सालों से दफ्तरों में जमे शिक्षकों पर सख्ती, वेतन रोकने और स्कूल वापसी की तैयारी

Ramanand Tiwari | Jul 07, 2026, 22:16 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश में करीब 12 हजार शिक्षक वर्षों से स्कूल छोड़कर सरकारी दफ्तरों में जमे हैं। अब शिक्षा विभाग ने वेतन रोकने और ई-अटेंडेंस अनिवार्य करने का फैसला लिया है।

मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। हजारों शिक्षक वर्षों से स्कूलों में पढ़ाने के बजाय मंत्रालय, कलेक्ट्रेट और दूसरे सरकारी दफ्तरों में अटैच होकर काम कर रहे हैं। अब शिक्षा विभाग ने इस व्यवस्था पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। स्कूल से दूर रहने वाले शिक्षकों का वेतन रोका जाएगा और उन्हें वापस उनके मूल विद्यालय भेजा जाएगा।



आखिर क्यों सख्त हुआ शिक्षा विभाग?

सरकारी स्कूलों में लंबे समय से शिक्षकों की कमी की शिकायतें सामने आ रही थीं। विभागीय समीक्षा में पता चला कि हजारों शिक्षक अपने स्कूलों में नहीं हैं।



आयुक्त का साफ संदेश-स्कूल नहीं तो वेतन नहीं

लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के आयुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जो शिक्षक अपने मूल विद्यालय में पढ़ाने के बजाय दूसरे कार्यालयों में काम कर रहे हैं, उनका वेतन तत्काल रोका जाए। विभाग का कहना है कि शिक्षक की पहली जिम्मेदारी बच्चों को पढ़ाना है, न कि वर्षों तक दफ्तरों में बैठना।



ई-अटेंडेंस होगी अनिवार्य

अब सिर्फ स्कूल पहुंचना ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना भी जरूरी होगा। बिना ई-अटेंडेंस सत्यापन के किसी शिक्षक का वेतन जारी नहीं किया जाएगा। प्राचार्यों और संकुल प्रभारियों को भी इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है।



17 साल से स्कूल से दूर कई शिक्षक

विभागीय जानकारी के मुताबिक कई शिक्षक पिछले 15 से 17 वर्षों से मंत्रालय, जिला शिक्षा कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, पंचायत, राज्य शिक्षा केंद्र और दूसरे सरकारी दफ्तरों में अटैच हैं। राजधानी भोपाल में भी कई शिक्षक वर्षों से स्कूलों में नहीं लौटे हैं।



स्कूलों में पढ़ाई पर पड़ा सीधा असर

करीब 12 हजार शिक्षकों के स्कूलों से बाहर रहने का असर सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है।



भोपाल में भी चौंकाने वाली तस्वीर

भोपाल जिले में करीब 14 प्रतिशत शिक्षक ई-अटेंडेंस व्यवस्था से बाहर पाए गए। समीक्षा में सामने आया कि बड़ी संख्या में शिक्षक नियमित ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कर रहे हैं। अब इनके रिकॉर्ड की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।



10 जिलों में लापरवाही उजागर

विभागीय समीक्षा में यह भी सामने आया कि प्रदेश के करीब 10 जिलों में ई-अटेंडेंस व्यवस्था ठीक से लागू नहीं हो रही है। संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों से 24 घंटे के भीतर पूरी रिपोर्ट मांगी गई है।



  • करीब 12 हजार शिक्षक वर्षों से स्कूलों से बाहर।
  • 15–17 साल से दफ्तरों में जमे कई शिक्षक।
  • स्कूल नहीं लौटने वालों का वेतन रोका जाएगा।
  • बिना ई-अटेंडेंस अब वेतन नहीं मिलेगा।
  • सभी अटैच शिक्षकों की होगी स्कूल वापसी।
  • 10 जिलों से 24 घंटे में रिपोर्ट तलब।
  • अनावश्यक अटैचमेंट खत्म करने की तैयारी।

सरकार नई शिक्षक भर्ती की बात कर रही है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब हजारों नियुक्त शिक्षक वर्षों से स्कूलों के बजाय सरकारी दफ्तरों में बैठे रहे, तब शिक्षा व्यवस्था की निगरानी किसने की?



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