एमपी में पर्यटन का रिकॉर्ड: एक साल में 21 करोड़ यात्राएं, उज्जैन-इंदौर की 53% हिस्सेदारी
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में पर्यटन यात्राएं 2025 में 21.05 करोड़ तक पहुंच गईं।
- यह पिछले सात साल में सबसे ज्यादा है।
- कुल यात्राओं में आधे से ज्यादा हिस्सा उज्जैन और इंदौर का है।
- कुबेरेश्वर धाम जैसे नए धार्मिक केंद्र भी इस बढ़ोतरी में अहम रहे।
- एमपी टूरिज्म बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि आगे अनुभव आधारित पर्यटन पर काम होगा।
उज्जैन-इंदौर का दबदबा
मध्य प्रदेश में 2024 में 13.33 करोड़ पर्यटन यात्राएं हुई थीं। 2025 में यह संख्या बढ़कर 21.05 करोड़ हो गई। यानी एक साल में 7.72 करोड़ यात्राएं बढ़ीं। यह करीब 58% की बढ़ोतरी है।
मप्र टूरिज्म बोर्ड के केंद्रवार आंकड़ों से एक दिलचस्प बात सामने आई है। प्रदेश की कुल यात्राओं में आधे से ज्यादा हिस्सा सिर्फ दो शहरों का है। ये शहर हैं उज्जैन और इंदौर।
उज्जैन में 2025 में 8.40 करोड़ यात्राएं दर्ज हुईं। इंदौर में यह आंकड़ा 2.81 करोड़ रहा। दोनों शहरों को मिलाकर यह 11.21 करोड़ होता है। यह प्रदेश की कुल यात्राओं का 53.3% है।
नए धार्मिक केंद्रों का असर
इस बढ़ोतरी में नए धार्मिक स्थलों का जुड़ना भी बड़ी वजह है। 2025 के आंकड़ों में पहली बार कुछ नए केंद्र शामिल किए गए। इनमें कुबेरेश्वर धाम, रतनगढ़ माता मंदिर, बगलामुखी मंदिर, श्री पीतांबरा पीठ और बागेश्वर धाम शामिल हैं।
इन पांच केंद्रों पर मिलाकर करीब 3.51 करोड़ यात्राएं दर्ज हुईं। कुबेरेश्वर धाम में सबसे ज्यादा 1.50 करोड़ यात्राएं हुईं। रतनगढ़ माता मंदिर में यह संख्या 1 करोड़ रही।
बगलामुखी मंदिर में 51.69 लाख यात्राएं दर्ज हुईं। श्री पीतांबरा पीठ में 40 लाख और बागेश्वर धाम में 9 लाख यात्राएं हुईं। चूंकि ये केंद्र पहली बार सूची में शामिल हुए हैं, इसलिए पूरी बढ़ोतरी को पुराने केंद्रों की बढ़ी आवाजाही नहीं माना जा सकता।
शहरवार आंकड़े क्या कहते हैं
उज्जैन में यात्राएं 7.32 करोड़ से बढ़कर 8.40 करोड़ हुईं। यह 1.08 करोड़ की बढ़ोतरी है। इंदौर में संख्या 1.03 करोड़ से बढ़कर 2.81 करोड़ हो गई। यहां बढ़ोतरी 1.78 करोड़ की रही, जो सबसे ज्यादा है।
भोपाल में भी यात्राएं बढ़ीं। यहां 17.24 लाख से बढ़कर 24.63 लाख यात्राएं दर्ज हुईं। यह 7.38 लाख की बढ़ोतरी है।
अन्य पर्यटन केंद्रों में भी सुधार दिखा। महेश्वर में यात्राएं 13.53 लाख से बढ़कर 14.68 लाख हुईं। खजुराहो में यह संख्या 4.90 लाख से 5.48 लाख पहुंची। सांची में 3.46 लाख से 3.81 लाख, पचमढ़ी में 2.88 लाख से 3.11 लाख और ओरछा में 1.70 लाख से 1.93 लाख यात्राएं दर्ज हुईं।
सात साल का सबसे ऊंचा आंकड़ा
2025 का आंकड़ा पिछले सात साल में सबसे ज्यादा है। 2019 में 17.80 करोड़ यात्राएं हुई थीं। इसके बाद कोरोना काल में यह संख्या घट गई थी।
2020 में सिर्फ 4.28 करोड़ यात्राएं दर्ज हुईं। 2021 में यह बढ़कर 5.12 करोड़ हुईं। 2022 में संख्या 3.67 करोड़ रही। इसके बाद 2023 में 11.21 करोड़, 2024 में 13.33 करोड़ और 2025 में 21.05 करोड़ यात्राएं दर्ज हुईं। यानी लगातार तीन साल से यह आंकड़ा बढ़ रहा है।
आगे की क्या है योजना
मप्र टूरिज्म बोर्ड की एमडी इलैया राजा टी का कहना है कि प्रदेश में पर्यटन लगातार बढ़ रहा है। बोर्ड अब अनुभव आधारित पर्यटन पर ध्यान दे रहा है। इसमें ग्रामीण पर्यटन, होमस्टे और संग्रहालय शामिल हैं।
बुनियादी ढांचे और नए होटल ब्रांड पर भी काम चल रहा है। बोर्ड का लक्ष्य सिर्फ यात्राओं की संख्या बढ़ाना नहीं है। इसका मकसद पर्यटन की गुणवत्ता सुधारना और पर्यटकों का खर्च बढ़ाना भी है।
FAQ
- 2025 में मध्य प्रदेश में कुल कितनी पर्यटन यात्राएं हुईं?
2025 में मध्य प्रदेश में 21.05 करोड़ पर्यटन यात्राएं दर्ज हुईं। यह पिछले सात साल में सबसे ज्यादा है। 2024 के मुकाबले यह 7.72 करोड़ ज्यादा है। - एमपी की कुल पर्यटन यात्राओं में उज्जैन-इंदौर की कितनी हिस्सेदारी है?
उज्जैन और इंदौर मिलाकर कुल यात्राओं का 53.3% हिस्सा रखते हैं। उज्जैन में 8.40 करोड़ और इंदौर में 2.81 करोड़ यात्राएं दर्ज हुईं। यह प्रदेश की आधी से ज्यादा पर्यटन गतिविधि है।
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