अफसरों को अब समय पर देना होगा विधायकों के पत्रों का जवाब, अनदेखी पर शिष्टाचार समिति सख्त
News in Short
- विधायकों के पत्रों का जवाब न देने पर अब अफसरों की खैर नहीं होगी।
- विधानसभा की शिष्टाचार समिति के पास वर्तमान में 24 शिकायतें लंबित पड़ी हैं।
- समिति की बैठक में सबसे ज्यादा शिकायतें सामान्य प्रशासन विभाग से आईं थीं।
- प्रभारी मंत्रियों के दौरों की जानकारी अब स्थानीय विधायकों को देना अनिवार्य होगा।
- 15 दिनों के भीतर जवाब न देना विधायक की गरिमा का उल्लंघन माना जाएगा।
News In Detail
मध्य प्रदेश विधानसभा की शिष्टाचार समिति ने विधायकों की अनदेखी को लेकर सख्त कदम उठाया है। अब अगर किसी विभाग ने समय पर विधायकों द्वारा उठाए गए मुद्दों और पत्रों का जवाब नहीं दिया, तो इसे अनदेखी माना जाएगा। फिलहाल समिति के पास 24 लंबित शिकायतें हैं। इनमें प्रोटोकॉल और निमंत्रण न मिलने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग से सबसे ज्यादा शिकायतें
23 अप्रैल को विधानसभा में हुई शिष्टाचार और सम्मान समिति की बैठक में सबसे ज्यादा शिकायतें सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) से आईं थी। इन शिकायतों पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला था।
समिति ने कहा है कि जिन मामलों में जवाब नहीं आया, उनसे जल्दी जानकारी मांगी जाए। साथ ही अब जिलों के अधिकारियों को विधायकों के सवालों और सरकारी कामकाजी पत्रों का जवाब देना होगा।
विधायक नरेंद्र कुशवाह और कलेक्टर की चर्चा
समिति की बैठक में बीजेपी विधायक नरेंद्र कुशवाह से जुड़ी एक घटना और भिंड के तत्कालीन कलेक्टर के बारे में भी चर्चा हुई थी। कुशवाह ने किसानों की समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट जाने और वहां जो हुआ, उस पर समिति ने संज्ञान लिया। इसके अलावा विधायक निधि और राज्य सरकार के प्रोटोकॉल नियमों के पालन को लेकर भी कड़े निर्देश दिए गए हैं।
विधायक की गरिमा का उल्लंघन
समिति के सभापति बृजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि जो भी लंबित शिकायतें हैं, उन्हें तुरंत निपटाया जाए। सिंचाई और अन्य बड़े विभागों में विधायकों के प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो रहा है।
जब जिला स्तर पर प्रभारी मंत्री दौरे पर जाते हैं तो विधायकों को इस बारे में जानकारी नहीं दी जाती है। विभागीय समितियों में भी विधायकों को शामिल नहीं किया जाता है।
समिति का मानना है कि विधायक जनता के प्रतिनिधि होते हैं, अगर अधिकारी 15 दिनों में उनके पत्रों का जवाब नहीं देते या कार्यक्रमों के कार्ड नहीं भेजते, तो यह विधायक की गरिमा का सीधा उल्लंघन है।
FAQ
- एमपी विधानसभा की शिष्टाचार समिति ने क्या नया नियम बनाया है?
समिति ने अब विधायकों के पत्रों का जवाब देना अनिवार्य किया है। अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी। ऐसा न करने पर इसे विधायक की गरिमा का उल्लंघन मानेंगे। अब प्रोटोकॉल के पालन को लेकर प्रशासन को सख्त निर्देश हैं।
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