इंदौर-भोपाल की बदलेगी तस्वीर: 100 मंजिला इमारतें बनेंगी, 15 नई टाउनशिप और 20 लाख रोजगार का लक्ष्य, जानें पूरा प्लान
इसके अलावा इंदौर समेत आठ जिलों को जोड़कर आर्थिक क्षेत्र बनाया जाएगा। सरकार ने 2047 तक अर्थव्यवस्था को दो ट्रिलियन डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार, 28 अक्टूबर को इन योजनाओं की जानकारी दी। वे इंदौर में अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में शामिल हुए थे। यह कार्यक्रम ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया गया था। यहां मुख्यमंत्री ने निवेशकों से बातचीत की। इस दौरान शहरों के विकास के लिए छह समझौते भी हुए।
मध्य प्रदेश में 100 मंजिला इमारतें बनाने की तैयारी
मध्य प्रदेश के बड़े शहरों में आबादी बढ़ रही है। इसके साथ ही मकानों, दफ्तरों और दूसरी सुविधाओं के लिए जमीन की जरूरत भी बढ़ रही है।
इसी को देखते हुए सरकार ऊंची इमारतों के निर्माण को बढ़ावा देना चाहती है। इसके लिए 100 मंजिला तक की इमारतें बनाने संबंधी नियमों में छूट देने की योजना है।
सरकार का उद्देश्य शहरों में उपलब्ध जमीन का बेहतर इस्तेमाल करना है। इससे कम जमीन पर ज्यादा लोगों के लिए आवास और दूसरी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी।
हालांकि, फिलहाल यह योजना के स्तर पर है। किन शहरों में कितनी ऊंची इमारतें बनेंगी और निर्माण कब शुरू होगा, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
इंदौर में पांच हजार एकड़ में बनेगी फ्यूचर सिटी
मुख्यमंत्री ने बताया कि इंदौर में पांच हजार एकड़ जमीन पर फ्यूचर सिटी विकसित करने की योजना है। इस परियोजना में केवल मकान ही नहीं बनाए जाएंगे। यहां उद्योग, व्यापार और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
सरकार चाहती है कि लोगों को रहने के साथ काम करने के अवसर भी एक ही क्षेत्र में मिलें। Indore Future City Project के तहत आधुनिक शहरी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, साल 2047 तक क्षेत्र में 12 से 15 नई टाउनशिप बनाई जाएंगी। इसके अलावा 25 से 30 हजार एकड़ जमीन पर योजनाबद्ध शहरी विकास किया जाएगा। इन योजनाओं से क्षेत्र के करीब दो करोड़ लोगों को सुविधाएं मिलने का लक्ष्य रखा गया है।
2047 तक 20 लाख रोजगार देने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रोजगार बढ़ाने की योजना बताई है। सरकार शहरों को उद्योग और रोजगार का बड़ा केंद्र बनाना चाहती है। इसके लिए 2047 तक करीब 20 लाख रोजगार देने का लक्ष्य है।
सरकार नई टाउनशिप बनाएगी और उद्योगों को बढ़ावा देगी। इससे लोगों के लिए रोजगार के नए मौके पैदा होंगे। सरकार निजी कंपनियों को भी निवेश के लिए प्रोत्साहित करेगी।
इसके लिए मकान, सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। इन सुविधाओं से नए उद्योग लगाने में मदद मिलेगी।
हालांकि, 20 लाख रोजगार देना अभी सरकार का भविष्य का लक्ष्य है। फिलहाल इस योजना के तहत कोई सरकारी भर्ती नहीं निकली है।
इंदौर समेत आठ जिलों का बनेगा बड़ा आर्थिक क्षेत्र
मध्य प्रदेश के आठ जिलों को मिलाकर बड़ा आर्थिक क्षेत्र बनाया जाएगा। इंदौर इस पूरे क्षेत्र का मुख्य केंद्र होगा। इसका नाम इंदौर इकोनॉमिक रीजन (IER) रखा गया है।
इसमें इंदौर, उज्जैन, धार, रतलाम, देवास, खरगोन, खंडवा और शाजापुर शामिल हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट और सुझावों के आधार पर योजना बनी है। इसे नगरीय प्रशासन विभाग ने तैयार किया है।
इस योजना को Indore Economic Region 2047नाम दिया गया है। इन आठ जिलों में नए उद्योग लगाने पर जोर रहेगा। व्यापार बढ़ाने और निवेश लाने की भी तैयारी है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा करने का लक्ष्य है।
सरकार ने साल 2047 तक का बड़ा लक्ष्य रखा है। तब तक इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था 600 अरब डॉलर पहुंचाने की योजना है। इसके अलावा 50 लाख स्वामित्व रजिस्ट्रियां कराने की भी योजना है। इनके जरिए आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की तैयारी है।
इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में एक लाख करोड़ का निवेश
मुख्यमंत्री ने इंदौर क्षेत्र में बड़े औद्योगिक विकास की योजना भी बताई है। उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक्स और इंदौर-भोपाल-जबलपुर के बीच प्रस्तावित इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में एक लाख करोड़ रुपए का निवेश होगा।
