तीसरी बार बढ़ी एमपी टीईटी की डेडलाइन, अब 11 अक्टूबर तक कर सकेंगे अप्लाई, मंत्री बोले- फार्म भरें, आंदोलन खत्म करें
11 अक्टूबर तक मिला मौका
मध्यप्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (एमपी टीईटी) के लिए आवेदन प्रक्रिया 21 अगस्त से शुरू हुई थी। तब से अंतिम तारीख तीन बार आगे बढ़ चुकी है। अब ऑनलाइन आवेदन 11 अक्टूबर तक होंगे। आवेदन शुल्क 12 अक्टूबर तक जमा किया जा सकेगा।
पहले अंतिम तारीख 05 अक्टूबर तय थी। फिर उसे छह दिन और बढ़ाया गया था। आवेदन में सुधार का मौका भी मिलेगा। संशोधन 12 अक्टूबर तक किया जा सकेगा।
आवेदन इतने कम क्यों आए?
करीब डेढ़ लाख शिक्षक इस परीक्षा के दायरे में हैं। लेकिन अब तक सिर्फ 22 से 24 हजार ने फॉर्म भरे हैं। इनमें करीब चार हजार सरकारी शिक्षक हैं।
यानी जिन शिक्षकों को आवेदन करना है, उनमें से बहुत कम आगे आए। इसी धीमी रफ्तार और कम संख्या को देखकर समय सीमा बढ़ाई गई है।
स्कूल शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कम से कम 50 हजार आवेदन आने पर तैयारी शुरू होगी। मौजूदा संख्या इससे आधे के आसपास है। यही सरकार की चिंता मानी जा रही है।
मंत्री और मोर्चे की बैठक
अंतिम तारीख पर कम आवेदन आए तो सरकार सक्रिय हुई। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों को बात करने के लिए बुलाया। बैठक वल्लभ भवन में हुई थी। चर्चा करीब 20 मिनट चली।
लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह भी बैठक में मौजूद थे। उन्होंने पदाधिकारियों से आवेदन करने को कहा। साथ ही तारीख छह दिन बढ़ाने की जानकारी दी।
मंत्री ने कहा कि यह परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कराई जा रही है। इसलिए आंदोलन खत्म कीजिए और फॉर्म भरिए।
मोर्चे के पदाधिकारियों का जवाब अलग था। उन्होंने कहा कि पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलवाइए। उनकी तीन मांगें हैं। यदि सीएम के साथ बैठक में मांगों पर सहमति बनी, तो आंदोलन खत्म कर देंगे।
इस पर मंत्री बोले कि वे सीएम से बात करके मीटिंग तय करेंगे। फिर भी सोमवार, 05 अक्टूबर की बैठक बेनतीजा रही। मोर्चे ने साफ कहा कि बात नहीं सुनी गई तो आंदोलन जारी रहेगा।
भूख हड़ताल की तीन मांगें
भोपाल के नीलम पार्क में रविवार, 04 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन क्रमिक भूख हड़ताल चल रही है। इसे अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने शुरू किया है। क्रमिक का मतलब है कि लोग बारी-बारी से बैठते हैं। हर दिन रोटेशन पर करीब 400 शिक्षक धरने पर बैठते हैं।
- मोर्चे की पहली मांग टीईटी निरस्त करने की है।
- दूसरी मांग है कि सेवा अवधि की गिनती पहली नियुक्ति की तारीख से हो।
- तीसरी मांग ई-अटेंडेंस व्यवस्था खत्म करने की है।
इस हड़ताल में कई संगठन शामिल हैं। इनमें राज्य शिक्षक संघ, प्रांतीय शिक्षक संघ और शासकीय शिक्षक संगठन हैं। राज्य शिक्षक कांग्रेस, ओल्ड और न्यू पेंशन संगठन भी साथ हैं। ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन और गुरुजी प्राथमिक शिक्षक संघ भी शामिल हैं।
मोर्चे के पदाधिकारी उपेंद्र कौशल ने सोमवार की बैठक पर बात रखी। उनके मुताबिक शिक्षकों पर आवेदन करने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर में छूट संभव है, तो मध्यप्रदेश में क्यों नहीं।
परीक्षा कब और कौन कराएगा?
टीईटी को लेकर शुरुआत से ही विरोध चल रहा है। पहले परीक्षा कर्मचारी चयन मंडल से ऑनलाइन कराई जानी थी। विरोध हुआ तो सीएम ने इसे ऑफलाइन करने का निर्देश दिया था। फिर परीक्षा एजेंसी माध्यमिक शिक्षा मंडल को बनाया गया था।
मंडल के अफसरों के मुताबिक फॉर्म आने के बाद कम से कम दो महीने तैयारी में लगेंगे। विभाग की जानकारी के अनुसार परीक्षा दिसंबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह में हो सकती है। यह अभी अनुमान है, पक्की तारीख नहीं।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल दो बातें साफ दिखती हैं। सरकार चाहती है कि शिक्षक 11 अक्टूबर तक आवेदन कर दें। दूसरी तरफ संगठन अपनी मांगों पर अड़े हैं।
अगर सीएम के साथ बैठक हुई और बात बनी, तो हड़ताल खत्म हो सकती है। नहीं बनी तो आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में आवेदन की संख्या पर सबकी नजर रहेगी।
शिक्षकों के लिए सलाह साफ है। ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख 11 अक्टूबर है। इसे आखिरी दिन पर न छोड़ें। फॉर्म में सुधार का मौका 12 अक्टूबर तक है।