टीईटी से पहले शिक्षकों में नई चर्चा, पास कराने के दावों पर सवाल, आंदोलन पर मंथन
शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर प्रदेशभर में हलचल बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार परीक्षा की तैयारी में जुटी है, लेकिन इसी बीच शिक्षकों के बीच एक अलग तरह की चर्चा भी शुरू हो गई है। कुछ शिक्षक दावा कर रहे हैं कि एक शिक्षक संगठन के पदाधिकारी उन्हें परीक्षा को लेकर जरूरत से ज्यादा आश्वस्त कर रहे हैं, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
नाम न छापने की शर्त पर कई शिक्षकों ने बताया कि उन्हें कहा जा रहा है कि परीक्षा को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। शिक्षकों का दावा है कि उन्हें यह संदेश दिया जा रहा है कि सरकार ही परीक्षा कराएगी और अधिकांश शिक्षक आसानी से इसे पास कर लेंगे।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इन्हीं चर्चाओं ने शिक्षक समुदाय के भीतर नई बहस छेड़ दी है। कई शिक्षकों का सवाल है कि जब परीक्षा की प्रक्रिया और स्वरूप अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, तब इतनी निश्चितता के साथ आश्वासन कैसे दिया जा रहा है?
ऑनलाइन परीक्षा को लेकर सबसे ज्यादा चिंता
ग्रामीण और वरिष्ठ शिक्षकों के बीच सबसे बड़ी चिंता परीक्षा नहीं, बल्कि उसकी संभावित ऑनलाइन प्रक्रिया को लेकर है। कई शिक्षकों का कहना है कि वर्षों से स्कूलों में पढ़ा रहे अनेक शिक्षक कंप्यूटर आधारित परीक्षा के अभ्यस्त नहीं हैं।
कुछ शिक्षकों का कहना है कि यदि परीक्षा ऑनलाइन हुई तो बड़ी संख्या में शिक्षक तकनीकी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। ऐसे में केवल "चिंता मत करो" जैसे संदेश उनकी वास्तविक समस्या का समाधान नहीं हैं।
आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश?
शिक्षक समुदाय के एक वर्ग में यह चर्चा भी है कि परीक्षा के खिलाफ बन रहे दबाव और आंदोलन की धार को कमजोर करने के लिए लगातार आश्वस्त करने का माहौल बनाया जा रहा है।
कुछ शिक्षकों का आरोप है कि इससे पहले भी जब शिक्षकों के आंदोलन की तैयारी हुई थी, तब उसे कमजोर करने की कोशिशें हुई थीं। हालांकि उस समय शिक्षक संगठनों के एक बड़े वर्ग ने एकजुटता बनाए रखी थी।
असली सवाल: भरोसा किस पर?
टीईटी को लेकर अब बहस केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। बड़ा सवाल यह है कि शिक्षक किस पर भरोसा सरकारी तैयारी पर, कानूनी प्रक्रिया पर या उन आश्वासनों पर जो संगठनात्मक बैठकों और चर्चाओं में दिए जा रहे हैं।
शिक्षकों का एक वर्ग चाहता है कि सरकार जल्द से जल्द परीक्षा का पूरा प्रारूप, पाठ्यक्रम, परीक्षा पद्धति और मूल्यांकन प्रक्रिया सार्वजनिक करे ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
विभाग ने तेज की तैयारी
इधर स्कूल शिक्षा विभाग टीईटी आयोजित कराने की तैयारी में जुटा है। विभागीय स्तर पर जुलाई-अगस्त में परीक्षा कराने की संभावना पर काम चल रहा है। करीब डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों के परीक्षा में शामिल होने का अनुमान है।
विभाग ने संकेत दिए हैं कि अध्ययन सामग्री ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी ताकि शिक्षक घर बैठे तैयारी कर सकें। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप आवश्यक गाइडलाइन भी तैयार की जा रही हैं।
आंदोलन का भी ऐलान
दूसरी ओर विभिन्न शिक्षक संगठनों में परीक्षा को लेकर असंतोष बना हुआ है। शिक्षक दिवस पर राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की तैयारी की चर्चा है। मांग यह है कि पुराने नियमों के तहत नियुक्त शिक्षकों के सेवा अधिकारों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार आवश्यक कानूनी संशोधन करे।
• टीईटी को लेकर शिक्षकों में नई चर्चाएं शुरू।
• कुछ शिक्षकों ने परीक्षा संबंधी आश्वासनों पर सवाल उठाए।
• ऑनलाइन परीक्षा की संभावना से बढ़ी चिंता।
• तकनीकी दक्षता को लेकर वरिष्ठ शिक्षकों में असहजता।
• आंदोलन और विरोध की रणनीति पर भी मंथन जारी।
• जुलाई-अगस्त में परीक्षा कराने की तैयारी।
• करीब 1.5 लाख शिक्षकों के शामिल होने की संभावना।
इस स्टोरी का सबसे मजबूत बिंदु "टीईटी का डर नहीं, बल्कि परीक्षा को लेकर दिए जा रहे आश्वासनों पर शिक्षकों के बीच पैदा हुआ अविश्वास" है। राजनीतिक-संगठनात्मक संघर्ष और शिक्षक समुदाय की मनोदशा पर केंद्रित बनाता है।प्रांतीय संयोजक डीके सिंगोरे ने कहा कि शिक्षक परीक्षा प्रणाली पर भरोसा नहीं करते। इसलिए संयुक्त मोर्चा आरटीई एक्ट में संशोधन की मांग कर रहा है।
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