मध्यप्रदेश में आज से शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया शुरू, ऑनलाइन करें आवेदन
समझें क्या है पूरा मामला...
- एमपी स्कूल शिक्षा विभाग ने स्वैच्छिक तबादले के लिए आवेदन आज से शुरू हो गए हैं।
- आवेदन करने की अंतिम तारीख 23 जून 2026 है।
- विभाग ने तीन कठोर शर्तें रखी हैं जिनसे शिक्षकों में नाराजगी है।
- शिक्षक संगठन का दावा है कि 95% शिक्षक इन शर्तों के कारण आवेदन नहीं कर पाएंगे।
- संगठन ने राज्य सरकार से नीति में बदलाव की मांग की है।
तबादले की ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू
मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने स्वैच्छिक तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया आज 19 जून से शुरू हो गई है। आवेदन 23 जून तक लिए जाएंगे। बता दें कि प्रदेश में कुल चार लाख 25 हजार शिक्षक हैं।
इनमें से बड़ी तादाद ऐसे शिक्षकों की है जो लंबे समय से तबादले का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन विभाग की शर्तें इतनी कड़ी हैं कि अधिकांश शिक्षक आवेदन ही नहीं कर पाएंगे।
शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने इस नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह नीति कागजों पर तो है, लेकिन जमीन पर काम नहीं करेगी।
तीन शर्तें जो बनी हैं रोड़ा
विभाग ने स्वैच्छिक तबादले के लिए तीन मुख्य शर्तें रखी हैं।
- पहली शर्त है 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस यानी डिजिटल हाजिरी की अनिवार्यता।
- दूसरी शर्त है कि जनगणना कार्य में लगे शिक्षक तबादले के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं।
- तीसरी शर्त है कम से कम तीन साल की सेवा अवधि पूरी होना।
उपेंद्र कौशल के मुताबिक प्रदेश के लगभग 75 प्रतिशत शिक्षक इस समय जनगणना कार्य में लगे हुए हैं। इससे वे तबादला आवेदन से खुद-ब-खुद बाहर हो जाते हैं। बची हुई संख्या में भी बड़ी तादाद ऐसे शिक्षकों की है जिनकी ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत से कम है।
ई-अटेंडेंस की खामियां भी बनीं परेशानी
ई-अटेंडेंस की शर्त तकनीकी कारणों से भी विवादास्पद बन गई है। शिक्षकों का कहना है कि कई बार नेटवर्क की समस्या, सर्वर डाउन या ऐप की खराबी की वजह से हाजिरी दर्ज नहीं हो पाती है।
ऐसे में शिक्षक वास्तव में स्कूल में मौजूद होते हैं, लेकिन रिकॉर्ड में गैरहाजिर दिखता है। अब यही रिकॉर्ड उनके तबादले में बाधा बन रहा है।
कौशल ने कहा कि कई व्यक्तिगत कारणों से वर्षों से तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए यह नीति अन्याय जैसी है।
जनगणना ड्यूटी भी बनी रुकावट
पहले जारी प्रशासनिक तबादला आदेशों में भी यह उल्लेख था कि, अगर किसी शिक्षक की जनगणना ड्यूटी लगी है तो उसका तबादला आदेश स्वतः निरस्त माना जाएगा।
इसका मतलब यह हुआ कि जनगणना में लगे शिक्षकों के लिए दोनों तरफ से रास्ता बंद है। न प्रशासनिक तबादला हो सकता है न स्वैच्छिक।
संगठन का तर्क है कि जनगणना एक सरकारी काम है, जो शिक्षकों को सरकार खुद करवाती है। ऐसे में इसी काम को उनके तबादले में बाधा बनाना उचित नहीं है।
95 प्रतिशत शिक्षक हो सकते हैं बाहर
उपेंद्र कौशल ने दावा किया है कि सभी शर्तों को मिला दें तो स्वैच्छिक तबादला चाहने वाले लगभग 95 प्रतिशत शिक्षक आवेदन ही नहीं कर पाएंगे। इस हिसाब से लाखों शिक्षक एक बार फिर अपनी पसंद की जगह पर तबादले से वंचित रह जाएंगे।
संगठन का कहना है कि शासन की नीयत तबादला करने की है, लेकिन शर्तें ऐसी हैं कि नीति का फायदा व्यावहारिक रूप से किसी को मिल नहीं पाएगा।
संगठन की मांग
शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की है। संगठन ने कहा कि तीनों शर्तों में व्यावहारिक छूट दी जाए। संगठन चाहता है कि ई-अटेंडेंस की सीमा घटाई जाए।
साथ ही जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षकों को भी तबादले की अनुमति दी जाए। तीन साल की अनिवार्य सेवा अवधि की शर्त में भी राहत मिले। उपेंद्र कौशल का कहना है कि इन बदलावों से पात्र शिक्षकों को राहत मिलेगी। सरकार की तबादला नीति का असली मकसद भी पूरा हो सकेगा।
FAQ
- मध्यप्रदेश में शिक्षकों के स्वैच्छिक तबादले के लिए आवेदन कब से कब तक होंगे?
स्कूल शिक्षा विभाग ने स्वैच्छिक तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 19 जून 2026 से शुरू की है। आवेदन की अंतिम तारीख 23 जून 2026 है। आवेदन ऑनलाइन माध्यम से किए जा सकते हैं। - शिक्षक स्वैच्छिक तबादला नीति की कौन सी शर्तों पर विवाद है?
तीन मुख्य शर्तों पर विवाद है। पहली, 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस अनिवार्य है। दूसरी, जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षक आवेदन नहीं कर सकते। तीसरी, कम से कम तीन साल की सेवा अवधि जरूरी है। शिक्षक संगठन का कहना है कि इन तीनों शर्तों की वजह से 95 प्रतिशत शिक्षक आवेदन करने से वंचित रह जाएंगे। - मध्यप्रदेश के शिक्षक संगठन ने सरकार से क्या मांग की है?
शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने मांग की है कि ई-अटेंडेंस की सीमा घटाई जाए, जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षकों को तबादले की अनुमति दी जाए और तीन साल की सेवा अवधि की शर्त में भी राहत दी जाए। संगठन ने कहा है कि इससे वर्षों से इंतजार कर रहे पात्र शिक्षकों को न्याय मिलेगा।
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