एमपी में UCC की तैयारी: 60 दिन में आएगा ड्राफ्ट, SC की रिटायर्ड जज संभालेंगी कमान
News In Short
- मध्य प्रदेश सरकार ने UCC लागू करने के लिए 6 सदस्यीय कमेटी गठित की है।
- यह कमेटी राज्य में मौजूद विभिन्न पर्सनल और पारिवारिक कानूनों की समीक्षा करेगी।
- कमेटी को 60 दिन के भीतर ड्राफ्ट बिल और विस्तृत रिपोर्ट सरकार को देनी होगी।
- इस कमेटी की अध्यक्षता एक रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज करेंगे।
- पंद्रह दिनों में MP में UCC को लेकर यह तीसरी बड़ी घटना है।
News In Detail
MP में UCC की जरूरत क्यों?
मध्य प्रदेश में अभी शादी, तलाक, गुजारा भत्ता, विरासत और गोद लेने से जुड़े मामले अलग-अलग कानूनों के तहत चलते हैं। हर धर्म के लिए अलग नियम हैं। इससे नागरिकों में भ्रम की स्थिति बनती है।
सरकार का कहना है कि एक व्यावहारिक और एकसमान कानूनी ढांचे की जरूरत है। इसी वजह से इस हाई लेवल कमेटी का गठन किया गया है।
राज्य सरकार ने सोमवार 27 अप्रैल को अपने आदेश में साफ किया था कि यह कमेटी लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमन, पंजीकरण और इससे उपजने वाले अधिकारों और जिम्मेदारियों की भी जांच करेगी। इसके अलावा महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधानों पर भी सुझाव दिए जाएंगे।
कमेटी में कौन होगा?
कमेटी का नेतृत्व एक रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज करेंगे। इनके साथ फैमिली लॉ, जेंडर राइट्स और तुलनात्मक UCC (Uniform Civil Code) मॉडल के जानकार विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। कुल छह सदस्य इस कमेटी में हैं। यह पूरी टीम मिलकर राज्य के पारिवारिक कानूनों का गहराई से अध्ययन करेगी।
60 दिन में क्या करेगी कमेटी?
कमेटी के पास बहुत सारे काम हैं। पहले वह MP में मौजूद सभी ओवरलैपिंग यानी एक-दूसरे से टकराते पर्सनल लॉ प्रावधानों की समीक्षा करेगी। इसके बाद जन सुनवाई और परामर्श बैठकें होंगी ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की राय ली जा सके।
कमेटी उत्तराखंड और गुजरात में अपनाए गए UCC मॉडल का भी अध्ययन करेगी। इन दोनों राज्यों में पहले से UCC को लेकर काम हो चुका है।
इससे MP को एक तैयार ढांचा मिलेगा जिसे अपनी जरूरत के हिसाब से बदला जा सकता है। अंत में कमेटी 60 दिन के भीतर ड्राफ्ट बिल और पूरी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
मानसून सत्र में बिल आ सकता है?
सूत्रों के अनुसार 60 दिन की यह समयसीमा संकेत देती है कि सरकार मानसून सत्र में इस बिल को विधानसभा में पेश कर सकती है। हालांकि सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह सिर्फ एक संभावना है जो समयसीमा को देखते हुए बनती है।
15 दिनों में तीसरा बड़ा कदम
यह MP में UCC (समान नागरिक संहिता) को लेकर महज 15 दिनों में तीसरा बड़ा घटनाक्रम है। 13 अप्रैल को MP कैबिनेट ने UCC का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए कमेटी बनाने को मंजूरी दी थी।
उससे एक दिन बाद यानी 14 अप्रैल को BJP की 13 सदस्यीय MP कोर कमेटी ने अपनी पहली बैठक में राज्य में UCC के प्रस्तावित ढांचे पर विचार किया।
अब इस छह सदस्यीय कमेटी का गठन इस कड़ी का तीसरा हिस्सा है। इससे साफ है कि MP सरकार UCC को लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
PM मोदी का आह्वान और राष्ट्रीय चर्चा
UCC का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर तब और चर्चा में आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 जून 2023 को भोपाल में BJP कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए UCC लागू करने का जोरदार आह्वान किया था।
तभी से MP में इस दिशा में काम तेज हुआ है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन चुका है जिसने UCC लागू किया है। गुजरात भी इस पर काम कर रहा है। MP अब इस सूची में अगला राज्य बनने की ओर है।
महिला और बच्चों की सुरक्षा पर जोर
कमेटी का एक अहम काम यह भी है कि वह लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर सुझाव दे। इसके साथ ही महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए कानूनी ढांचे में जरूरी प्रावधानों की सिफारिश भी करेगी। जन सुनवाई इसलिए जरूरी है ताकि सभी तबकोंकी बात सुनी जाए।
FAQ
- MP की UCC कमेटी 60 दिन में क्या-क्या करेगी?
MP की 6 सदस्यीय UCC कमेटी 60 दिनों में कई जरूरी काम करेगी। वह राज्य के मौजूदा पर्सनल लॉ की समीक्षा करेगी, जन सुनवाई और परामर्श बैठकें आयोजित करेगी, उत्तराखंड और गुजरात के UCC मॉडल का अध्ययन करेगी, लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण पर सुझाव देगी और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधानों की सिफारिश करेगी। अंत में एक ड्राफ्ट बिल और विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। - UCC यानी समान नागरिक संहिता क्या होती है?
UCC (Uniform Civil Code) यानी समान नागरिक संहिता एक ऐसा कानूनी ढांचा है जो सभी धर्मों और समुदायों के नागरिकों पर एकसमान रूप से लागू होता है। इसमें शादी, तलाक, विरासत, गोद लेने और गुजारा भत्ते जैसे मामलों के लिए एक ही कानून होता है। अभी भारत में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग पर्सनल लॉ हैं। UCC इन सबकी जगह एक साझा कानून लागू करता है। - क्या MP में मानसून सत्र में UCC बिल पेश होगा?
इसकी संभावना है लेकिन अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कमेटी को 60 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश हैं और यह समयसीमा मानसून सत्र के करीब पड़ती है। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि सरकार मानसून सत्र में विधानसभा में बिल पेश कर सकती है। हालांकि सरकार ने इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
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