TET मामले में एमपी सरकार को राहत, सुप्रीम कोर्ट में 13 मई को सुनवाई तय

Aman Vaishnav | May 02, 2026, 11:38 IST
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मध्यप्रदेश सरकार ने TET को अनिवार्य बताने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू याचिका दायर की थी। कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया है और 13 मई को सुनवाई तय हुई है।

News In Short

  • सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी से जुड़ी मध्यप्रदेश सरकार की रिव्यू याचिका सुनने पर सहमति जताई है।
  • कोर्ट ने पहले फैसला दिया था कि शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना जरूरी है।
  • एमपी सरकार ने 17 अप्रैल को उस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने मामले को ओपन कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया है।
  • 13 मई को दोपहर 2 बजे इस मामले की अगली सुनवाई होगी।

News In Detail

क्या है पूरा मामला?

मध्यप्रदेश में हजारों शिक्षक टीईटी को लेकर चिंतित थे। सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा था कि शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य है।



इससे उन शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडराने लगा जो पहले से कार्यरत हैं लेकिन टीईटी नहीं दे पाए। इस फैसले के बाद कई कर्मचारी संगठन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिले और उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी।



सरकार ने उठाया बड़ा कदम

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मध्यप्रदेश शासन ने 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। यह याचिका सीधे उस आदेश को चुनौती देती है जिसमें टीईटी को अनिवार्य बताया गया था।



राज्य सरकार का तर्क है कि शिक्षकों के अधिकारों और उनके भविष्य की रक्षा जरूरी है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका से जुड़े आवेदनों को स्वीकार करते हुए मामले को ओपन कोर्ट में रखने का आदेश दिया है।



13 मई को होगी अहम सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनवाई 13 मई को दोपहर 2 बजे के लिए तय की है। यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की अनुमति के अधीन होगी। इस सुनवाई में सरकार अपना पूरा पक्ष विस्तार से रख सकेगी। शिक्षकों को उम्मीद है कि इस बार अदालत में उनकी बात ठीक से पहुंचेगी।



CM मोहन यादव ने क्या कहा?

सीएम मोहन यादव ने साफ कहा है कि प्रदेश सरकार शिक्षकों के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कर्मचारी संगठनों को भरोसा दिलाया था कि कोर्ट की प्रक्रिया में किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। सरकार हर समय शिक्षकों के साथ खड़ी रहेगी। यह सुनवाई उनके इसी वादे की अगली कड़ी है।



शिक्षकों के लिए क्यों अहम है यह सुनवाई?

इस मामले में सरकार का सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचना शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की बात है। पहले उन्हें अकेले यह लड़ाई लड़नी पड़ रही थी। अब राज्य सरकार खुद उनकी वकालत कर रही है।



ओपन कोर्ट में सुनवाई का मतलब है कि सरकार अपने तथ्य और तर्क खुलकर रख पाएगी। न्यायिक पुनर्विचार का यह मौका शिक्षकों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है।



यह खबर क्यों जरूरी है

मध्यप्रदेश में शिक्षकों की संख्या लाखों में है। टीईटी जैसी अनिवार्यता से उन हजारों शिक्षकों का भविष्य दांव पर लग जाता है जो सालों से कक्षाओं में पढ़ा रहे हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21-A के तहत शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है और इसके लिए पर्याप्त एवं योग्य शिक्षकों का होना जरूरी है।



जब सरकार खुद सुप्रीम कोर्ट में शिक्षकों की पैरवी करती है तो यह जवाबदेही और पारदर्शिता का एक अच्छा उदाहरण बनता है। यह खबर उन लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए सीधी जानकारी है जो इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं।



सामाजिक नैतिकता के लिहाज से भी यह जरूरी है कि अनुभवी शिक्षकों को केवल किसी परीक्षा की वजह से नौकरी से बेदखल न किया जाए।



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