मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 7 दिसंबर से, अनुपूरक बजट के साथ आएंगे दो अहम संशोधन विधेयक
पिछले साल 2025 की बात करें, तो तब भी यह सत्र 1 दिसंबर से 5 दिसंबर के बीच आयोजित किया गया था।
मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र
इस 5 दिन की अवधि में कई जरूरी काम निपटाए जाने हैं। सत्र के दौरान राज्य सरकार अपना द्वितीय अनुपूरक बजट यानी लेखानुदान सदन के पटल पर रखेगी। इसके जरिए सरकार राज्य के जरूरी खर्चों और विकास कार्यों के लिए जरूरी वित्तीय मंजूरी लेगी।
इन दो बड़े कानूनों में संशोधन की तैयारी
सत्र के दौरान सरकार दो महत्वपूर्ण बदलाव करने जा रही है, जिसका सीधा असर गांव और शहर दोनों पर पड़ेगा...
- पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग (Panchayat and Rural Development Department) की तरफ से पंचायत राज अधिनियम में संशोधन का विधेयक पेश किया जाएगा।
- नगरीय विकास एवं आवास विभाग (Urban Development and Housing Department) की ओर से कॉलोनाइजर एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव लाया जाएगा, ताकि कॉलोनियों से जुड़े नियमों को और बेहतर बनाया जा सके।
पूरी तरह डिजिटल होगा विधानसभा का कामकाज
इस बार के शीत सत्र की सबसे खास बात यह रहने वाली है कि इसमें नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन को पूरी तरह से लागू किया जा रहा है। नेवा सिस्टम के शुरू होने से अब कागजी काम की जगह सब कुछ ऑनलाइन स्क्रीन पर दिखेगा।
विधायकों को डिजिटल कामकाज की ट्रेनिंग
बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने नेवा लागू करने की तैयारी पहले से ही शुरू कर दी है। इसके लिए विधायकों को डिजिटल कामकाज भी सिखाया गया है। इसकी ट्रेनिंग 28, 29 और 30 अक्टूबर हुई थी।
दिसंबर से पेपरलेस विधानसभा
विधानसभा के शीतकालीन सत्र से विधायी कामकाज डिजिटल करने की योजना है। अभी विधानसभा में कई काम पेपर डाक्यूमेंट्स के जरिए होते हैं। विधायकों को सवालों और जवाबों की प्रतियां दी जाती हैं।
बिल्स और कार्यसूची भी छपवानी पड़ती है। इसके बाद डाक्यूमेंट संबंधित लोगों तक पहुंचाए जाते हैं। नेवा लागू होने से यह प्रक्रिया बदल जाएगी। ज्यादातर जरूरी डाक्यूमेंट डिजिटल माध्यम से उपलब्ध होंगे। MP Assembly Digital System के जरिए कागजों पर निर्भरता घटाने की तैयारी है।
विधायक ऑनलाइन पूछ सकेंगे सवाल
नई व्यवस्था में विधायक विधानसभा के सवाल ऑनलाइन रिकॉर्ड कर सकेंगे। ध्यानाकर्षण और स्थगन की सूचनाएं (Notices of Adjournment) भी एप्लिकेशन से भेजी जा सकेंगी।
इसके अलावा संकल्प पत्र और याचिकाएं पेश करने की सुविधा मिलेगी। विधायक प्राइवेट मेंबर बिल से जुड़े डॉक्यूमेंट भी डिजिटल माध्यम से जमा कर सकेंगे।
प्राइवेट मेंबर बिल वह विधेयक होता है जिसे मंत्री के बजाय कोई दूसरा विधायक पेश करता है। इस तरह विधायकों को कई कामों के लिए अलग-अलग कागजी डाक्यूमेंट तैयार नहीं करने पड़ेंगे।
टैबलेट पर मिलेगी जरूरी जानकारी
नेवा एप्लिकेशन से विधायकों को सदन की कार्यसूची मिलेगी। इसमें दिनभर होने वाले विधायी कामकाज की जानकारी रहती है। किस विषय पर चर्चा होगी और कौन सा विधेयक पेश होगा। इसकी जानकारी टैबलेट पर देखी जा सकेगी। संबंधित विभागों के जवाब भी डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगे।
विधायक पुराने सवालों और कार्यवाही का रिकॉर्ड भी खोज सकेंगे। इससे पहले की बैठकों और सरकारी जवाबों की जानकारी हासिल करना आसान होगा।
देश के 21 सदनों में लागू नेवा
केंद्र सरकार के उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक नेवा 21 सदनों में लागू हो चुका है। ये सदन 19 राज्यों और क्षेत्रों से जुड़े हैं। इनमें पंजाब, ओडिशा, बिहार और नागालैंड भी शामिल हैं।
मणिपुर और तमिलनाडु में भी इसका इस्तेमाल हो रहा है। सिक्किम, त्रिपुरा, हरियाणा और मेघालय भी इस लिस्ट में हैं। मिजोरम, उत्तर प्रदेश, गुजरात और पुडुचेरी में भी नेवा लागू है।
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, असम और राजस्थान भी इसमें शामिल हैं। दिल्ली में भी इस एप्लिकेशन को लागू किए जाने की जानकारी दी गई है।
अब मध्य प्रदेश विधानसभा भी इसी व्यवस्था को अपनाएगी।