एमपी में आज नो-UPI डे, क्यूआर कोड पर काला कपड़ा बांध विरोध जताएंगे व्यापारी

Aman Vaishnav | Sept 22, 2026, 11:26 IST
एमपी में 23 सितंबर को नो-UPI डे
मध्य प्रदेश में आज बुधवार, 23 सितंबर को नो-UPI डे रहेगा। दो हजार रुपए से ज्यादा के UPI पेमेंट पर प्रस्तावित MDR चार्ज के विरोध में व्यापारी स्कैनर ढककर सांकेतिक प्रदर्शन करेंगे। पेट्रोल पंप संचालक भी इसका विरोध कर चुके हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • एमपी में व्यापारी आज 23 सितंबर को यूपीआई पेमेंट के खिलाफ सांकेतिक विरोध जताएंगे।
  • अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने इसे नो-यूपीआई डे नाम दिया है।
  • व्यापारी अपने यूपीआई स्कैनर को काले कपड़े से ढक देंगे।
  • यह विरोध 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए एमडीआर नियम के खिलाफ है।
  • दो हजार रुपए से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर अब चार्ज लगेगा।

मध्य प्रदेश के व्यापारी इन दिनों नाराज हैं। वजह है यूपीआई पेमेंट पर लगने वाला नया शुल्क। सरकार ने 15 अक्टूबर से दो हजार रुपए से ज्यादा के पर्सन टु मर्चेंट यूपीआई पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर (MDR – Merchant Discount Rate) लगाने का फैसला किया है।



इसी फैसले के विरोध में अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने आज 23 सितंबर को नो-यूपीआई डे का ऐलान किया है।



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MDR आखिर होता क्या है

दरअसल एमडीआर वह फीस है जो दुकानदार को डिजिटल पेमेंट लेने पर चुकानी पड़ती है। यह ग्राहक की जेब से नहीं कटती। इसे एक उदाहरण से समझिए।



अगर कोई ग्राहक दुकान पर पांच हजार रुपए का यूपीआई पेमेंट करता है, तो दुकानदार को पूरे पांच हजार रुपए मिल जाते हैं।



इसके बाद बैंक या पेमेंट सिस्टम इस राशि पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर काटता है। पांच हजार का 0.4 प्रतिशत यानी बीस रुपए। यह बीस रुपए दुकानदार को अलग से चुकाने पड़ते हैं।



75 हजार रुपए या उससे ज्यादा के लेन-देन पर यह चार्ज सीधे 300 रुपए तय कर दिया गया है।



नो-यूपीआई डे में क्या होगा

आज बुधवार 23 सितंबर को व्यापारी कुछ देर के लिए अपने यूपीआई स्कैनर को काले कपड़े से ढक देंगे। यह पूरी तरह सांकेतिक विरोध होगा।



पेट्रोल पंप पहले ही अड़े

प्रदेश के 4700 पेट्रोल पंप मालिक इस मामले में एक कदम आगे बढ़ चुके हैं। उन्होंने 16 अक्टूबर से दो हजार रुपए से ज्यादा के बिल पर यूपीआई पेमेंट नहीं लेने का फैसला पहले ही कर लिया है।



यानी नए नियम के अगले ही दिन से पेट्रोल पंप पर बड़ा भुगतान कैश या कार्ड से करना पड़ सकता है।



किराना कारोबार पर सीधी मार

90% पेमेंट 2 हजार से ऊपर

भोपाल के थोक किराना बाजार में करीब 500 थोक-रीटेल दुकानें हैं। यहां से रोजाना करीब 200 टन शकर, तेल, दाल और चावल जैसा सामान 150 किलोमीटर के दायरे में जाता है। यहां के व्यापारी नए नियम से सबसे ज्यादा परेशान हैं।



अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश महासचिव अनुपम अग्रवाल ने बताया कि भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर और सागर के थोक बाजार में रोज 90 प्रतिशत से ज्यादा लेन-देन दो हजार रुपए के ऊपर होता है। उनका कहना है कि इस टैक्स से व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा।



वहीं थोक किराना कारोबारी अनिल कुमार साहू का कहना है कि पहले सरकार ने लोगों को कैशलेस पेमेंट की आदत डलवाई।



