1,360 करोड़ की बनीं सड़के, 7225 करोड़ वसूला टोल, सालों तक चलेगा यही खेल!
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश के तीन फोरलेन टोल मार्गों पर वसूली का मामला गरमाया है।
- इन तीन फोरलेन टोल मार्गों को बनाने की लागत सिर्फ एक हजार 360 करोड़ रुपए थी।
- जून 2025 तक इन मार्गों से 6 हजार 522 करोड़ रुपए से ज्यादा टोल वसूला जा चुका है।
- सरकार ने अब इन परियोजनाओं की संशोधित लागत 7 हजार 818 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई है।
- इसके बावजूद 2033 से 2038 तक जनता से टोल वसूला जाता रहेगा।
तीन मार्ग, एक विवाद
मध्यप्रदेश की सड़कों पर टोल वसूली को लेकर नया विवाद (टोल विवाद) सामने आया है। देवास-भोपाल, लेबड़-जावरा और जावरा-नयागांव फोरलेन मार्गों पर यह मामला जुड़ा है।
इन तीनों मार्गों को बनाने में कुल 1,360 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। लेकिन जून 2025 तक इनसे 6,522 करोड़ रुपए से ज्यादा वसूले जा चुके हैं। यानी लागत के मुकाबले वसूली कई गुना ज्यादा हो चुकी है।
लागत बनाम वसूली का गणित
सरकार ने अब इन परियोजनाओं की नई लागत का हिसाब पेश किया है। इसमें वर्तमान और वास्तविक लागत का नया आंकड़ा जोड़ा गया है। सरकार के मुताबिक तीनों मार्गों की संशोधित लागत 7 हजार 818.57 करोड़ रुपए है।
वहीं 31 मार्च 2026 तक कुल वसूली 7 हजार 225.76 करोड़ रुपए दर्शाई गई है। इस नए गणित के बावजूद टोल वसूली अगले कई साल तक जारी रहेगी। जनता से यह वसूली साल 2033 से 2038 तक होती रहेगी।
देवास-भोपाल मार्ग का हिसाब
देवास-भोपाल मार्ग की मूल लागत 345.64 करोड़ रुपए थी। जून 2025 तक इससे एक हजार 889.51 करोड़ रुपए वसूले जा चुके हैं। यह मूल लागत का 546.67 प्रतिशत है।
सरकार ने अब इस मार्ग की संशोधित लागत 1 हजार 934.02 करोड़ रुपए बताई है। 31 मार्च 2026 तक कुल वसूली 2 हजार 104.88 करोड़ रुपए दर्शाई गई है।
इस मार्ग पर 21 मई 2033 तक टोल वसूला जाएगा। चेंज ऑफ स्कोप के तहत यह अवधि 4 से 5 साल और बढ़ सकती है।
जावरा-नयागांव मार्ग की कहानी
जावरा-नयागांव मार्ग बनाने में 425.71 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। इससे अब तक 2 हजार 450.02 करोड़ रुपए वसूले जा चुके हैं। यह मूल लागत का 575.51 प्रतिशत है। सरकार ने इस मार्ग की संशोधित लागत 2 हजार 873.95 करोड़ रुपए बताई है।
इसके एवज में 2 हजार 684.60 करोड़ रुपए की वसूली दर्शाई गई है। यहां टोल वसूली 26 अक्टूबर 2033 तक चलेगी। चेंज ऑफ स्कोप के तहत यह अवधि भी 4 से 5 साल बढ़ सकती है।
लेबड़-जावरा मार्ग पर आंकड़े
लेबड़-जावरा मार्ग की मूल लागत 589.31 करोड़ रुपए थी। जून 2025 तक इससे 2 हजार182.80 करोड़ रुपए वसूले जा चुके हैं। यह मूल लागत का 370.04 प्रतिशत है। सरकार के अनुसार इस मार्ग की संशोधित लागत 3 हजार 10.60 करोड़ रुपए है।
इसकी तुलना में 2 हजार 436.28 करोड़ रुपए की वसूली दर्ज है। इस मार्ग पर टोल वसूली 27 अप्रैल 2038 तक जारी रहेगी। यानी अभी भी 11 साल 4 महीने की वसूली बाकी है।
वाहनों की संख्या में उछाल
देवास-भोपाल मार्ग (देवास-भोपाल टोल रोड) पर वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। तीन साल पहले यहां से 35.74 लाख वाहन गुजरते थे। अब यह संख्या बढ़कर 52.16 लाख हो गई है।
यानी 16.42 लाख वाहन बढ़े हैं। यह करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। वाहनों की संख्या बढ़ने से टोल कंपनियों की कमाई भी लगातार बढ़ रही है।
अधिसूचना से पहले वसूली
जानकारी के अनुसार कुछ मार्गों पर टोल वसूली अधिसूचना जारी होने से पहले ही शुरू कर दी गई थी। भोपाल-बायपास पर टोल वसूली 12 दिसंबर 2019 से शुरू हुई, जबकि इसकी अधिसूचना 8 दिसंबर 2020 को जारी हुई।
इंदौर-उज्जैन मार्ग (इंदौर-उज्जैन टोल) पर वसूली 21 जनवरी 2022 से शुरू हुई। इसकी अधिसूचना 30 दिसंबर 2022 को आई। सागर-दमोह मार्ग पर वसूली 28 फरवरी 2021 से शुरू हुई और अधिसूचना 8 दिसंबर 2021 को जारी हुई।
महू-घाटाबिल्लोद मार्ग पर भी वसूली 28 फरवरी 2021 से शुरू हुई। इसकी अधिसूचना 24 दिसंबर 2021 को आई।
यह आंकड़े दिखाते हैं कि टोल वसूली को लेकर पारदर्शिता की कमी रही है। जनता के सामने लागत और वसूली का सही हिसाब देर से आया। आने वाले सालों में भी यह मुद्दा गरमाया रह सकता है।
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