संसद में दीनदयाल जन आजीविका योजना का सच उजागर, 284 में से 138 युवाओं के आवेदन रिजेक्ट

Aman Vaishnav | Aug 07, 2026, 13:30 IST
एमपी में दीनदयाल जन आजीविका योजना का सच उजागर
संसद में पेश आंकड़ों ने मध्य प्रदेश में युवाओं के रोजगार और सरकारी लोन की जमीनी हकीकत उजागर की है। देश भर में सबसे ज्यादा 138 आवेदन मध्य प्रदेश में ही खारिज किए गए, जो दूसरे राज्यों से बहुत अधिक हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश के युवाओं ने रोजगार के लिए सरकार से लोन मांगा।
  • संसद में पेश आंकड़े बता रहे हैं कि उन्हें बहुत कम मदद मिली।
  • 284 से ज्यादा युवाओं ने आवेदन किया था।
  • मांग 15.83 करोड़ रुपए की थी, लेकिन बांटे गए सिर्फ 84 लाख रुपए।
  • इसी बीच केंद्र की एक और योजना में भी एमपी को सब्सिडी में बड़ी कटौती झेलनी पड़ी है।

आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के नारों के बीच युवाओं के रोजगार मांगने की जमीनी हकीकत अब सामने आ गई है। दीनदयाल जन आजीविका योजना-शहरी के तहत देश के 13 राज्यों के 25 शहरों में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था।



इसमें एमपी के भोपाल, इंदौर और उज्जैन को भी शामिल किया गया। जब यहां आवेदन मांगे गए, तो मध्य प्रदेश का युवा सबसे आगे नजर आया।



एमपी से अकेले ही 284 से अधिक युवाओं ने सीधे लोन के लिए आवेदन किया। इनमें सबसे बड़ी संख्या गिग वर्कर, निर्माण श्रमिक, वाहन चालक और स्वच्छता कर्मियों की थी।



ये सभी रात-दिन मेहनत करते हैं और अपना छोटा कारोबार शुरू करना चाहते हैं। काम की यह तड़प राज्य में बेरोजगारी की गंभीर स्थिति भी दिखाती है।



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84 लाख ही मिले, क्यों

युवाओं ने काम मांगा और सरकार से मदद की गुहार लगाई, लेकिन सरकारी फाइलों और बैंकिंग सिस्टम ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। मध्य प्रदेश के युवाओं ने अपने छोटे उद्यम खड़े करने के लिए 15.83 करोड़ रुपए के लोन की मांग रखी थी।



चौंकाने वाली बात यह है कि बैंकों की सुस्ती के चलते केवल 27.4 प्रतिशत आवेदन ही मंजूर हो सके। यानी सिर्फ 123 आवेदनों को हरी झंडी मिली। असल में जमीन पर बांटे गए सिर्फ 84.1 लाख रुपए। यह कुल मांगी गई राशि का महज 5.3 प्रतिशत है।



कुल मांग का एक बड़ा हिस्सा फाइलों में ही दबकर रह गया। स्वीकृत आवेदनों से भी ज्यादा, यानी 138 आवेदन सीधे खारिज कर दिए गए। इसने युवाओं को आत्मनिर्भर बनने से पहले ही हतोत्साहित कर दिया।



दूसरे राज्यों से तुलना

दूसरे राज्यों से तुलना करें, तो मध्य प्रदेश की स्थिति और निराशाजनक लगती है। गुजरात में 11.06 करोड़ रुपए की मांग आई थी। वहां बैंकों ने 1.31 करोड़ रुपए बांटे और 96 आवेदनों को लोन दिया। तमिलनाडु में 100 आवेदनों को सफलतापूर्वक 61.79 लाख रुपए बांटे गए।



मध्य प्रदेश में आवेदन खारिज होने की दर पूरे देश में सबसे ज्यादा रही। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में सिर्फ 35 आवेदन खारिज हुए।



वहीं एमपी में 138 युवाओं के सपनों को कागजों पर ही रोक दिया गया। यह तुलना बताती है कि राज्य का बैंकिंग और प्रशासनिक ढांचा युवाओं को संबल देने में पीछे रहा है।



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पीएमईजीपी में भी झटका

सिर्फ दीनदयाल जन आजीविका योजना ही नहीं, केंद्र सरकार की सबसे बड़ी रोजगार योजना (पीएम विकसित भारत रोजगार योजना) पीएमईजीपी (पीएमईजीपी योजना) में भी एमपी को झटका लगा है।



संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021-22 में एमपी को 209.58 करोड़ रुपए की मार्जिन मनी सब्सिडी मिली थी।



यह राशि लगातार घटती गई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह सिमटकर महज 84.29 करोड़ रुपए रह गई। पांच सालों में सब्सिडी आधे से भी कम हो गई।



इससे लगता है कि राज्य में नए उद्योगों और युवा स्टार्टअप्स को मिलने वाली मदद पर अघोषित ब्रेक लग गया है। पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में पिछले वर्ष यह सब्सिडी बढ़कर 142.31 करोड़ रुपए हो गई।



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योजना का असली मकसद

दीनदयाल जन आजीविका योजना-शहरी का मकसद जमीनी स्तर पर सामुदायिक संस्थाओं को मजबूत करना है। इसके साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ाना, सामाजिक बुनियादी ढांचा बनाना और सामाजिक सुरक्षा देना भी इसके लक्ष्यों में शामिल है।



पांच प्रमुख लक्ष्य

योजना के तहत पात्र लोगों को आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जनधन योजना और पीएम मातृ वंदना योजना से जोड़ा जाएगा। शहरी गरीब परिवारों के 70 फीसदी हिस्से को स्व सहायता समूहों से जोड़ने की योजना है। हर समूह को 25 हजार रुपए और गठन खर्च के लिए 20 हजार रुपए दिए जाएंगे।



कारोबार शुरू करने के लिए पर्सनल लोन के रूप में 4 लाख रुपए तक की मदद मिल सकती है। समूह लोन के तहत 20 लाख रुपए तक की सहायता का प्रावधान है। इसके अलावा शहरों में आश्रय स्थल, डे केयर सेंटर और लेबर चौक जैसी सुविधाएं भी बनाई जाएंगी।



स्वसहायता समूहों की स्थिति

एमपी में शहरी स्वसहायता समूहों से जुड़े आंकड़े मिले-जुले संकेत देते हैं। राज्य में अभी तक 9 हजार 318 स्व सहायता समूह बन चुके हैं। इनमें 642 एरिया लेवल फेडरेशन और 34 सिटी लेवल फेडरेशन शामिल हैं। इनसे करीब 9 हजार गरीब परिवार जुड़े हैं।



आर्थिक मदद के तौर पर 6 हजार 720 समूहों को 6.75 करोड़ रुपए की सहायता दी गई। पर्सनल लोन के तहत 5 हजार 723 हितग्राहियों को 77 करोड़ रुपए से ज्यादा मिले।



समूह लोन में 396 समूहों को 11 करोड़ रुपए और बैंक लोन में 3 हजार 581 समूहों को 21.50 करोड़ रुपए दिए गए। ये समूह अमृत मित्र, पानी की क्वालिटी जांच और स्वच्छता जागरूकता जैसे कामों से भी जुड़े हैं।



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