एमपी में बाघों की संख्या 40% तक बढ़ी, पर अपने ही घर में जगह पड़ी कम
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
- 2026 की गणना में यह आंकड़ा 1100 तक पहुंच सकता है।
- 2022 में मध्यप्रदेश में 785 बाघ दर्ज हुए थे, जो देश में सबसे ज्यादा थे।
- इस बार करीब 40% बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।
- संख्या बढ़ने से बाघ अब जंगलों से निकलकर नए इलाकों में पहुंच रहे हैं।
मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा (टाइगर स्टेट एमपी) मिले काफी समय हो गया है। अब यह पहचान और मजबूत होती दिख रही है। दूसरी ओर बाघों की बढ़ती संख्या के साथ नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
असंरक्षित इलाकों में भी गिनती
इस बार गणना का तरीका पहले से अलग रहा है। पीसीसीएफ (PCCF – Principal Chief Conservator of Forests) व वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन ने बताया कि, पिछले चार साल में बाघों का प्रजनन लगातार सफल रहा। इस बार संरक्षित क्षेत्रों के साथ कई असंरक्षित वन क्षेत्रों में भी वैज्ञानिक तरीके से गिनती की गई।
डेढ़ साल से बड़े शावकों को भी इस गणना में शामिल किया गया है। इसी वजह से संख्या में करीब 40% की बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञ इसे वन विभाग की बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं।
नए इलाकों की तलाश में बाघ
विशेषज्ञों का कहना है कि युवा बाघ वयस्क होने पर नई टेरिटरी की तलाश करते हैं। कोर और बफर क्षेत्रों में पहले से बाघों की संख्या ज्यादा हो चुकी है। इस वजह से भोपाल, रायसेन और देवास वन मंडल जैसे इलाकों में उनकी मौजूदगी बढ़ रही है।
भोपाल वन मंडल का उदाहरण खास है। साल 2006 तक यहां बाघों की स्थायी मौजूदगी नहीं थी। अब इस इलाके में 30 से ज्यादा बाघ बताए जा रहे हैं। यह बदलाव बाघों के फैलाव को साफ दिखाता है।
तेंदुओं की संख्या भी बढ़ी
बाघों के साथ-साथ तेंदुओं की संख्या में भी इजाफा देखा जा रहा है। 2026 की गणना में यह आंकड़ा 4500 के पार जा सकता है। यह आंकड़ा भी एमपी के जंगलों की सेहत का संकेत माना जा रहा है।
बढ़ती संख्या राज्य के लिए गर्व की बात है, लेकिन इतने बड़े कुनबे को संभालना आसान नहीं होगा। यही वजह है कि वन विभाग अब सिर्फ संख्या बढ़ाने पर नहीं, सुरक्षित रहवास पर भी ध्यान दे रहा है।
कॉरिडोर बचाना बनी असली चुनौती
वन विभाग के अधिकारी मानते हैं कि बाघों की बढ़ती संख्या राज्य की बड़ी उपलब्धियों में एक है। लेकिन अब चुनौती उनकी सुरक्षा और भविष्य की है। मानव और वन्यजीव के बीच संघर्ष भी बढ़ रहा है।
जंगलों को जोड़ने वाले प्राकृतिक कॉरिडोर अब खतरे में हैं। बफर क्षेत्र और असंरक्षित वन अगर सुरक्षित नहीं रखे गए, तो यह टकराव और बढ़ सकता है। इसकी बड़ी वजह कॉरिडोर पर अतिक्रमण और विकास कार्यों से बढ़ता इंसानी दखल है।
अब सिर्फ संख्या नहीं, सुरक्षा भी जरूरी
वन विभाग का फोकस अब सिर्फ बाघों की गिनती बढ़ाने पर नहीं है। सुरक्षित आवास, निर्बाध आवाजाही और नए जंगल देना भी प्राथमिकता बन गया है। संख्या बढ़ने के कारण बाघ अब गांवों और छोटे झाड़ी वाले इलाकों की ओर भी बढ़ रहे हैं।
आने वाले वर्षों में टाइगर स्टेट (एमपी टाइगर स्टेट) के लिए यही सबसे बड़ी परीक्षा होगी। बाघ बढ़ें, लेकिन इंसानों से टकराव न बढ़े, यह संतुलन बनाना जरूरी होगा।
टाइगर स्टेट एक नजर में
मध्यप्रदेश में 09 टाइगर रिजर्व हैं। इसके अलावा 11 राष्ट्रीय उद्यान और 25 वन्यजीव अभ्यारण्य मौजूद हैं। राज्य में करीब 77 हजार वर्ग किमी वन क्षेत्र फैला है। पिछली गणना यानी 2022 में यहां 785 बाघ दर्ज किए गए थे।
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