30 साल पुराने शिक्षक बेहाल, MP में 5 महीने से नहीं मिला वेतन
मध्यप्रदेश में इस वक्त अगर किसी विभाग की सबसे ज्यादा चर्चा है, तो वो है स्कूल शिक्षा विभाग। विभाग के स्कूलों की हालात कैसी है, ये UDISE की रिपोर्ट वक्त वक्त पर बताती ही रहती है। लेकिन अब तो आलम ये हो गया है कि विभाग शिक्षकों की सैलरी तक नहीं दे रहा है। आरोप लग रहे हैं कि मध्यप्रदेश का स्कूल शिक्षा विभाग लगभग 5 महीने से शिक्षकों की सैलरी दबाए बैठा है।
कौन हैं ये शिक्षक? मामला क्या है?
मामला मध्यप्रदेश के उन स्कूलों का है, जिन्हें शासन की तरफ से अनुदान मिलता है। यहां पढ़ाने वाले शिक्षक और काम करने वाले कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। क्योंकि इन शिक्षकों का आरोप है कि विभाग ने 5 महीने से उन्हें सैलरी नहीं दी है।
'द सूत्र' को इन शिक्षकों ने बताया कि मई 2026 से इनकी सैलरी रुकी हुई है। और जिन शिक्षकों और कर्मचारियों की सैलरी रुकी है उनकी संख्या लगभग 530 के आसपास है।
क्यों रुकी है इनकी सैलरी?
'द सूत्र' को पता चला कि इन शिक्षकों की सैलरी ये कहते हुए रोकी गई है कि स्कूलों का पहले भौतिक सत्यापन (वेरिफिकेशन) करवाया जाएगा।
वेरिफिकेशन करके सरकार ये देखना चाहती है कि इन अनुदान प्राप्त स्कूलों में कुल कितने शिक्षक हैं, और कितने बच्चे इन स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं?
इन स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों का कहना है कि अगर विभाग को सत्यापन ही करना था, तो गर्मियों की छुट्टियों में क्यों नहीं किया? अगर गर्मियों की छुट्टियों में ही सत्यापन कर लिया जाता तो न बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती, न ही किसी शिक्षक की सैलरी रुकती।
30 साल पहले हुए थी जॉइनिंग
बता दें कि इन शिक्षकों की जॉइनिंग लगभग 30 साल पहले हुई थी। इसके बाद तत्कालीन दिग्विजय सिंह की सरकार ने इनकी सेवा शर्तों में संशोधन किया।
संशोधन करके ये प्रावधान किया गया कि इन शिक्षकों की सैलरी में 20 फीसदी की कटौती होगी। इसके बाद ये शिक्षक हाईकोर्ट पहुंचे और वहां से केस जीते। लेकिन फिर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, वहां भी इन शिक्षकों की ही जीत हुई।
क्यों रुकी है सैलरी?
दावा किया जा रहा है कि विभाग के पास इन शिक्षकों की सैलरी का फंड नहीं है। 600 से ज्यादा अनुदान प्राप्त स्कूल मध्यप्रदेश में चल रहे हैं, इनमें हजारों छात्र पढ़ते हैं, लेकिन सरकार बजट की कमी बताकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है।
बताया जा रहा है कि लोक शिक्षण संचालनालय मांग के आधार पर राशि बांटता है। इसके लिए हर साल भौतिक सत्यापन जरूरी होता है।
जिम्मेदार क्या बोले?
इस मामले में जानकारी के लिए लोक शिक्षण संचालनालय के डिप्टी डायरेक्ट, अंजनि त्रिपाठी से संपर्क करने की कोशिश की गई। लेकिन उन्होंने फोन काट दिया।
'द सूत्र' ने उन्हें मैसेज भी किया है। लोक शिक्षण संचालनालय के कमिश्नर अभिषेक सिंह को भी मैसेज किया। हमें उनका भी जवाब नहीं मिला। जवाब आने पर उनका भी पक्ष बताया जाएगा।
'द सूत्र' ने पहले भी उठाया था मुद्दा
द सूत्र ने 28 जुलाई 2026 को भी इस मुद्दे को उठाया था। हमने बताया था कि मध्यप्रदेश के 43 जिलों में 926 शिक्षक और कर्मचारी ऐसे हैं, जो सरकारी अनुदान के भरोसे हैं।
सबसे ज्यादा 155 कर्मचारी जबलपुर में, 93 ग्वालियर में और 79 कर्मचारी इंदौर में कार्यरत हैं। जबकि मुरैना में 76 शिक्षक हैं। बाकी जिलों में इन शिक्षकों की संख्या 50 से कम है।
इन सभी का वेतन पूरी तरह अनुदान पर निर्भर है। रक्षाबंधन बीत जाने के बाद भी इन कर्मचारियों और शिक्षकों को सैलरी नहीं मिली है। जिसकी वजह से इनके अंदर अब नाराजगी बढ़ती जा रही है।
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