इससे उद्योगों और माल परिवहन से जुड़ी सुविधाओं के विकास की उम्मीद है। इंदौर और उज्जैन के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए फोरलेन सड़क भी बनाई जा रही है।
इसके अलावा एयरपोर्ट से जुड़ी कनेक्टिविटी और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लेकर भी योजनाओं का जिक्र किया गया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहरों के बीच आवागमन और व्यापार को आसान बनाना है।
भोपाल में 2250 करोड़ का रेसकोर्स प्रोजेक्ट प्रस्तावित
अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री ने कई निवेशकों से अलग-अलग चर्चा की है। इसमें हेला ग्रुप के संस्थापक जिमी मिस्त्री भी शामिल थे। दोनों के बीच भोपाल में प्रस्तावित रेसकोर्स प्रोजेक्ट को लेकर बातचीत हुई।
इस परियोजना को करीब 220 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने का प्रस्ताव है। इसकी अनुमानित लागत दो हजार 250 करोड़ रुपए बताई गई है। फिलहाल यह प्रस्तावित परियोजना है। इसके निर्माण की शुरुआत या पूरा होने की समयसीमा की जानकारी नहीं दी गई है।
शहरी विकास के लिए छह समझौते
कॉन्क्लेव में शहरी विकास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं के लिए छह समझौते किए गए हैं। उज्जैन विकास प्राधिकरण और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच मंदिर सर्किट के विकास के लिए 643.39 करोड़ रुपए के बैंक ऋण से जुड़ा समझौता हुआ।
इंदौर नगर निगम और बैंक ऑफ इंडिया के बीच एक हजार 320 करोड़ रुपए का ऋण अनुबंध किया गया है। रीवा में जल आपूर्ति से जुड़ी परियोजना के लिए नगर निगम और एक्सिस बैंक के बीच 50 करोड़ रुपए की वित्तीय व्यवस्था का समझौता हुआ है।
इसके अलावा खाद्य अपव्यय के वैज्ञानिक तरीके से पुनर्चक्रण और इस्तेमाल किए गए पानी को दोबारा उपयोग में लाने से जुड़ी पहल पर भी समझौते हुए हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य शहरों में पानी की उपलब्धता, सफाई और दूसरी सुविधाओं को बेहतर बनाना है।
टेंपल बॉन्ड और ग्रीन बॉन्ड पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शहरी विकास के लिए निवेश के नए तरीके अपना रही है। इसके तहत टेंपल बॉन्ड और ग्रीन बॉन्ड जैसी पहल की गई हैं। टेंपल बॉन्ड का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन और उससे जुड़ी सुविधाओं के विकास के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना है।
वहीं, ग्रीन बॉन्ड के जरिए पर्यावरण और टिकाऊ विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाई जा सकती है। सरकार चाहती है कि शहरों के विकास में निजी निवेशकों की भागीदारी भी बढ़े।
मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को दो ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य
मध्य प्रदेश सरकार ने साल 2047 के लिए बड़ा लक्ष्य रखा है। सरकार प्रदेश की अर्थव्यवस्था दो ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना चाहती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस योजना की जानकारी दी। इसके लिए बड़े शहरों में नए उद्योग लगाए जाएंगे।
निवेश बढ़ाने और रोजगार के नए मौके देने पर जोर रहेगा। MP Urban Growth Conclave 2.0 में इसका रोडमैप पेश किया गया है। सरकार शहरों में घर और बेहतर सुविधाएं देना चाहती है।
सौर ऊर्जा और पानी की व्यवस्था भी बेहतर बनाई जाएगी। इन कामों में निजी कंपनियों से निवेश कराने की योजना है। सरकार गरीब और मध्यम वर्ग की जरूरतों का भी ध्यान रखेगी।
हालांकि, कई योजनाएं अभी सिर्फ कागजों पर ही हैं। इन्हें शुरू करने के लिए मंजूरी और निवेश की जरूरत होगी। इसके बाद ही निर्माण का काम आगे बढ़ सकेगा।
अब सवाल है कि ये योजनाएं कब तक पूरी होंगी। लोगों को इनका फायदा कब मिलेगा, यह भी देखना होगा।
FAQ
- मध्य प्रदेश में 100 मंजिला इमारतें कहां बनाई जाएंगी?
सरकार भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में 100 मंजिला इमारतें बनाने की संभावनाएं तलाश रही है। इसके लिए भवन निर्माण नियमों में छूट देने की तैयारी है। - इंदौर फ्यूचर सिटी कितने एकड़ में बनेगी?
इंदौर में करीब 5 हजार एकड़ जमीन पर फ्यूचर सिटी विकसित करने की योजना है, जिसमें आवास, उद्योग, व्यापार और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। - 2047 तक मध्य प्रदेश में कितने रोजगार देने का लक्ष्य है?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, वर्ष 2047 तक इंदौर-उज्जैन-भोपाल क्षेत्र में 20 लाख रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य है। यह योजना भविष्य की है और फिलहाल कोई सरकारी भर्ती नहीं है।