मध्य प्रदेश विधानसभा में UCC बिल पास, यूसीसी पारित करने वाला चौथा राज्य बना एमपी
मध्य प्रदेश विधानसभा में यूसीसी बिल पास हो गया है। यह बिल भारी हंगामे के बीच मंजूर हुआ। उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद MP चौथा राज्य बन गया है। बिल में लिव-इन रिलेशनशिप और विवाह से जुड़े नए नियम हैं। कानून बनने के बाद लिव-इन रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा।
भोपाल में मंगलवार को विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा था। यह सत्र का दूसरा दिन था। सदन में भारी हंगामा और नारेबाजी हुई। इसी बीच समान नागरिक संहिता, यानी यूसीसी (UCC – Uniform Civil Code) बिल पास कर दिया गया।
विपक्ष ने इस बिल का जोरदार विरोध किया। कई विधायक वॉकआउट करने की कोशिश करते रहे। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कार्यवाही जारी रखी। अंत में उन्होंने बिल को पास घोषित कर दिया।
विपक्ष का विरोध क्यों
सत्र शुरू होते ही सरकार ने यूसीसी बिल चर्चा के लिए पेश किया। बिल पेश होते ही विपक्ष आक्रामक हो गया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कड़ा विरोध जताया।
सिंघार ने मांग की कि बिल को प्रवर समिति के पास भेजा जाए। प्रवर समिति यानी सेलेक्ट कमेटी विस्तृत समीक्षा करती है। लेकिन सरकार ने यह मांग खारिज कर दी। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी नोक-झोंक शुरू हो गई।
सदन में हंगामा और स्थगन
मांग न मानी जाने पर कांग्रेस विधायक नाराज हो गए। वे सदन के वेल में पहुंच गए। वहां उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
दूसरी तरफ भाजपा विधायक और मंत्री बिल पर जल्दी चर्चा चाहते थे। वे इसे तुरंत पास कराने पर अड़े रहे। हंगामा बढ़ता देख अध्यक्ष तोमर ने कार्यवाही रोक दी। पहले 10 मिनट के लिए स्थगन हुआ। इसके बाद भी हालात नहीं सुधरे, तो 15 मिनट के लिए फिर से कार्यवाही रोकी गई।
सीएम ने ट्वीट कर दी बधाई
मध्य प्रदेश विधानसभा ने ‘मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता, 2026’ विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया। सरकार ने इसे सामाजिक समानता और न्याय की दिशा में बड़ा कदम बताया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जिस जगदीशपुर का नाम बदलकर कभी इस्लामनगर किया गया था, उसी धरती से अब समान नागरिक संहिता लागू करने का फैसला लिया गया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व का उल्लेख किया। सरकार का दावा है कि यह कानून महिलाओं को मजबूत करेगा और सभी नागरिकों को समान अधिकार, समान न्याय तथा संवैधानिक सुरक्षा देने में मदद करेगा।
अल्पसंख्यक अधिकारों पर बहस
जब सदन फिर शुरू हुआ, तो कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने सवाल उठाए। उन्होंने सरकार की मंशा पर सीधा सवाल किया।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक आतिफ अकील और आरिफ मसूद ने भी बिल का विरोध किया। उनका कहना था कि यह बिल सत्ता पक्ष का राजनीतिक एजेंडा है। कांग्रेस नेताओं ने संविधान के अनुच्छेद 29 का हवाला दिया। उन्होंने अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की रक्षा की बात कही।
इतने विरोध के बावजूद सरकार पीछे नहीं हटी। बहुमत के दम पर सरकार ने बिल पास करा लिया।
आगे क्या बदलेगा
बिल कानून बनने के बाद मध्य प्रदेश में बड़ा बदलाव आएगा। लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा। विवाह से जुड़े कुछ नियम भी बदलेंगे।
अभी यह साफ नहीं है कि नियम कब से लागू होंगे। राज्यपाल की मंजूरी के बाद ही बिल कानून बनेगा। इसके बाद सरकार नियम और प्रक्रिया तय करेगी।
राजनीतिक तौर पर यह मुद्दा गरमाया हुआ है। विपक्ष इसे लेकर आगे भी सवाल उठा सकता है। आने वाले दिनों में इस पर और बहस देखी जा सकती है।
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