PCC में दिग्गी-सिंघार की जुगलबंदी: पटवारी का ऐलान, आदिवासियों के लिए करेंगे आंदोलन
भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) दफ्तर में शनिवार को बड़ी सियासी हलचल देखने को मिली। मौका था आदिवासी कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी और जिला अध्यक्षों की बैठक का। इस बैठक के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच की केमिस्ट्री चर्चा का विषय बनी रही।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार मंच पर बिल्कुल पास-पास बैठे नजर आए। राजनीति के गलियारों में दोनों नेताओं के रिश्ते हमेशा सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन आज नजारा कुछ बदला-बदला सा था। दोनों नेता बैठक के दौरान कई मौकों पर आपस में गुफ्तगू करते और ठहाके लगाते दिखे। इस जुगलबंदी ने कांग्रेस के भीतर नए समीकरणों को जन्म दे दिया है।
जीतू पटवारी का सरकार पर हमला
बैठक खत्म होने के बाद पीसीसी चीफ जीतू पटवारी मीडिया के सामने आए। उन्होंने आते ही प्रदेश और केंद्र की भाजपा सरकार पर करारा हमला बोला। पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार आदिवासियों के अधिकारों का हनन कर रही है। उन्होंने जमीन से जुड़े कुछ चौंकाने वाले आंकड़े भी मीडिया के सामने रखे।
जीतू पटवारी ने दावा किया कि पिछले 25 सालों में सरकार ने करीब 1 लाख 26 हजार हेक्टेयर जमीन निजी लोगों को कौड़ियों के दाम बेच दी है। उन्होंने कहा कि आज मध्य प्रदेश का आदिवासी समाज अपनी ही जमीन पर मजदूर बनने को मजबूर हो गया है। कांग्रेस अब इस मुद्दे को लेकर चुप बैठने वाली नहीं है।
अडाणी को फायदा पहुंचाने का लगाया गंभीर आरोप
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सिंगरौली, उमरिया, झाबुआ, रतलाम, धार, पन्ना और छतरपुर में आदिवासियों की जमीनों का अंधाधुंध अधिग्रहण किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंगरौली में आदिवासियों की जमीनें छीनकर उद्योगपति अडाणी को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
पटवारी ने साफ शब्दों में कहा-
लड़ाई के लिए तीन दिग्गजों को सौंपी कमान
इस बड़ी सियासी लड़ाई को जमीनी स्तर पर लड़ने के लिए कांग्रेस ने बड़ी तैयारी की है। जीतू पटवारी ने बताया कि इस पूरे आंदोलन की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी तीन प्रमुख नेताओं को सौंपी गई है। इसमें पहला नाम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का है।
उनके साथ पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल और आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया को भी इस टीम में शामिल किया गया है। यह तीनों नेता मिलकर आदिवासियों की जमीन बचाने के लिए पूरा एक्शन प्लान तैयार करेंगे। इसके बाद पूरी कांग्रेस पार्टी इस रणनीति पर अमल करते हुए मैदान में उतरेगी।
NCRB के आंकड़ों का हवाला देकर घेरा
जीतू पटवारी ने केवल जमीन के मुद्दे पर ही बात नहीं की, बल्कि उन्होंने आदिवासियों की सुरक्षा और सामाजिक स्थिति पर भी कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि देश में सबसे ज्यादा अपराध मध्य प्रदेश में ही हो रहे हैं।
पटवारी ने बेहद दुख जताते हुए कहा कि आज हमारी आदिवासी बहनों के साथ सबसे ज्यादा बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं। रोजगार न मिलने के कारण सबसे अधिक पलायन भी इसी वर्ग के युवाओं को करना पड़ रहा है। आज मध्य प्रदेश का सबसे गरीब तबका आदिवासी समाज ही बनकर रह गया है।
बैठक में एकजुट नजर आई कांग्रेस
इस महत्वपूर्ण बैठक में पूरी मध्य प्रदेश कांग्रेस एकजुट नजर आई। बैठक में आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया और प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम मुख्य रूप से मौजूद रहे। उनके साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया, पूर्व मंत्री बाला बच्चन, सज्जन सिंह वर्मा और सुखदेव पांसे ने भी हिस्सा लिया।
इसके अलावा पीसी शर्मा और आदिवासी प्रकोष्ठ के तमाम छोटे-बड़े पदाधिकारी भी इस मंथन का हिस्सा बने। सभी नेताओं ने एक सुर में कहा कि आदिवासियों के सम्मान और अधिकार की रक्षा के लिए अब एक नए सिरे से शंखनाद किया जाएगा। कांग्रेस हर पीड़ित आदिवासी के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।
FAQ
- आदिवासी कांग्रेस की बैठक का उद्देश्य क्या था?
बैठक का मुख्य उद्देश्य आदिवासी जमीन, जल और जंगल के संरक्षण के लिए रणनीति तय करना था। कांग्रेस नेता नए सिरे से अधिग्रहण विरोध की योजना बना रहे हैं। - कांग्रेस आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए क्या कदम उठा रही है?
कांग्रेस जमीन अधिग्रहण का विरोध करेगी। नेता प्रतिपक्ष सिंघार और अन्य नेता रणनीति बनाएंगे। साथ ही गरीब और पलायन कर रहे आदिवासी वर्ग के अधिकारों की रक्षा पर भी जोर रहेगा। - बैठक में प्रमुख नेता कौन-कौन उपस्थित थे?
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया, पूर्व मंत्री बाला बच्चन और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
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