दिल्ली मॉडल पर मिलेगा एमपी के शिक्षकों को अर्जित अवकाश: सरकार का अहम फैसला
मध्य प्रदेश सरकार ने 1 मई से शुरू हुई जनगणना के दौरान शिक्षकों के लिए एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने शिक्षकों को अर्जित अवकाश देने का निर्णय लिया है, जो कि दिल्ली सरकार की तर्ज पर है। इस फैसले से उन शिक्षकों को राहत मिलेगी, जिनकी ड्यूटी जनगणना और चुनाव कार्य में लगी है।
दिल्ली सरकार की तर्ज पर निर्णय
दिल्ली में शिक्षकों को जनगणना और चुनाव ड्यूटी के दौरान अर्जित अवकाश (Earned Leave) देने का निर्णय पहले ही लिया गया था। अब मध्य प्रदेश सरकार ने भी शिक्षक संगठनों की मांग को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। इसके अंतर्गत, शिक्षकों को अपनी ड्यूटी के दौरान ई-अटेंडेंस लगाना होगा। उसी के आधार पर उनका अर्जित अवकाश संचित किया जाएगा।
शिक्षक संगठनों की मांग
मध्य प्रदेश शिक्षक संगठन ने पहले दिल्ली सरकार की तर्ज पर एमपी में भी अर्जित अवकाश की सुविधा देने की मांग की थी। संगठन के कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने सरकार से यह मांग की थी कि जनगणना और चुनाव के दौरान शिक्षकों को बेहतर सम्मान और अवकाश मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा था कि शिक्षक अक्सर गैर-शैक्षिक कार्यों जैसे चुनाव, सर्वेक्षण और जनगणना में लगे रहते हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें उचित अवकाश और सम्मान नहीं मिल पाता। इस मांग को सरकार ने गंभीरता से लिया और जल्द ही आदेश जारी कर दिए।
आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय का आदेश
आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। इस आदेश के अनुसार, जब भी शिक्षकों को जनगणना या चुनाव कार्यों के लिए बुलाया जाएगा, तो उन्हें अर्जित अवकाश का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही, शिक्षकों को अपने ड्यूटी स्थल पर ई-अटेंडेंस लगाने का निर्देश भी दिया गया है।
ई-अटेंडेंस का महत्व
ई-अटेंडेंस प्रणाली को लेकर शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिक्षक अपनी उपस्थिति को ई-अटेंडेंस के माध्यम से दर्ज करें। इसके बाद विभाग शिक्षकों के अर्जित अवकाश पर विचार करेगा। ई-अटेंडेंस से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शिक्षकों की उपस्थिति सही तरीके से दर्ज हो रही है और इसका रिकॉर्ड विभाग के पास उपलब्ध रहेगा।
शिक्षकों की समस्याएं और सरकार का समाधान
शिक्षक संगठनों ने कई बार सरकार से यह अनुरोध किया था कि उन्हें जनगणना और चुनाव जैसी गैर-शैक्षिक कार्यों के लिए अधिक समय और सम्मान मिलना चाहिए। इस दिशा में सरकार का यह कदम एक सकारात्मक पहल है, जो शिक्षकों के लिए राहत का कारण बनेगा।
इस फैसले से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि शिक्षकों को उनके अधिकारों का सम्मान मिले और उन्हें अपनी ड्यूटी के दौरान उचित आराम और अवकाश की सुविधा मिले।
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