डेढ़ लाख शिक्षकों की जाएगी नौकरी! सिर्फ 25 सौ ही TET आवेदन, शुक्रवार अंतिम दिन
मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के आवेदन की आखिरी तारीख शुक्रवार है। करीब डेढ़ लाख शिक्षकों को यह परीक्षा देनी है। अब तक सिर्फ 2575 शिक्षकों ने आवेदन किया है। शिक्षक संगठन इस परीक्षा का लगातार विरोध कर रहे हैं। कम आवेदन को देखते हुए तारीख बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
आवेदन की स्थिति और तारीखें
भोपाल में टीईटी आवेदन प्रक्रिया 21 अगस्त से चल रही है। आखिरी तारीख शुक्रवार 4 सितंबर तय है। अब तक बेहद कम आवेदन आए हैं। इसे देखते हुए कर्मचारी चयन मंडल यानी ईएसबी (ESB – Employee Selection Board) समय-सीमा बढ़ा सकता है।
परीक्षा 12 अक्टूबर 2026 से आयोजित होगी। अभ्यर्थी 9 सितंबर तक अपने फॉर्म में सुधार कर सकते हैं। यह पूरी प्रक्रिया स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर शुरू हुई है।
किन शिक्षकों को देनी होगी परीक्षा
ईएसबी की नियम पुस्तिका के अनुसार 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के लिए यह परीक्षा अनिवार्य है। इसमें प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के शिक्षक शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक यह परीक्षा पास करनी होगी।
नियम पुस्तिका में पदों का जिक्र है, लेकिन शिक्षकों की सटीक संख्या अब तक साफ नहीं की गई है। इसमें सहायक शिक्षक, प्राथमिक शिक्षक, संविदा शाला शिक्षक वर्ग-3 और प्रयोगशाला सहायक जैसे पद शामिल हैं।
परीक्षा फीस कितनी है
एक प्रश्न-पत्र की फीस 1000 रुपए तय की गई है। एमपी ऑनलाइन कियोस्क से आवेदन पर 60 रुपए अतिरिक्त पोर्टल शुल्क लगेगा। रजिस्टर्ड सिटीजन यूजर से आवेदन करने पर यह शुल्क 20 रुपए होगा।
फॉर्म में पहली बार सुधार के लिए 20 रुपए और अंतिम चरण में सुधार के लिए 40 रुपए देने होंगे। शिक्षक संगठनों ने इस फीस पर सीधे आपत्ति जताई है।
शिक्षक संगठनों का विरोध
टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ 30 अगस्त को दिल्ली में देशभर के शिक्षक संगठनों ने प्रदर्शन किया। मध्य प्रदेश के अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने भी शिक्षकों से आवेदन न करने की अपील की है।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षक प्रतिनिधियों ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। एमपी के शिक्षक संगठन अप्रैल से लोक शिक्षण आयुक्त और स्कूल शिक्षा मंत्री से कई बार मिल चुके हैं।
अध्यादेश की मांग तेज
ट्राइबल टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगौर का कहना है कि केंद्र सरकार अध्यादेश लाकर परीक्षा निरस्त करे। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु सरकार भी ऐसा प्रस्ताव पारित कर चुकी है।
सिंगौर के मुताबिक एमपी में भी विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि कांग्रेस विधायक राज्य सरकार को पत्र लिखकर यह मांग कर रहे हैं।
शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि आरटीई (RTE – Right to Education) अधिनियम के तहत पहले से नियुक्त शिक्षकों पर यह अनिवार्यता लागू नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि शिक्षकों से फीस लेना उचित नहीं है।
कौशल ने यह भी कहा कि 1000 रुपए फीस न्यायसंगत नहीं है। विभाग को साफ करना चाहिए कि किन शिक्षकों को परीक्षा देनी है। जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, परीक्षा टाली जानी चाहिए।
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