लिव-इन पार्टनर से पीछा छुड़ाना नहीं होगा आसान, कराना होगा ब्रेकअप रजिस्ट्रेशन

Amresh Kushwaha | Jul 09, 2026, 09:15 IST
MP UCC ड्राफ्ट लिव-इन रिलेशनशिप
मध्य प्रदेश की समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का मसौदा तैयार हो गया है। इसमें लिव-इन रिलेशनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। रिश्ता खत्म करने पर तलाक जैसी प्रक्रिया अपनानी होगी।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश की समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार हो चुका है।
  • लिव-इन रिलेशनशिप के लिए अब रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।
  • रिश्ता खत्म करने पर तलाक जैसी प्रक्रिया अपनानी होगी।
  • सिर्फ बालिग लोग ही यह रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे।
  • उत्तराधिकार के प्रावधान 100 से घटाकर 30 किए गए हैं।

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी (Uniform Civil Code) का मसौदा लगभग तैयार हो गया है। इसे जल्द ही कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है। इस मसौदे में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कई नए नियम बनाए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव रजिस्ट्रेशन को लेकर है। अब लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को अपना रिश्ता दर्ज कराना अनिवार्य होगा।



रजिस्ट्रेशन शादी जैसा ही

मसौदे के मुताबिक लिव-इन में रहने की प्रक्रिया शादी जैसी होगी। दोनों पार्टनर को पहले अपना रिश्ता रजिस्टर कराना होगा। यह रजिस्ट्रेशन जिले के रजिस्ट्रार के पास होगा। रजिस्ट्रेशन के लिए दोनों पक्षों को सिर्फ अपने बालिग होने से जुड़े दस्तावेज देने होंगे। इससे ज्यादा कोई और कागजात मांगे नहीं जाएंगे। सरकार का मकसद इस प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाना है।



रिश्ता तोड़ने पर तलाक जैसी प्रक्रिया

मसौदे में सबसे अहम बात यह है कि लिव-इन रिश्ता खत्म करने की प्रक्रिया भी तलाक जैसी रखी गई है। यदि कोई रजिस्टर्ड लिव-इन पार्टनर किसी और से शादी करना चाहता है, तो पहले उसे अपना पुराना रजिस्ट्रेशन निरस्त कराना होगा। यह निरस्तीकरण एक पक्ष के आवेदन पर भी हो सकता है। वहीं, दूसरा पक्ष इससे सहमत नहीं है, तो वह कोर्ट का रुख कर सकता है। ऐसे मामलों में अंतिम फैसला कोर्ट का ही माना जाएगा।



रजिस्ट्रेशन को कानूनी संरक्षण नहीं

मसौदे के मुताबिक इस रजिस्ट्रेशन को किसी खास कानून से सीधा संरक्षण नहीं मिलेगा। यदि कोई पक्ष रजिस्ट्रेशन का विरोध करता है, तो उसे कोर्ट में जाना होगा। यूसीसी को किसी क्रिमिनल एक्ट (Criminal Act) से नहीं जोड़ा गया है। कोर्ट जो भी फैसला देगी, दोनों पक्षों को वह मानना जरूरी होगा। अगर दोनों पार्टनर आपस में शादी कर लेते हैं, तो उनका लिव-इन रजिस्ट्रेशन अपने आप खत्म हो जाएगा।



रजिस्ट्रेशन न कराने पर क्या होगा

मसौदे में यह भी साफ किया गया है कि रजिस्ट्रेशन कराना या न कराना काफी हद तक आपसी सहमति पर निर्भर करेगा। लिव-इन में रहने वाले लोगों की खुद जिम्मेदारी होगी कि वे रजिस्ट्रेशन कराएं या नहीं। हालांकि अगर पहले से शादीशुदा कोई व्यक्ति लिव-इन में रहता पाया जाता है, तो उस पर पहले से लागू आपराधिक कानून यानी क्रिमिनल लॉ (Criminal Law) के प्रावधान लागू होंगे। शिकायत मिलने पर प्रशासन कार्रवाई कर सकेगा।



