एमपी विधानसभा मानसून सत्र का पहला दिन हंगामेदार: UCC समेत एक साथ 14 विधेयक पेश
समझें क्या है पूरा मामला....
- मध्य प्रदेश सरकार ने मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 पेश किया।
- स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि इस पर मंगलवार चर्चा होगी।
- उज्जैन जमीन खरीदी मामले पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ।
- इसके चलते कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।
- कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री और मंत्रियों के मुखौटे लगाकर सदन पहुंचे।
यूसीसी बिल पर सियासत
मध्य प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू हुआ।सरकार ने सोमवार को समान नागरिक संहिता विधेयक विधानसभा में पेश कर दिया। स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि इस पर अगले दिन चर्चा कराई जाएगी।
वहीं, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उनका कहना था कि विपक्ष को हर समाज और धर्म के साथ खड़ा रहना चाहिए।
मुखौटे लगाकर पहुंचे कांग्रेस विधायक
मध्य प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायक CM डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के मुखौटे लगाकर सदन पहुंचे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि दोनों नेता फाइल-फाइल का खेल खेल रहे हैं।
सिंघार ने आरोप लगाया कि किसानों को समय पर खाद और बीज नहीं मिल रहा। उन्होंने बरगी क्रूज हादसे का भी मुद्दा उठाया, जिसमें 13 लोगों की मौत हुई थी।
उज्जैन जमीन मामले पर जमकर हंगामा
एमपी विधानसभा का मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहा और सत्ता पक्ष के साथ ही विपक्ष के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगे। नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने सीएम मोहन यादव और उनके परिवार पर उज्जैन में जमीन खरीदी का आरोप लगाया। उन्होंने इस पर स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा की मांग की।
विधानसभा स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह 2023 का मामला है, इसलिए स्थगन प्रस्ताव पर नहीं लाया जा सकता।
इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष में शोर-शराबा शुरू हो गया। कांग्रेस विधायक गर्भगृह के पास पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। स्पीकर ने कार्यवाही आधे घंटे और फिर दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी थी।
मानसून सत्र में एक साथ पेश हुए 14 बिल
विधानसभा सचिवालय ने पूरक कार्य सूची में 14 विधेयकों की जानकारी दी। इनमें समान नागरिक संहिता, अग्निशमन सेवा और श्रम शक्ति संहिता जैसे बिल शामिल हैं।
कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने सवाल उठाया कि यह बिल कार्य सूची में पहले से क्यों नहीं थे? तोमर ने जवाब दिया कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में इस पर चर्चा हुई थी।
विधायक सचिन यादव और बाला बच्चन ने कहा कि सदन को विश्वास में नहीं लिया गया। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि विधेयक की जानकारी विधायक दिनभर पढ़ सकते हैं।
सिंघार का दोहरी नीति का आरोप
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर के जरिए आपत्ति जताई। उनका आरोप था कि बीजेपी सदस्यों को बोलने का पूरा समय मिलता है, लेकिन कांग्रेस सदस्यों की बात आने पर कार्यवाही आगे बढ़ा दी जाती। कांग्रेस विधायक देवेंद्र पटेल की गैरहाजिरी से उनका डीजे-साउंड सिस्टम प्रस्ताव भी चर्चा में नहीं आया।
ओबीसी महासभा की चेतावनी
इधर, ओबीसी महासभा मध्य प्रदेश ने 27 प्रतिशत आरक्षण लागू कराने की मांग को लेकर घेराव का आयोजन किया था। सदस्य भोपाल के रंगमहल चौराहे पर इकट्ठा हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने 8 साल से मांग पूरी न होने की बात कही। उनका कहना था कि सुनवाई न होने पर विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
कांग्रेस विधायक धरने पर बैठे
इसके अलावा, मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन जौरा से कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय शक्कर कारखाना प्रश्न रिजेक्ट होने से धरने पर बैठ गए थे। उन्होंने मुरैना के युवाओं की मांग का जिक्र किया।
वहीं, कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग तख्तियों के साथ उठाई। कांग्रेस विधायक दल ने किसानों के हक की लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया।
FAQ
- प्रश्न 1: एमपी विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक कब पेश हुआ?
जवाब: यह विधेयक मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को पेश हुआ। इस पर चर्चा मंगलवार को होगी। स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने यह जानकारी दी। - प्रश्न 2: एमपी विधानसभा के मानसून सत्र में हंगामा किस मुद्दे पर हुआ?
जवाब: उज्जैन जमीन खरीदी मामले पर सदन में हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने स्थगन प्रस्ताव की मांग की थी। इसके चलते कार्यवाही दो बार स्थगित हुई। - प्रश्न 3: ओबीसी महासभा एमपी विधानसभा का क्यों कर रही है घेराव?
जवाब: महासभा 27 प्रतिशत आरक्षण लागू कराने की मांग कर रही है। आठ साल से यह मांग पूरी नहीं हुई है। इसलिए विधानसभा घेराव की चेतावनी दी गई है।
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