उज्जैन की महाकाल कॉन्फ्रेंस में अजब बिलिंग: ई-रिक्शा बनी ट्रेवलर, तो बाइक बनी इनोवा क्रिस्टा, 25 घंटे में गाड़ी चली 22 हजार किमी

Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 25, 2026, 11:09 IST
महाकाल कॉन्फ्रेंस में वाहन बिलों पर सवाल, मोपेड बनी ट्रैवलर और ई-रिक्शा बनी इनोवा
Vehicle bills worth over ₹57 lakh at Ujjain's Mahakal Conference face scrutiny after discrepancies involving registration numbers, vehicle types and 38 hours of billing in a single day.
मध्य प्रदेश में सरकारी खर्च के बिलों में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। मामला उज्जैन में हुई महाकाल कॉन्फ्रेंस का है। यहां गाड़ियों के किराये के नाम पर अजीबोगरीब बिल बनाए गए। एक मोपेड को 26 सीटर ट्रैवलर बता दिया गया। ई-रिक्शा को इनोवा कार दिखाया गया। हद तो तब हो गई जब एक गाड़ी की एक दिन में 38 घंटे की ड्यूटी दिखा दी गई।

इस कार्यक्रम में गाड़ियों के किराये पर 57 लाख रुपए से ज्यादा खर्च हुए हैं। बिलों की पड़ताल में ये गड़बड़ियां सामने आई हैं।



अप्रैल में हुई थी महाकाल कॉन्फ्रेंस

अप्रैल 2026 में उज्जैन में महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम कॉन्फ्रेंस हुई थी। इसका आयोजन मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मैपकास्ट) ने किया था।



कार्यक्रम के लिए भोपाल की अदिति टूर एंड ट्रेवल्स से गाड़ियां किराये पर ली गई थीं। गाड़ियां बुलाने का काम वीर भारत न्यास के जरिए हुआ था।



इन गाड़ियों के किराये पर 57 लाख रुपए से ज्यादा खर्च हुए। अब इन गाड़ियों के बिलों पर सवाल उठ रहे हैं।



बिलों में दर्ज गाड़ियों के नंबर आरटीओ रिकॉर्ड से मिलाए गए। इस जांच में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। बिलों में दी गई जानकारी आरटीओ के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती हैं।



ट्रैवलर का नंबर चेक किया तो निकली मोपेड

रिपोर्ट के मुताबिक बिल नंबर 3054 में एक गाड़ी को ट्रैवलर बताया गया है। इसका नंबर UP65-ED1523 लिखा है। बिल के अनुसार यह गाड़ी 1 अप्रैल 2026 को उज्जैन में चली थी। इस दौरान गाड़ी ने 186 किलोमीटर का सफर तय किया। इसके लिए 29 हजार 242 रुपए का भुगतान हुआ।



हैरानी की बात तब सामने आई जब गाड़ी का नंबर चेक किया गया। आरटीओ रिकॉर्ड में यह नंबर किसी ट्रैवलर का नहीं था। यह नंबर उत्तर प्रदेश में एक मोपेड के नाम पर दर्ज मिला है।



यह मोपेड शुभम जायसवाल के नाम पर रजिस्टर्ड है। शुभम ने बताया कि उनकी मोपेड दो महीने से खराब पड़ी है। वह बनारस की टीवीएस वर्कशॉप में खड़ी है।



अब सवाल यह है कि बनारस में खड़ी मोपेड उज्जैन कैसे पहुंच गई? उसके नंबर पर ट्रैवलर चलने का बिल कैसे बन गया? वह भी पूरे 29 हजार 242 रुपए का।



ई-रिक्शा को बिल में बता दिया इनोवा कार

एक और बिल में गड़बड़ी सामने आई है। इसमें ई-रिक्शा को इनोवा कार बताकर बुकिंग दिखाई गई है।



बिल नंबर 3061 में गाड़ी का नंबर MP13-ZP4512 दर्ज है। इसे 2 से 5 अप्रैल तक इनोवा कार के रूप में बुक दिखाया गया।



जब इस नंबर की उज्जैन आरटीओ में जांच की गई तो सच्चाई अलग निकली है। यह नंबर किसी इनोवा कार का नहीं बल्कि ई-रिक्शा का है।



इस ई-रिक्शा को रितेश श्रीवास्तव चलाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि ई-रिक्शा को इनोवा बताकर बिल कैसे बना दिया गया?