मॉनिटरिंग को लेकर संशय

मसौदे में रजिस्ट्रेशन की मॉनिटरिंग को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। सूत्रों के मुताबिक अगर कोई पार्टनर पहले से रजिस्टर्ड है और वह अपने पार्टनर के साथ रहते हुए दोबारा रजिस्ट्रेशन कराता है, तो इसकी जानकारी तुरंत सामने नहीं आएगी। इसे लेकर मसौदे में अभी कुछ हद तक स्पष्टता की कमी बताई जा रही है।



उत्तराधिकार के प्रावधान घटे

यूसीसी मसौदे में उत्तराधिकार से जुड़े नियमों को भी सरल बनाया गया है। पहले इससे जुड़े कुल 100 प्रावधान थे। अब इन्हें घटाकर सिर्फ 30 कर दिया गया है। सरकार का दावा है कि इससे कानून समझने में आसानी होगी। इन बदलावों के बाद मध्य प्रदेश का यूसीसी गुजरात और उत्तराखंड के यूसीसी से भी ज्यादा संक्षिप्त हो जाएगा। एक और खास बात यह है कि घुमंतू और अर्धघुमंतू समुदाय को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।



समिति ने दिया अंतिम रूप

मुख्यमंत्री स्तर पर और विधि विभाग की समिति इस मसौदे को अंतिम रूप दे चुकी है। दिल्ली में यूसीसी समिति की अध्यक्ष रंजना देसाई के साथ भी अंतिम चर्चा हो चुकी है। इसके बाद अब विधेयक को मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार चाहती है कि यह विधेयक जल्द से जल्द पारित हो जाए।



कोर्ट में चुनौती का भी डर

सूत्रों का कहना है कि अगर यह मसौदा मानसून सत्र में पारित हो जाता है और राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाता है, तो इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है। खासतौर पर लिव-इन और उत्तराधिकार से जुड़े प्रावधानों पर कानूनी सवाल उठ सकते हैं। सरकार को इसके लिए पहले से तैयार रहना होगा।



इस मसौदे को लेकर राज्य में अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ लोग इसे पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम मान रहे हैं। वहीं कुछ का कहना है कि निजी जीवन में सरकारी दखल बढ़ सकता है। आने वाले मानसून सत्र में इस पर बड़ी बहस होने की उम्मीद है।



FAQ

  1. मध्य प्रदेश यूसीसी में लिव-इन रिलेशनशिप के लिए क्या नियम रखे गए हैं?
    मसौदे के अनुसार लिव-इन में रहने के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। यह रजिस्ट्रेशन जिले के रजिस्ट्रार के पास कराना होगा। सिर्फ बालिग जोड़े ही यह रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। रिश्ता खत्म करने पर तलाक जैसी प्रक्रिया अपनानी होगी।
  2. लिव-इन रजिस्ट्रेशन को लेकर विवाद हो जाए तो क्या होगा?
    अगर कोई पक्ष रजिस्ट्रेशन निरस्त करने का विरोध करता है, तो मामला कोर्ट में जा सकता है। यूसीसी को किसी क्रिमिनल एक्ट से नहीं जोड़ा गया है। कोर्ट का फैसला दोनों पक्षों को मानना अनिवार्य होगा।
  3. उत्तराधिकार को लेकर यूसीसी में क्या बदलाव किया गया है?
    पहले उत्तराधिकार से जुड़े कुल 100 प्रावधान थे। अब इन्हें घटाकर 30 कर दिया गया है। इससे मध्य प्रदेश का यूसीसी गुजरात और उत्तराखंड के मुकाबले ज्यादा संक्षिप्त हो जाएगा। घुमंतू और अर्धघुमंतू समुदाय को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

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