भोपाल में UCC की बड़ी बैठक, कांग्रेस सहित 4 पार्टियां गायब, BJP और CPM में जोरदार बहस
मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की तैयारी चल रही है। भोपाल में इस पर एक अहम बैठक हुई। सरकार ने 6 राष्ट्रीय दलों को बुलाया था। इनमें से केवल भाजपा और CPM ही पहुंचे। कांग्रेस सहित बाकी 4 दल बैठक से दूर रहे।
UCC बैठक: कौन आया, कौन नहीं?
भोपाल की प्रशासन अकादमी में समान नागरिक संहिता की राज्य स्तरीय समिति की अंतिम दौर की बैठक हुई। सरकार ने 6 राष्ट्रीय पार्टियों को बुलाया था।
इनमें भाजपा, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, आम आदमी पार्टी और CPM शामिल थीं। लेकिन बैठक में सिर्फ भाजपा और CPM के नेता ही पहुंचे।
कांग्रेस, बसपा और आप समेत चार दल बिना किसी सूचना के नदारद रहे। इससे यह बैठक राजनीतिक रूप से और भी महत्वपूर्ण हो गई।
समिति की अध्यक्ष रहीं अनुपस्थित
समिति की अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई दिल्ली में एक अन्य बैठक होने की वजह से व्यक्तिगत रूप से नहीं आ सकीं।
उनकी जगह समिति के बाकी सदस्यों ने बैठक संभाली। इनमें रिटायर्ड आईएएस शत्रुघ्न सिंह, बुद्ध सिंह, गोपाल शर्मा, अनूप नायर और शोभा पैठणकर शामिल रहे। बैठक चार अलग-अलग सत्रों में हुई। हर सत्र में अलग पक्षों से सुझाव लिए गए।
आयोगों और विभागों ने दिए सुझाव
पहले सत्र में मध्यप्रदेश के कई आयोगों के प्रतिनिधियों ने सुझाव रखे। इनमें महिला आयोग, मानव अधिकार आयोग, बाल संरक्षण अधिकार आयोग और पिछड़ा वर्ग आयोग शामिल थे।
इसके बाद सरकारी विभागों ने प्रेजेंटेशन के जरिए अपने प्रस्ताव सामने रखे। यह बैठक UCC को अंतिम रूप देने से पहले का जरूरी हिस्सा मानी जा रही है।
CPM ने कहा: गलत समय पर गलत कदम
CPM के राज्य प्रतिनिधि पीवी रामचंद्रन ने बैठक में UCC का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि जब बेरोजगारी, महंगाई और भुखमरी जैसी समस्याएं जनता को परेशान कर रही हैं, तब यह कदम गलत है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार नीट परीक्षा तक ठीक से नहीं करा पा रही। ऐसे में UCC लागू करना जनता के साथ अन्याय है।
रामचंद्रन ने यह भी आरोप लगाया कि यह कानून आदिवासी वर्ग और दूसरे समुदायों के लिए परेशानी का कारण बनेगा।
भाजपा ने सौंपे बड़े प्रस्ताव
भाजपा के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी और प्रदेश संयोजक एसएस उप्पल ने समिति को लिखित सुझाव दिए। इनमें सबसे अहम प्रस्ताव था कि विदेश में बसे भारतीय यानी एनआरआई का विवाह पंजीयन अनिवार्य किया जाए।
विधायक रामेश्वर शर्मा ने UCC को संविधान की भावना के अनुरूप बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और परिवारों के हितों की रक्षा करेगा।
सजा सख्त करने की मांग
शर्मा ने यह भी सुझाव दिया कि कुछ अपराधों में जमानत के नियम सख्त किए जाएं। उन्होंने कहा कि सजा की अवधि बढ़ाकर इसे भारतीय न्याय संहिता में शामिल किया जाए।
इससे महिलाओं और बुजुर्गों को बेहतर सुरक्षा मिलेगी। यह प्रस्ताव समिति को लिखित में सौंपा गया।
मुस्लिम समाज ने भी जताई आपत्ति
बैठक में मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि हाजी हारून भी मौजूद थे। उन्होंने सीधे कहा कि हम UCC को नहीं मानेंगे।
यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि UCC को लेकर समाज में अभी भी मतभेद हैं। समिति इन सभी सुझावों और आपत्तियों को अपनी अंतिम रिपोर्ट में शामिल करेगी।
FAQ
- UCC यानी समान नागरिक संहिता क्या है?
UCC एक ऐसा कानून है जो विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी धर्मों के लिए एक समान नियम लागू करता है। अभी अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ हैं। UCC इन्हें एकसमान बनाने की कोशिश है। - मध्यप्रदेश में UCC बैठक का मकसद क्या था?
यह बैठक UCC को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न पक्षों से सुझाव लेने के लिए बुलाई गई थी। राज्य स्तरीय समिति ने आयोगों, सरकारी विभागों और राजनीतिक दलों से राय ली। इससे समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी। - कांग्रेस बैठक में क्यों नहीं गई?
स्रोत सामग्री में कांग्रेस की गैरहाजिरी की आधिकारिक वजह नहीं बताई गई है। बसपा और आप भी बिना किसी सफाई के नदारद रहे। यह राजनीतिक विरोध का संकेत माना जा रहा है।
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