जांच में ऐसे और भी मामले सामने आए हैं। बिलों में कुछ गाड़ियों को इनोवा और ट्रैवलर बताया गया है। लेकिन आरटीओ रिकॉर्ड में वे वैन, मोपेड और ट्रक के रूप में दर्ज हैं।



एक दिन में गाड़ी की 38 घंटे की ड्यूटी दिखा दी

एक दिन में 24 घंटे होते हैं। लेकिन उज्जैन में एक गाड़ी की 38 घंटे की ड्यूटी दिखा दी गई। मामला इनोवा क्रिस्टा गाड़ी नंबर MP09-TA-8278 का है। इस गाड़ी को 5 अप्रैल को ड्यूटी पर दिखाया गया था।



हैरानी की बात यह है कि इसी दिन गाड़ी के तीन बिल बनाए गए। बिल नंबर 3054 में गाड़ी की 10 घंटे अतिरिक्त ड्यूटी दिखाई गई। वहीं बिल नंबर 3060 में दो ड्यूटी दर्ज की गईं। इनमें एक ड्यूटी 13 घंटे और दूसरी 15 घंटे की थी।



तीनों को जोड़ने पर कुल 38 घंटे हो गए। यानी एक ही गाड़ी की एक दिन में 38 घंटे ड्यूटी दिखाई गई। खास बात यह है कि तीनों ड्यूटी का भुगतान भी मंजूर हो गया। अब सवाल उठ रहा है कि एक दिन में गाड़ी 38 घंटे कैसे चली?



एक ही गाड़ी के दो बिल बनाए

जांच में एक ही गाड़ी के दो बिल बनाने का मामला सामने आया है। गाड़ी नंबर MP11-P0671 को 26 सीटर ट्रैवलर बताया गया है।



तीन अप्रैल को इस गाड़ी के नाम पर दो बिल बनाए गए। इनके नंबर 3060 और 3061 हैं।



हैरानी की बात है कि दोनों बिलों में 10-10 घंटे की अतिरिक्त ड्यूटी दिखाई गई है। यानी एक ही गाड़ी के लिए एक दिन में दो बार बिल बनाया गया है।



दोनों बिल मंजूर भी हो गए हैं। इससे एक ही गाड़ी का दो बार भुगतान दिखाने की आशंका जताई जा रही है।



25 घंटे में गाड़ी का मीटर 22 हजार किमी बढ़ गया

एक गाड़ी की मीटर रीडिंग में भी बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। मामला टेंपो ट्रैवलर नंबर MP09-FA9227 का है। इसका ड्राइवर रमेश बताया गया है।



3 अप्रैल की सुबह 6:30 बजे गाड़ी की ड्यूटी शुरू हुई। उस समय मीटर पर 39 हजार 419 किलोमीटर दर्ज थे। 4 अप्रैल की सुबह 4 बजे ड्यूटी खत्म हुई। तब मीटर रीडिंग 39 हजार 616 किलोमीटर थी। यानी गाड़ी करीब 197 किलोमीटर चली थी।



इसके बाद 5 अप्रैल की सुबह 5 बजे नई रीडिंग दर्ज हुई। इस बार मीटर पर 62 हजार 324 किलोमीटर दिखाए गए।



मतलब सिर्फ 25 घंटे में मीटर 22 हजार 708 किलोमीटर बढ़ गया। इतनी कम समय में इतनी दूरी कैसे तय हुई? इस बड़े अंतर से गाड़ी की ड्यूटी स्लिप पर सवाल उठ रहे हैं।



