दिवाली तक MP में UCC लागू करने की तैयारी में सरकार, मानसून सत्र में आएगा बिल
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश सरकार मानसून सत्र में UCC बिल लाने की तैयारी में है।
- मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खुद इसकी पुष्टि की है।
- मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है।
- 6 सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी ड्राफ्ट बिल तैयार कर रही है।
- सरकार का लक्ष्य है कि दिवाली तक UCC पूरी तरह लागू हो जाए।
MP में UCC की तैयारी पूरी
मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी (UCC - Uniform Civil Code) को लागू करने की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ कह दिया है कि आगामी मानसून सत्र (एमपी विधानसभा का मानसून सत्र) में यूसीसी का प्रस्ताव विधानसभा में रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि महाकाल की कृपा रही तो इसी सत्र में यह बिल पारित भी हो जाएगा। मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है।
उत्तराखंड और गुजरात के बाद मध्य प्रदेश इस दिशा में कदम बढ़ाने वाला अगला राज्य बन सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि इस साल दिवाली तक यूसीसी को पूरी तरह लागू कर दिया जाए।
BJP विधायक का समर्थन
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी सरकार के इस कदम का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यूसीसी पूरे हिंदुस्तान की मांग है और यह कानून देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
शर्मा ने यह भी कहा कि इस कानून (uniform civil code in mp) के लागू होने से जनसंख्या नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। उनके मुताबिक कई राज्य पहले ही इस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं और अब मध्य प्रदेश भी पूरी तरह तैयार है।
6 सदस्यीय कमेटी ने तैयार किया ड्राफ्ट
मध्यप्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता ( UCC )का मसौदा तैयार करने के लिए इसी साल 27 अप्रैल को एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। यह काम विधि और विधायी कार्य विभाग को सौंपा गया था। समिति में कुल 6 सदस्य हैं।
इस समिति (Committee in MP for uniform civil code) की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। समिति में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, कानूनी विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद् गोपाल शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता बुद्धपाल सिंह भी शामिल हैं। कमेटी को गठन के 60 दिनों के भीतर ड्राफ्ट बिल सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया था।
जनता से भी मांगे गए सुझाव
कमेटी ने केवल दिल्ली या भोपाल में बैठकर काम नहीं किया। इसके सदस्यों ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों का दौरा किया और समाज के सभी वर्गों से उनकी राय ली। आम नागरिकों (समान नागरिक संहिता का असर क्या) के लिए एक आधिकारिक वेब पोर्टल भी शुरू किया गया था, जहां लोग ऑनलाइन सुझाव दे सकते थे।
सुझाव लेने की अवधि 15 मई से 15 जून तक तय की गई थी। हालांकि अभी भी एसएमएस के जरिए ऑनलाइन सुझाव मंगाए जा रहे हैं। इन सभी सुझावों को समेटकर अब ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
दिवाली तक लागू करने का लक्ष्य
सरकार की पूरी कोशिश है कि मानसून सत्र में बिल पास हो और उसके बाद इसे तेजी से लागू किया जाए। दिवाली तक मध्यप्रदेश में यूसीसी को जमीन पर उतारने की तैयारी है। अगर ऐसा हुआ तो मध्यप्रदेश देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां यह कानून लागू है।
यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि यूसीसी का सीधा असर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों पर पड़ेगा। यह बदलाव हर धर्म और समुदाय के नागरिकों को प्रभावित करेगा।
FAQ
- प्रश्न 1: मध्य प्रदेश में UCC बिल कब विधानसभा में आएगा?
उत्तर: मध्यप्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि आगामी मानसून सत्र में यूसीसी बिल विधानसभा में पेश किया जाएगा। यह सत्र 20 जुलाई 2025 से शुरू हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इसी सत्र में बिल पारित कराने की पूरी कोशिश की जाएगी। - प्रश्न 2: मध्य प्रदेश में UCC ड्राफ्ट तैयार करने के लिए किस कमेटी का गठन हुआ?
उत्तर: मध्यप्रदेश सरकार ने 27 अप्रैल 2025 को 6 सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी बनाई। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। कमेटी को 60 दिनों में ड्राफ्ट बिल सौंपने का निर्देश था। इसने राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर जनता से सुझाव लिए। - प्रश्न 3: मध्य प्रदेश में UCC लागू होने से आम नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू होने के बाद विवाह, तलाक, गोद लेने और संपत्ति के उत्तराधिकार जैसे मामलों में सभी धर्मों के नागरिकों के लिए एक समान कानून होगा। अभी अलग-अलग धर्मों के लिए अलग पर्सनल लॉ लागू हैं। यूसीसी इन सभी को एक कानून के दायरे में लाएगा।
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