एमपी सरकार का बड़ा फैसला, 10 हेक्टेयर से कम जमीन पर अब नहीं बनेंगी कालोनियां

Sanjay Dhiman | May 25, 2026, 14:00 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश में टाउनशिप विकास के नए नियम लागू किए गए हैं। 10 हेक्टेयर से कम जमीन पर टाउनशिप नहीं बनेगी। बड़े भूखंड, इंटीग्रेटेड नियम और मूलभूत सुविधाएं अनिवार्य होंगी। छोटे डेवलपर्स और एफॉर्डेबल हाउसिंग प्रभावित हो सकती है।

मध्य प्रदेश सरकार ने टाउनशिप और बड़े आवासीय प्रोजेक्ट्स के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। अब मास्टर प्लान में लैंड यूज बदलवाकर छोटे इलाके में टाउनशिप बनाना आसान नहीं होगा। नगरीय विकास विभाग ने नगर और ग्राम निवेश नियम 2012 में संशोधन कर इसे स्पष्ट किया है। बता दें कि 10 हेक्टेयर से कम भूमि पर अब टाउनशिप नहीं बन सकेगी।



इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी होगी अनिवार्य

पहले छोटे शहरों में मास्टर प्लान के तहत 2 हेक्टेयर जैसी जमीन पर कॉलोनियां बन रही थीं। अब फरवरी 2026 में संशोधन का प्रारूप जारी हुआ और मई से लागू कर दिया गया। इस नए नियम में कहा गया है कि मास्टर प्लान या लैंड यूज बदलने के बावजूद, टाउनशिप के लिए इंटीग्रेटेड टाउनशिप नियम ही मान्य होंगे।



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नए इंटीग्रेटेड नियम

  • 5 लाख से कम आबादी वाले शहरों में कम से कम 10 हेक्टेयर ज़मीन अनिवार्य।
  • 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में 20 हेक्टेयर ज़मीन जरूरी।
  • नगरीय सीमा या प्लानिंग एरिया के बाहर कम से कम 40 हेक्टेयर भूमि पर टाउनशिप।
  • 24–30 मीटर चौड़ी सड़क से कनेक्टिविटी अनिवार्य।
  • पानी, बिजली, सीवेज जैसी मूलभूत सुविधाएं डेवलपर को स्वयं व्यवस्थित करनी होंगी।
  • डेवलपर की न्यूनतम नेटवर्थ 5 करोड़ और टर्नओवर 6 करोड़ होना चाहिए।
  • लैंड यूज बदलाव के लिए 10% राशि जमा करना अनिवार्य।
  • प्रस्तावों पर सचिव नगरीय विकास या कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति निर्णय लेगी।

टाउनशिप विकास के फायदे

  • बड़े और नियोजित टाउनशिप को बढ़ावा।
  • अव्यवस्थित कॉलोनियों पर नियंत्रण।
  • बेहतर सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं।
  • पर्यावरणीय मानकों का पालन।
  • दीर्घकालिक और व्यवस्थित शहरी विकास।

नुकसान और चुनौतियां

  • छोटे और मझोले डेवलपर्स बाजार से बाहर हो सकते हैं।
  • एफॉर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स घटने की संभावना।
  • मध्यमवर्गीय लोगों के लिए सस्ते घर कम उपलब्ध।
  • बड़े भूखंड जुटाना कठिन होने से प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ सकती है।
  • भोपाल-इंदौर में आवासीय प्रोजेक्ट्स की गति धीमी हो सकती है।

एफॉर्डेबल हाउसिंग पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार छोटे डेवलपर्स मध्यमवर्गीय और किफायती आवासीय योजनाएं बनाते हैं। नए नियमों से वे बाजार से बाहर हो सकते हैं। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग में पंजीयन के लिए 50 हजार रुपए और पांच साल बाद 25 हजार रुपए नवीनीकरण पर खर्च करना होगा।



अनुमोदन की नई प्रक्रिया

टाउनशिप प्रस्तावों पर अब नई साधिकार समितियां निर्णय लेंगी। 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सचिव नगरीय विकास अध्यक्षता में समिति प्रस्तावों का परीक्षण करेगी। जिलों में कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति निर्णय लेगी।



FAQ

  1. नए टाउनशिप नियम किस शहर पर लागू होंगे?
    यह नियम पूरे मध्य प्रदेश में लागू होंगे, लेकिन विशेषकर 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में प्रभाव अधिक होगा।
  2. छोटे डेवलपर्स पर नए नियम का क्या असर होगा?
    छोटे और मझोले डेवलपर्स बड़े भूखंड जुटाने में कठिनाई और नेटवर्थ/टर्नओवर मानदंड के कारण प्रोजेक्ट्स बनाने में बाधा महसूस करेंगे।
  3. टाउनशिप में इंटीग्रेटेड नियम क्यों जरूरी हैं?
    यह नियम बड़े और व्यवस्थित टाउनशिप विकास को सुनिश्चित करते हैं, अव्यवस्थित कॉलोनियों और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करते हैं।

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