एमपी में यूसीसी से पूरी तरह बाहर रहेंगे आदिवासी! धर्मांतरित को नहीं मिलेगी छूट
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में यूसीसी का मसौदा तैयार हो रहा है।
- कमेटी आदिवासियों के लिए अलग फॉर्मूले पर विचार कर रही है।
- शुरुआत में आदिवासियों को यूसीसी से बाहर रखा जाएगा।
- वहीं, जो चाहें वे स्वेच्छा से इसे अपना सकेंगे।
- धर्मांतरित आदिवासियों को यह छूट नहीं मिलने की चर्चा है।
मध्य प्रदेश सरकार समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी (UCC – Uniform Civil Code) पर तेजी से काम कर रही है। इसके लिए बनी कमेटी ने प्रदेशभर में लोगों से सुझाव लिए हैं। अब सबसे अहम सवाल यह है कि आदिवासी समुदाय इस कानून के दायरे में आएगा या नहीं।
आदिवासियों को मिलेगी छूट?
सूत्रों के मुताबिक कमेटी आदिवासियों के लिए विशेष व्यवस्था पर गंभीरता से सोच रही है। मूल रूप से उन्हें यूसीसी से बाहर रखा जाएगा।
वहीं एक नया विकल्प भी जोड़ा जा सकता है। जो आदिवासी खुद यूसीसी अपनाना चाहें, उन्हें यह कानूनी अधिकार मिल सकता है। यह सुझाव जन परामर्श के दौरान सामने आया है।
फिलहाल राज्य सरकार का अभी का रुख आदिवासियों को पूरी तरह बाहर रखने का है। हालांकि गैर आदिवासी और पढ़े-लिखे आदिवासियों के एक वर्ग ने वैकल्पिक विकल्प की मांग की है।
धर्मांतरण पर सख्त रुख
जन परामर्श में एक और अहम सुझाव आया है। जो आदिवासी धर्मांतरण कर ईसाई, मुस्लिम या किसी अन्य धर्म को अपना चुके हैं, उन्हें यूसीसी से छूट नहीं मिलनी चाहिए।
सुझाव देने वालों का तर्क साफ है। धर्म बदलने के बाद ये लोग पारंपरिक जनजातीय रीति-रिवाजों से अलग हो जाते हैं। इसलिए उन्हें सामान्य नागरिकों जैसा ही माना जाना चाहिए।
हालांकि अभी इस पर अंतिम सहमति नहीं बनी है। यह व्यवस्था कानूनी रूप से कैसे लागू होगी, इस पर मंथन जारी है।
ग्वालियर में अंतिम चर्चा
बता दें कि गुरुवार, 25 जून को ग्वालियर में यूसीसी कमेटी की आखिरी जन परामर्श बैठक हुई। इसके साथ ही प्रदेशभर में सुझाव लेने की प्रक्रिया पूरी हो गई।
इस बैठक में स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी। आदिवासी अधिकारों से जुड़े मुद्दे इस बैठक में प्रमुखता से उठे।
भोपाल में बनेगा ड्राफ्ट
अब सारा ध्यान भोपाल पर है। यहां कमेटी के सदस्य मिले सुझावों की समीक्षा करेंगे। कानूनी पहलुओं की भी गहराई से जांच होगी।
विभिन्न पक्षों की राय को आधार बनाकर अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। यह काम अगले कुछ दिनों में पूरा होने की उम्मीद है।
5 जुलाई को होगा खुलासा
जानकारी के अनुसार यूसीसी का अंतिम मसौदा 5 जुलाई को सार्वजनिक किए जाने की तैयारी है। इसके बाद आम लोग और संगठन अपनी प्रतिक्रिया दे सकेंगे।
यह कानून लागू होने से पहले एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आदिवासी समुदाय के लिए यह खासतौर पर अहम है।
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