आदिवासी जिलों में टेंडर और ठेके सीधे मंजूर कर सकेंगे कलेक्टर्स, फाइलों की लेटलतीफी होगी खत्म

Aman Vaishnav | May 24, 2026, 10:29 IST
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मध्यप्रदेश सरकार ने आदिवासी जिलों में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने कलेक्टर्स को टेंडर और अनुबंध मंजूर करने के सीधे वित्तीय अधिकार दिए हैं।

5 प्वाइंट में समझें पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश सरकार ने आदिवासी बाहुल्य जिलों में विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए एक फैसला लिया है।
  • वित्त विभाग ने मध्यप्रदेश बुक ऑफ फायनेंशियल पावर्स में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।
  • कलेक्टर्स को निर्माण कार्यों के टेंडर, ठेके और एग्रीमेंट को मंजूरी देने के अधिकार मिल गए हैं।
  • इससे आदिवासी क्षेत्रों में स्कूल, हॉस्टल के निर्माण की फाइलें दफ्तरों में नहीं अटकेंगी।
  • तकनीकी तालमेल बनाए रखने के लिए कलेक्टर्स को कार्यपालन यंत्री की राय लेनी होगी।

मध्य प्रदेश के जनजातीय यानी आदिवासी बाहुल्य जिलों के लिए राज्य सरकार ने एक बेहद सराहनीय कदम उठाया है। अक्सर देखा जाता है कि सरकारी विभागों में फाइलों के चक्कर काटने के कारण विकास कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाते हैं।



इसी प्रशासनिक लेटलतीफी को खत्म करने के लिए सरकार ने कलेक्टर्स को मजबूत बनाने का फैसला किया है। अब आदिवासी क्षेत्रों में विकास से जुड़े कामों के लिए इधर-उधर चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।



कलेक्टर्स को मिले वित्तीय अधिकार

वित्त विभाग के नए आदेश के अनुसार जनजातीय कार्य विभाग के तहत होने वाले निर्माण कार्यों के टेंडर अब जिला स्तर पर कलेक्टर ही मंजूर कर सकेंगे। इसके लिए कलेक्टर्स को सुपरिटेंडिंग इंजीनियर के समान वित्तीय अधिकार दे दिए गए हैं।



इससे स्कूल, हॉस्टल या अन्य कामों के टेंडर्स की फाइलें अब सालों तक नहीं दबी रहेंगी। कलेक्टर जिले के स्तर पर ही इस पर तुरंत फैसला ले सकेंगे।



पहले क्या थी व्यवस्था और अब क्या बदला?

पहले की व्यवस्था में कलेक्टर्स के पास जनजातीय कार्य विभाग के निर्माण कार्यों के टेंडर का सीधा अधिकार नहीं होता था। साथ ही ठेके और अनुबंधों को अंतिम मंजूरी देने का भी अधिकार नहीं होता था।



यह पूरी तरह से एक विभागीय तकनीकी ढांचा था। इसमें फाइलें केवल कार्यपालन यंत्री अधीक्षण यंत्री या विभागाध्यक्ष के स्तर पर ही घूमती रहती थीं।



इस बार वित्त विभाग ने कलेक्टर्स को इन अधिकारों में विशेष रूप से शामिल किया है। हालांकि काम में तकनीकी गड़बड़ी न हो इसके लिए एक जरूरी शर्त भी रखी गई है।



कलेक्टर इन अधिकारों का इस्तेमाल तभी कर पाएंगे, जब उन्हें जनजातीय कार्य विभाग के कार्यपालन यंत्री का तकनीकी और विभागीय अभिमत मिल जाएगा।



भवनों की मरम्मत के अधिकारों में भी सुधार

सरकार ने केवल टेंडर प्रक्रिया को ही आसान नहीं बनाया है। डिटेल्ड इस्टीमेट, तकनीकी स्वीकृति और भवनों की सामान्य मरम्मत के अधिकारों को भी यानी नए सिरे से तय किया है।



अधिकारी का पद नए अधिकार की स्थिति
अधीक्षण यंत्री लोक निर्माण विभाग के समकक्ष अधिकारियों के समान अधिकार
कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग के समकक्ष अधिकारियों के समान अधिकार
सहायक यंत्री लोक निर्माण विभाग के समकक्ष अधिकारियों के समान अधिकार

जरूरी नियम...

ये सभी स्वीकृतियां वर्तमान में चल रही दर अनुसूची के आधार पर ही दी जाएंगी। साथ ही इसके लिए वित्त विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।



इसके अलावा निर्माण कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति की सीमा में अगर किसी भी तरह की मात्रा बढ़ानी हो या कोई नया आयटम शामिल करना हो, तो इसका फैसला पूरी तरह से वित्त विभाग के तय नियमों के अनुसार ही किया जाएगा।



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