80 हजार शिक्षकों की पुरानी पेंशन पर विवाद: हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू याचिका लाएगा एमपी स्कूल शिक्षा विभाग

Amresh Kushwaha | Oct 04, 2026, 09:31 IST
शिक्षकों की पुरानी पेंशन पर नया पेंच।
मध्य प्रदेश में 80 हजार शिक्षकों की पुरानी पेंशन पर पेंच फंसा है। हाईकोर्ट ने 2018 में शामिल शिक्षकों को ओपीएस का हकदार माना था। तीन महीने बाद भी एमपी स्कूल शिक्षा विभाग ने कोई फैसला नहीं लिया है। अब विभाग इस फैसले के खिलाफ रिव्यू याचिका लगाने की तैयारी में है। 5 अक्टूबर को जबलपुर में वरिष्ठ अधिकारियों और वकीलों की बैठक होगी।
Old pension scheme dispute in Madhya Pradesh: the School Education Department plans a review petition against the High Court order on MP teachers pension.

हाईकोर्ट का फैसला और विभाग की बेरुखी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षकों के हक में बड़ा फैसला सुनाया था। अदालत ने पूर्व शिक्षाकर्मियों को न्यू पेंशन स्कीम से राहत दी थी। उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस विशाल धगट की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया था। तीन महीने बीतने के बाद भी विभाग ने सुध नहीं ली है।



क्या था कोर्ट का मुख्य आदेश

कोर्ट ने सुशील कुमार तिवारी बनाम मप्र शासन में फैसला दिया था। राज्य शासन को एनपीएस में काटा फंड ट्रांसफर करने को कहा था। शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना के दायरे में लाने का निर्देश था। साल 2008 के अध्यापक संवर्ग नियमों के नियम पांच का उल्लेख किया था। कोर्ट ने संविलियन को केवल पदनाम का बदलाव माना था।



फैसले के खिलाफ रिव्यू याचिका की तैयारी

एमपी स्कूल शिक्षा विभाग फैसले के खिलाफ रिव्यू याचिका लगाने की तैयारी में है। विभाग इस मामले को हाईकोर्ट की डबल बेंच में ले जाएगा। इस कानूनी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए बैठक बुलाई है। इसपर 05 अक्टूबर को जबलपुर में कानूनी विशेषज्ञों के साथ चर्चा होगी। महाधिवक्ता और अतिरिक्त महाधिवक्ता बैठक में मौजूद रहेंगे।



शासन पर वित्तीय भार का तर्क

पेंशन मामले से जुड़े अफसरों ने वित्तीय भार की बात कही है। इस फैसले से शासन पर भारी वित्तीय भार आना तय है। यह मामला 01 जनवरी 2005 से पहले नियुक्त शिक्षकों से जुड़ा है। इसका असर 30 दिसंबर 2004 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर पड़ेगा। इसी वजह से सरकार फैसले को चुनौती देने की तैयारी कर रही है।



संविलियन विवाद और शिक्षकों का पक्ष

पूरा विवाद 2018 में हुए संविलियन के समय से लंबित है। विभाग ने 2018 के नियमों का हवाला देकर एनपीएस थोप दिया था। शिक्षकों का कहना है कि उनकी सेवा में कोई व्यवधान नहीं था। शिक्षक नेता राजेश मिश्रा ने बताया कि विभाग को रिमाइंडर भेजे गए हैं। कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद भी पालन नहीं किया जा रहा है।



अब तक की पूरी टाइमलाइन

पूरे मामले को क्रम से समझिए। साल 2008 में अध्यापक संवर्ग नियम बने, जिनके नियम पांच का जिक्र कोर्ट ने किया था। साल 2018 में संविलियन हुआ और विभाग ने एनपीएस लागू किया था। इसके बाद शिक्षक पुरानी पेंशन की मांग लेकर हाईकोर्ट पहुंचे थे। करीब तीन महीने पहले एकल पीठ ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया था।



अब आगे क्या?

आगे की राह तीन बातों पर टिकी है। पहली, 05 अक्टूबर की बैठक में तय होने वाली कानूनी रणनीति। दूसरी, रिव्यू याचिका का दाखिल होना। तीसरी, डबल बेंच में इस मामले की सुनवाई। तब तक पुरानी पेंशन का सवाल अदालत और शासन के बीच अटका रहेगा।



पुरानी पेंशन क्यों है अहम?

पुरानी पेंशन योजना यानी old pension scheme में रिटायरमेंट के बाद तय पेंशन मिलती है। इसे ही ओपीएस कहा जाता है। एनपीएस में कर्मचारी के वेतन से हर महीने कटौती होती है।



सोचिए, पूरी नौकरी के बाद पेंशन का भरोसा न मिले, तो कैसा लगेगा? शिक्षकों की पुरानी पेंशन उनके रिटायरमेंट के बाद का सहारा मानी जाती है। इसलिए 80 हजार शिक्षकों के लिए यह सिर्फ पैसों का मामला नहीं है।



अब सवाल है कि रिव्यू याचिका के बाद शिक्षकों को क्या मिलेगा? दरअसल इसका जवाब अदालत की आगे की कार्यवाही में मिलेगा।



FAQs



  1. शिक्षकों की पुरानी पेंशन योजना का लाभ क्यों महत्वपूर्ण है?
    पुरानी पेंशन योजना रिटायरमेंट के बाद निश्चित पेंशन सुनिश्चित करती है, जो शिक्षकों के लिए उनके भविष्य का आर्थिक सहारा है।
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