शिक्षकों को मिलेगी TET ऑफलाइन परीक्षा की सुविधा, सीएम मोहन यादव का ऐलान

Sandeep Kumar | Sept 05, 2026, 18:35 IST
शिक्षकों को मिलेगी ऑफलाइन परीक्षा की सुविधा
भोपाल में शिक्षक दिवस समारोह में सीएम मोहन यादव ने ऐलान किया कि मध्य प्रदेश में TET परीक्षा अब ऑफलाइन भी होगी। डेढ़ लाख शिक्षक परीक्षा देंगे।

समझें क्या है पूरा मामला

  • भोपाल में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित हुआ।
  • सीएम मोहन यादव और राज्यपाल मंगुभाई पटेल शामिल हुए।
  • उत्कृष्ट शिक्षकों को समारोह में सम्मानित किया गया।
  • मध्यप्रदेश में अब TET परीक्षा ऑफलाइन भी होगी।
  • फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लिया गया।

शिक्षक दिवस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मध्य प्रदेश में पहली बार शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET ऑफलाइन भी कराई जाएगी। इस परीक्षा में करीब डेढ़ लाख शिक्षक शामिल होंगे।



सीएम ने यह भी कहा कि सरकार का मकसद शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना है। शिक्षकों को बेहतर सुविधाएं देने पर भी जोर दिया जा रहा है। विद्यार्थियों को अच्छे अवसर मिलें, इसके लिए भी काम किया जा रहा है।



सरकारी स्कूलों की उपलब्धि

मुख्यमंत्री ने सरकारी स्कूलों के प्रदर्शन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षा में मेरिट सूची में आधे से ज्यादा बच्चे सरकारी स्कूलों के होते हैं। यह शिक्षकों की मेहनत और समर्पण को दिखाता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकारी स्कूल किसी भी सूरत में निजी स्कूलों से पीछे नहीं रहेंगे। सरकार हर विद्यार्थी को अच्छी शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है।



गुरु-शिष्य की भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छे शिक्षक की पहचान यही है कि उसका विद्यार्थी उससे भी आगे निकले। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि सिर्फ पढ़ाना काफी नहीं है। बच्चों की प्रतिभा पहचानना भी जरूरी है। उन्होंने एक पुरानी कहावत भी दोहराई। उनका कहना था कि जहां घमंड खत्म होता है, वहीं से गुण की शुरुआत होती है और वहीं गुरु खड़ा होता है।



शिक्षा में इनोवेशन जरूरी: राज्यपाल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भी समारोह में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ शिक्षा में इनोवेशन जरूरी है। भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने की जरूरत है।



उन्होंने कहा कि शिक्षा अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। कला, खेल और कौशल को भी बराबर महत्व मिलना चाहिए।



बच्चों के संस्कार घर से शुरू हों

राज्यपाल ने कहा कि बच्चों की परवरिश सिर्फ शिक्षकों की जिम्मेदारी नहीं है। इसकी शुरुआत घर से होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि बच्चा दिन में करीब 16 घंटे परिवार के साथ रहता है। बाकी समय स्कूल में बीतता है।



उन्होंने माता-पिता से अपील की कि बच्चों से रोज बातचीत करें। स्कूल से लौटने पर उनसे दिन भर की बातें पूछी जाएं। इससे घर का माहौल पढ़ाई के अनुकूल बनता है।



असफलता को समझदारी से संभालें

राज्यपाल ने कहा कि परीक्षा में असफलता को जीवन की असफलता नहीं मानना चाहिए। बच्चे के कमजोर प्रदर्शन पर डांटने के बजाय प्यार से समझाना बेहतर है। उन्होंने शिक्षकों से भी कहा कि विद्यार्थियों को अपना बच्चा मानकर पढ़ाएं।



विकसित भारत 2047 के लिए जरूरी

राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य में शिक्षा की बड़ी भूमिका होगी। आज के विद्यार्थी ही 2047 में देश का नेतृत्व करेंगे। इसलिए उन्हें ज्ञान के साथ संस्कार और कौशल भी देना जरूरी है।



समारोह में स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह और खेल मंत्री विश्वास सारंग भी मौजूद रहे। इसके अलावा विधायक भगवानदास सबनानी और नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।



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