एमपी विधानसभा का विशेष सत्र आज : नारी शक्ति वंदन पर होगी चर्चा

Sanjay Dhiman | Apr 21, 2026, 16:51 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र आज 27 अप्रैल को बुलाया गया है। इस सत्र में नारी शक्ति वंदन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसकी जानकारी दी है।

News in Short

  • 27 अप्रैल को मध्य प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है।
  • सत्र में सीएम मोहन यादव 33% महिला आरक्षण का संकल्प पेश करेंगे।
  • 17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण बिल 54 वोटों से गिर गया था।
  • कांग्रेस परिसीमन की शर्त हटाकर अभी आरक्षण लागू करने की मांग कर रही है।
  • BJP ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन को महिला विरोधी करार दिया है।

News in Detail

नारी शक्ति वंदन का विशेष सत्र


मध्य प्रदेश की विधानसभा में आज 27 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाया गया है। यह सत्र "नारी शक्ति वंदन" विषय पर केंद्रित है। इसमें महिला सशक्तिकरण और उनके विकास पर खास चर्चा होगी। सत्र की शुरुआत में दिवंगत गायिका आशा भौंसले समेत कुछ प्रमुख नेताओं को श्रद्धांजलि भी दी जाएगी।



मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज सदन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (Nari Shakti Vandan Adhiniyam) के तहत एक संकल्प पेश करेंगे। इस संकल्प में देश की संसद और सभी राज्यों की विधानसभाओं में परिसीमन के आधार पर महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की बात होगी।



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सीएम ने कांग्रेस को घेरा

सत्र से पहले सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से कांग्रेस ने महिला आरक्षण के खिलाफ नकारात्मक रवैया अपनाया। उन्होंने इंदिरा गांधी से राहुल गांधी तक पांच पीढ़ियों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने लगातार महिलाओं के साथ अन्याय किया।



सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को 33% आरक्षण देकर देश की आधी आबादी को उनका हक दिलाने का ऐतिहासिक निर्णय किया। उन्होंने कांग्रेस के साथ-साथ सपा (समाजवादी पार्टी), टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) और डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) जैसे विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। सीएम ने आरोप लगाया कि इन दलों ने मिलकर इस जरूरी कानून को धराशायी करने का काम किया।



कांग्रेस ने भी खोला मोर्चा

दूसरी तरफ कांग्रेस भी चुप नहीं बैठी। विशेष सत्र से एक दिन पहले कांग्रेस ने राजधानी भोपाल में पैदल मार्च निकाला। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी इस रैली में शामिल हुए और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।



पटवारी ने साफ कहा कि कांग्रेस परिसीमन की शर्त के साथ महिला आरक्षण के खिलाफ है। उनका तर्क है कि जितनी सीटें अभी विधानसभा और लोकसभा में हैं, उन्हीं पर 33 फीसदी आरक्षण तुरंत लागू किया जाए। पटवारी ने यह भी कहा कि कांग्रेस विशेष सत्र में इसी मांग को जोरदार तरीके से उठाएगी।



लोकसभा में क्यों गिरा बिल?

इस पूरे विवाद की जड़ 17 अप्रैल को लोकसभा में हुई वोटिंग है। उस दिन महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक (Constitutional Amendment Bill) पारित नहीं हो सका। लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं जिनमें से 3 उस वक्त खाली थीं। वोटिंग के दौरान 528 सांसद मौजूद थे।



बिल पास करने के लिए उपस्थित सांसदों के दो-तिहाई यानी 352 वोट जरूरी थे। बिल के पक्ष में सिर्फ 298 वोट पड़े और विरोध में 230 वोट आए। इस तरह बिल जरूरी बहुमत से 54 वोट कम रहने की वजह से गिर गया।



इसी हार के बाद BJP ने कांग्रेस और विपक्षी दलों को "महिला विरोधी" करार देना शुरू किया। भाजपा (भारतीय जनता पार्टी - BJP) का आरोप है कि विपक्ष ने जानबूझकर इस महत्वपूर्ण कानून को रोका।



मप्र में आगे क्या होगा?

आज के संकल्प के बाद यह मुद्दा फिर से राष्ट्रीय राजनीति में गरम हो सकता है। मध्य प्रदेश विधानसभा अगर 33% महिला आरक्षण के पक्ष में संकल्प पारित करती है तो यह केंद्र सरकार पर दबाव बनाने का एक राजनीतिक कदम भी माना जाएगा। दोनों पक्षों की रणनीति एक-दूसरे को महिला विरोधी साबित करने की है और यह लड़ाई सदन की चारदीवारी से निकलकर सड़क तक आ गई है।



यह खबर क्यों जरूरी है?

महिला आरक्षण का मुद्दा सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक और सामाजिक भी है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 में समानता का अधिकार दिया गया है और महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बराबरी दिलाना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। देश की आधी आबादी यानी करीब 70 करोड़ महिलाएं आज भी संसद और विधानसभाओं में बेहद कम प्रतिनिधित्व रखती हैं। ऐसे में नारी शक्ति वंदन अधिनियम और उससे जुड़ी संवैधानिक बहस हर नागरिक के लिए जानना जरूरी है।



मध्य प्रदेश विधानसभा का यह विशेष सत्र न केवल राज्य बल्कि देश की राजनीति को दिशा दे सकता है। डिजिटल मीडिया की नैतिक जिम्मेदारी है कि इस विषय को तथ्यों के साथ सटीक रूप से लोगों तक पहुंचाए।



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