हैं उन्हें भी इस परीक्षा से छूट मिली है। बाकी सभी शिक्षकों को इसे पास करना अनिवार्य होगा।
विभाग क्या कह रहा है
लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक केके. द्विवेदी ने इस पूरे मामले पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि टीईटी के लिए प्रस्ताव पूरी तरह तैयार हो चुका है। उन्होंने कहा कि परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक कराई जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में विधि विशेषज्ञों की राय भी ली जा रही है। द्विवेदी के मुताबिक शिक्षक संगठनों के सुझाव भी शामिल किए जा रहे हैं। इसका मकसद यह है कि शिक्षक टीईटी परीक्षा का तरीका सबको मंजूर हो।
शिक्षा सुधार की बड़ी कोशिश
मध्य प्रदेश सरकार पिछले कुछ समय से स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने में जुटी है। इस टीईटी परीक्षा को उसी सिलसिले का हिस्सा माना जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर भी शिक्षकों की योग्यता जांचने पर जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी एनईपी (NEP – National Education Policy) में भी शिक्षकों की गुणवत्ता पर जोर है।
इस परीक्षा से यह भी साफ होगा कि कौन से शिक्षक बच्चों को सही तरीके से पढ़ाने में सक्षम हैं। आने वाले हफ्तों में परीक्षा की तारीख का ऐलान हो सकता है।
FAQ
- MP में कितने शिक्षकों को TET देनी होगी?
मध्य प्रदेश में 2009 से पहले भर्ती हुए करीब डेढ़ लाख शिक्षकों को टीईटी देनी होगी। 2009 के बाद भर्ती शिक्षक और रिटायरमेंट के करीब शिक्षक इससे बाहर हैं। कुल साढ़े तीन लाख शिक्षकों में से यही डेढ़ लाख परीक्षा के दायरे में आते हैं। - TET में फेल होने पर क्या होगा?
परीक्षा में फेल होने वाले शिक्षकों को नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। यही वजह है कि प्रदेश के शिक्षकों में इस परीक्षा को लेकर काफी चिंता है। विभाग ने अभी तक फेल होने पर की जाने वाली सटीक कार्रवाई का पूरा ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है। - यह परीक्षा क्यों कराई जा रही है?
यह परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आधार पर कराई जा रही है। शिक्षकों ने इसके खिलाफ याचिका दायर की थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना इसका मुख्य उद्देश्य है।
यह खबरें भी पढ़ें...
अब ई-अटेंडेंस से जुड़ेगी शिक्षकों की सैलरी, गैरहाजिरी पर कटेगा वेतन
मुरैना में फर्जी दिव्यांग शिक्षकों का बड़ा खुलासा, 47 संदिग्धों पर जांच तेज
MP के कॉलेजों में काउंसलर जरूरी: 6 से 8 जुलाई के बीच शिक्षकों को मिलेगी ट्रेनिंग
एमपी एटीएस ने राजस्थान से पकड़ा तीसरा संदिग्ध आतंकी, PFI कमांडर निकला