एमपी में लाखों शिक्षकों के वेतन में होगी कटौती, सरकार ने 26 मई को बुलाई बैठक

Sanjay Dhiman | May 23, 2026, 14:49 IST
Photograph: (the sootr)
एमपी के साढ़े तीन लाख शिक्षकों के वेतन में कटौती की तैयारी है। सरकार ने शिक्षक संगठनों के भारी विरोध के बाद 26 मई को एक बड़ी आपातकालीन बैठक बुलाई है।

मध्यप्रदेश में इस समय शिक्षकों के वेतन और वेलफेयर को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रदेश के लगभग साढ़े तीन लाख शिक्षक अब वेतन कटौती का सामना करेंगे। यह कटौती स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षक वेलफेयर फंड बनाने के लिए प्रस्तावित है।



सरकारी योजना के अनुसार इस फंड में राशि सरकार की बजाय शिक्षकों के वेतन से जुटाई जाएगी। शिक्षक संगठन इसका विरोध कर रहे हैं और इसे अनुचित और अन्यायपूर्ण बता रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षकों का कल्याण सरकार की जिम्मेदारी है।



वेलफेयर के नाम पर सैलरी से कटौती का प्लान

एमपी स्कूल शिक्षा विभाग प्रदेश में एक नया शिक्षक वेलफेयर फंड बनाने जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस फंड में सरकार पैसा नहीं देगी। शिक्षकों के कल्याण के नाम पर पैसा उनकी ही सैलरी से काटा जाएगा। यानी आपकी भलाई का काम आपके ही पैसे काटकर किया जाएगा।



इस अजीब योजना को लेकर जमीनी स्तर पर नाराजगी देखने को मिल रही है। शिक्षकों का तर्क है कि वेलफेयर फंड का इंतजाम हमेशा सरकार ही करती है। वेतन से जबरन कटौती करना किसी भी मायने में सही नहीं कहा जा सकता।



विरोध की सुगबुगाहट और 26 मई को बैठक

शिक्षकों के चौतरफा भारी विरोध को देखते हुए शिक्षा विभाग थोड़ा बैकफुट पर आया है। अब इस पूरे मामले पर सहमति बनाने के लिए एक बैठक बुलाई गई है। लोक शिक्षण संचालनालय ने आगामी 26 मई को एक महत्वपूर्ण बैठक रखी है। इस बैठक में शामिल होने के लिए सभी बड़े शिक्षक नेता भोपाल पहुंचेंगे।



विभाग ने प्रदेश के कुल 15 प्रमुख शिक्षक संगठनों को पत्र जारी किया है। सभी संगठनों के प्रतिनिधियों को सीधे डीपीआई दफ्तर में तलब किया गया है। इस बैठक में समग्र शिक्षा अभियान के तमाम बड़े अधिकारी मौजूद रहेंगे। अपर परियोजना संचालक स्तर के अधिकारी शिक्षकों की दलीलें आमने-सामने बैठकर सुनेंगे।



छह महीने पहले तैयार हुआ था पूरा प्लान

शिक्षक नेताओं ने इस पूरी योजना के पीछे की क्रोनोलॉजी का खुलासा किया है। लोक शिक्षण आयुक्त के निर्देशों के मुताबिक यह फाइल काफी पुरानी है। बीते साल 19 नवंबर को स्कूल शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। शिक्षक कल्याण प्रतिष्ठान की कार्यकारिणी समिति ने तब यह प्रस्ताव पास किया था।



उसी बैठक में शिक्षकों के वेतन से कटौती की रूपरेखा तय हुई थी। छह महीने तक इस संवेदनशील फाइल को पूरी तरह दबाकर रखा गया था। अब अचानक इस आदेश को लागू करने से शिक्षक खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।



शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव: कक्षा 1 से 8 तक एआई की पढ़ाई

इस बड़े विवाद के बीच शिक्षा क्षेत्र से एक और बड़ी खबर आई है। मध्य प्रदेश में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चे अब एआई पढ़ेंगे। शुरुआती चरण में बच्चों को केवल कौशल आधारित एआई शिक्षा दी जाएगी। समय के साथ इस पाठ्यक्रम को और ज्यादा आधुनिक और बेहतर बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद इस नई योजना को हरी झंडी दिखाई है। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में निर्देश दिए हैं।



अतिथि शिक्षकों की भर्ती और सौ फीसदी परिणाम पर इनाम

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े लहजे में नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सत्र शुरू होने से पहले 1 जुलाई तक अतिथि शिक्षक भर्ती पूरी होगी। सभी सरकारी स्कूलों में बाउंड्रीवॉल का निर्माण कार्य तुरंत शुरू किया जाएगा। बोर्ड परीक्षाओं में शत-प्रतिशत परिणाम देने वाले स्कूल अब सम्मानित होंगे। बेहतर काम करने वाले शिक्षकों को सरकार की तरफ से मेडल मिलेंगे।



क्या है नई 'शिक्षा घर योजना'? जानिए पूरा सियासी गणित

मुख्यमंत्री ने बैठक में महत्वाकांक्षी 'शिक्षा घर योजना' को भी मंजूरी दी है। यह योजना उन बच्चों के लिए है जिनकी पढ़ाई बीच में छूट गई थी। किसी भी वजह से स्कूली शिक्षा पूरी न कर पाने वाले छात्र लाभ पाएंगे। उन्हें सीधे हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा पास करने का मौका मिलेगा।



कक्षा 8 के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले सभी युवा इसका लाभ उठा सकेंगे। यह योजना मध्य प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ लागू की जाएगी। सरकार इसके जरिए ड्रॉपआऊट रेट को पूरी तरह से कम करना चाहती है।



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