श्रम और जनजातीय कार्य विभाग के स्कूलों की कमान होगी अब शिक्षा विभाग के हाथ
समझें पूरा मामला...
- शिक्षा विभाग को मिलेंगे जनजातीय कार्य और श्रम विभाग के 29 हजार स्कूल।
- संचालन की बाधाओं को देखते हुए सरकार के स्तर पर मर्जर की तैयारी तेज।
- मर्जर के बाद स्कूल शिक्षा विभाग के पास होगी 1.15 लाख स्कूलों की जिम्मेदारी।
- विभागों की व्यवस्थाओं की विसंगति दूर करने के बाद होगा स्कूलों का मर्जर।
- साल 2014- 15 में मर्जर का प्रस्ताव को तत्कालीन मंत्री की आपत्ति पर हुआ था होल्ड।
मध्य प्रदेश सरकार ने स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर ली है। अब तक प्रदेश में चल रही स्कूली शिक्षा की तिहरी व्यवस्था अब एक समान होगी। इसके लिए सरकार जनजातीय कार्य और श्रम विभाग के स्कूलों को स्कूल शिक्षा विभाग से मर्ज करने जा रही है।
यानी जल्द ही प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों के संचालन का दायित्व स्कूल शिक्षा विभाग को सौंप दिया जाएगा। इस निर्णय पर सीएम डॉ.मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में मुहर लग सकती है।
विसंगति भरी तिहरी व्यवस्था
फिलहाल मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों के संचालन की तिहरी व्यवस्था है। सबसे ज्यादा करीब 92 हजार स्कूलों का संचालन स्कूल शिक्षा विभाग के पास है।
वहीं जनजातीय कार्य विभाग आदिवासी अंचलों में करीब 21 हजार से अधिक और श्रम विभाग 4 आवासीय विद्यालय संचालित कर रहा है। मर्जर के बाद स्कूल शिक्षा विभाग के स्कूलों की संख्या करीब 1.15 लाख हो जाएगी। इस निर्णय से अलग-अलग विभागों की स्कूल संचालन व्यवस्था की असमानता दूर होगी।
इसलिए पड़ी मर्जर की जरूरत
प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग पहले से करीब 92 हजार सरकारी स्कूल संचालित कर रहा है। इसमें 145 मॉडल स्कूल और 274 सांदीपनि विद्यालय भी हैं।
वहीं जनजातीय कार्य विभाग के पास 21 हजार से अधिक और श्रम विभाग के पास भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में चार आवासी स्कूल हैं। अनुसूचित जाति विभाग भी संभाग स्तर पर एक- एक स्कूल चला रहा है। इनमें विभागों की अलग नीतियों, अलग निगरानी और प्रशासनिक सेटअप के कारण शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।
मर्जर से बदलाव के आसार
मध्य प्रदेश में अभी आदिवासी अंचलों की दूरी की वजह से जनजातीय कार्य विभाग पर्याप्त निगरानी नहीं कर पा रहा है। विभाग के स्कूलों में शिक्षकों की कमी के साथ ही अनुपस्थिति की भी समस्या है। इससे इन विद्यालयों का परीक्षा परिणाम भी बिगड़ता रहा है।
शिक्षा की खराब गुणवत्ता पर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। इसको देखते हुए लंबे समय से स्कूली शिक्षा में एकरूपता लाने पर मंथन जारी है। सरकार की पहल के बाद अब स्कूल चलाने वाले विभाग एक साथ इस पर प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। इस बदलाव से सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीदें जताई जा रही हैं।
आएगी नीतिगत समानता
मर्जर के बाद स्कूल शिक्षा विभाग की तरह ही दूसरे विभागों के स्कूलों के संचालन का मैन्युअल होगा। इसके अलावा ट्रांसफर पॉलिसी भी एक समान हो जाएगी।
अभी जनजातीय कार्य और श्रम विभाग के स्कूलों पर स्कूल शिक्षा विभाग के लिए बनने वाली ट्रांसफर पॉलिसी लागू नहीं होती। श्रम विभाग में शिक्षक समेत अन्य स्टाफ संविदा पर कार्यरत है।
इस वजह से तीनों विभागों में कर्मचारियों से संबंधित नियमों में अलगाव है। मर्जर से इसमें भी समानता आएगी और अनावश्यक दस्तावेजी कार्रवाई से छुटकारा मिलेगा।
मंत्री की आपत्ति से टला था मर्जर
अलग-अलग विभागों के स्कूलों के मर्जर की पहल इससे पहले भी हो चुकी है। साल 2014-15 में आदिम जाति कल्याण विभाग के स्कूलों को शिक्षा विभाग में मर्ज करने की तैयारी की जा चुकी थी।
इस प्रस्ताव पर सरकार की मुहर लगने से पहले ही तत्कालीन आदिम जाति कल्याण मंत्री ज्ञान सिंह की आपत्ति ने कार्रवाई टाल दी थी। तब से यह प्रस्ताव होल्ड पर है। हांलाकि अब सरकार की मंशा और तैयारी को देखते हुए इस पर जल्द मुहर लग सकती है।
ये खबरें भी पढ़ें...
NHM में तीन बार वसूली परीक्षा फीस, रिजल्ट जारी किए बिना ही रद्द कर दी भर्ती
पद संभालते ही विवादों में घिरे पाठ्यपुस्तक निगम अध्यक्ष, CM ऑफिस ने जारी किया कारण बताओ नोटिस