अब उसी यूपीआई पर एमडीआर के जरिए चार्ज वसूला जा रहा है। उनके मुताबिक चावल की एक कट्टी भी दो हजार रुपए से ऊपर की आती है, इसलिए टैक्स व्यापारी को ही देना पड़ेगा।



साथ ही व्यापारी विवेक साहू ने बताया कि यूपीआई पेमेंट ग्राहक और व्यापारी दोनों के लिए फायदेमंद रहा है। लेकिन अब दो हजार रुपए से ज्यादा के पेमेंट पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।



उनके मुताबिक कई कारोबार में एक प्रतिशत का मार्जिन भी नहीं होता। अगर दिन में दस पेमेंट लिए जाएं, तो तीन सौ रुपए के हिसाब से तीन हजार रुपए तक का सरचार्ज लग सकता है।



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सराफा पर भी असर

सराफा कारोबारी नवनीत अग्रवाल का कहना है कि सराफा बाजार में 95 प्रतिशत से ज्यादा पेमेंट दो हजार रुपए से ऊपर के होते हैं। एमडीआर शुल्क लगने से व्यापारियों की परेशानी बढ़ेगी। उनका कहना है कि इसका असर घूमकर ग्राहकों पर भी पड़ेगा।



फेस्टिवल सीजन में झटका

कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानी कैट के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा का कहना है कि एमडीआर को लेकर यह फैसला ठीक फेस्टिवल सीजन में लिया गया है।



गणेशोत्सव से लेकर नवरात्र, दशहरा और दिवाली तक बाजार में सबसे ज्यादा रौनक रहती है। इस दौरान टू-व्हीलर, फोर-व्हीलर, ज्वेलरी और कपड़े जैसी हर चीज जमकर बिकती है।



उनके मुताबिक अकेले भोपाल में दिवाली के समय करीब एक हजार करोड़ रुपए का कारोबार होता है। कार बुकिंग हो या ज्वेलरी खरीदारी, दोनों में पेमेंट अक्सर दो हजार रुपए से ज्यादा का होता है।



अगर चार सदस्यों वाला परिवार नए कपड़े खरीदे, तो बिल आठ से दस हजार रुपए तक पहुंच जाता है। ग्राहक अपना पेमेंट यूपीआई से कर देगा, लेकिन व्यापारी को अलग से तीन सौ रुपए तक का चार्ज चुकाना पड़ेगा। धर्मेंद्र शर्मा के मुताबिक इसका असर आखिरकार ग्राहक पर ही पड़ेगा।



ऑटोमोबाइल कारोबार भी चिंतित

कार शोरूम मैनेजर सौरभ सोनी ने बताया कि भोपाल में हर महीने करीब 2800 फोर-व्हीलर बिकते हैं। यानी रोजाना औसतन 90 गाड़ियां। दिवाली के समय यह आंकड़ा रोज 200 तक पहुंच जाता है।



गाड़ियों की बुकिंग 25 हजार से लेकर एक लाख रुपए तक होती है, इसलिए हर बुकिंग पर एमडीआर चुकाना ही पड़ेगा। यूपीआई पेमेंट की लिमिट



FAQ

  1. MDR क्या है और यह कब से लागू होगा?
    MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह फीस है जो व्यापारी को डिजिटल पेमेंट लेने पर देनी पड़ती है। यह 15 अक्टूबर से दो हजार रुपए से ज्यादा के UPI पेमेंट पर लागू होगी। दर 0.4 प्रतिशत तय की गई है।
  2. नो-यूपीआई डे क्या है?
    यह मध्य प्रदेश के व्यापारियों का सांकेतिक विरोध है। 23 सितंबर को व्यापारी अपने यूपीआई स्कैनर कुछ देर के लिए काले कपड़े से ढकेंगे। इसका मकसद सरकार तक विरोध पहुंचाना है।
  3. क्या MDR का बोझ ग्राहकों पर भी पड़ेगा
    व्यापारियों के मुताबिक सीधे तौर पर यह चार्ज दुकानदार से लिया जाएगा। लेकिन व्यापारी संगठनों का कहना है कि इसका असर घूमकर ग्राहकों पर भी पड़ सकता है। खासकर फेस्टिवल सीजन में बड़ी खरीदारी पर इसका प्रभाव दिख सकता है।

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मध्यप्रदेश न्यूज: 23 सितंबर को नो यूपीआई डे,व्यापारियों का UPI पर शुल्क का विरोध



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