महाकाल कॉन्फ्रेंस के वाहन बिलों में गड़बड़ी, RTO रिकॉर्ड में निकलीं दूसरी गाड़ियां

महाकाल कॉन्फ्रेंस पर खर्च हुए 6.29 करोड़ रुपए

महाकाल कॉन्फ्रेंस के आयोजन में मैपकास्ट ने कुल 6.29 करोड़ रुपए खर्च किए थे। इसमें टेंट लगाने से लेकर लाइट और साउंड तक का खर्च शामिल था। प्रोजेक्शन और प्रचार-प्रसार पर भी पैसा खर्च किया गया था।



इन कामों की जिम्मेदारी दो कंपनियों को दी गई थी। इनमें सुविधा इंटरप्राइजेज और मेसर्स प्रो. इवेंट शामिल थीं। दोनों कंपनियों ने अपने बिल वीर भारत न्यास को सौंपे थे।



मेसर्स प्रो. इवेंट को 22.12 लाख रुपए दिए गए। सुविधा इंटरप्राइजेज को 4.18 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। वीर भारत न्यास ने मैपकास्ट से 12.82 लाख रुपए हैंडलिंग चार्ज भी लिया है।



कार्यक्रम में खाने-पीने पर भी मोटी रकम खर्च हुई है। इसकी जिम्मेदारी भोपाल की नर्मदा कैटर्स को दी गई थी। कैटरिंग के लिए 1.32 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।



इसके अलावा मेहमानों के आने-जाने के लिए गाड़ियां किराये पर ली गई थीं। इन गाड़ियों के किराये पर ही 57 लाख रुपए से ज्यादा का भुगतान हुआ है।



ट्रेवल्स संचालक ने क्या कहा?

वाहनों के बिल में गड़बड़ी के सवाल पर अदिति ट्रेवल्स ने सफाई दी है। कंपनी के डायरेक्टर देवेंद्र सक्सेना ने कहा कि सभी बिल सही हैं। कंपनी ने जो गाड़ियां भेजी थीं, उन्हीं के बिल बनाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि बिलों में लिखे सभी गाड़ियों के नंबर भी सही हैं। सक्सेना ने वाहन नंबरों में किसी भी तरह की गलती से इनकार किया है।



वीर भारत न्यास ने क्या कहा?

इस मामले में वीर भारत न्यासके न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी से भी सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। पूरी जानकारी जांचने के बाद ही वे कुछ बता पाएंगे।



मैपकास्ट ने कहा- गड़बड़ी मिली तो जांच कराएंगे

इस मामले में मैपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने भी अपनी बात रखी है। उन्होंने बताया कि कॉन्फ्रेंस के लिए गाड़ियां संस्कृति विभाग से ली गई थीं। उन्होंने कहा कि अगर कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच कराई जाएगी। हालांकि अभी तक औपचारिक जांच के आदेश जारी होने की जानकारी नहीं मिली है।



अब वाहन बिलों की जांच पर उठे सवाल

महाकाल कॉन्फ्रेंस के लिए किराए पर ली गई गाड़ियों के बिलों में कई गड़बड़ियां मिली हैं। किसी बिल में मोपेड को ट्रैवलर बताया गया है। कहीं ई-रिक्शा के नंबर पर इनोवा का बिल बना दिया गया।



कुछ गाड़ियों की एक ही दिन में दो से तीन बार ड्यूटी दिखाई गई। हैरानी की बात यह है कि एक गाड़ी का एक दिन में 38 घंटे का बिल बनाया गया है। गाड़ियों के चलने की दूरी में भी बड़ा अंतर मिला है।



ये गड़बड़ियां बिलों और दस्तावेजों की पड़ताल में सामने आई हैं।



अब सवाल उठ रहा है कि ऐसे बिल पास कैसे हो गए? भुगतान करने से पहले गाड़ियों के नंबर क्यों नहीं जांचे गए? क्या अधिकारियों ने बिलों की सही तरीके से जांच की थी?



इन सवालों के जवाब संबंधित विभागों की जांच के बाद ही सामने आएंगे।



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