एमपी वक्फ बोर्ड में करोड़ों का खेल: EOW ने दर्ज की जिम्मेदारों पर FIR

Sanjay Dhiman | Jan 03, 2026, 19:14 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में नियमों की अनदेखी के कारण 2.54 करोड़ रुपए की वित्तीय हानि हुई। EOW ने जांच के बाद आरोपियों पर FIR दर्ज की है।

5 पाइंट में समझें पूरी खबर

  • वक्फ बोर्ड ने बिना अनुमति के संपत्तियां किराए पर दी, जिससे करोड़ों का नुकसान हुआ।
  • EOW ने शिकायत मिलने पर जांच शुरू की, 185 संपत्तियों का किरायेदारी परिवर्तन हुआ।
  • नियमों का उल्लंघन कर संपत्तियों की लीज बदली, बिना सार्वजनिक सूचना के किया गया।
  • वक्फ बोर्ड को सालाना करीब 2.54 करोड़ रुपए की हानि हुई, 59 करोड़ की संपत्तियों पर।
  • आरोपियों, शौकत मोहम्मद, फुरकान अहमद, और मोहम्मद जुबेर के खिलाफ FIR, कानूनी कार्रवाई शुरू।

BHOPAL. मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के मामले में एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। वक्फ बोर्ड के कुछ अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए संपत्तियों को अवैध तरीके से किराए पर दिया। साथ ही कई अन्य अनियमितताएं कीं। यह मामला आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच में सामने आया। EOW ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।





क्या है पूरा मामला?

27 जुलाई 2023 को मध्यप्रदेश शासन ने वक्फ बोर्ड से संबंधित शिकायत भेजी थी। इसमें यह आरोप लगाया गया था कि वक्फ बोर्ड ने वक्फ अधिनियम 1995 और वक्फ संपत्ति पट्टा नियम 2014 का उल्लंघन किया। इसमें यह कहा गया कि बोर्ड की संपत्तियों को बिना अनुमति के किराए पर दिया गया। बिना स्वीकृति के निर्माण कार्य किए गए।



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जांच का परिणाम

ईओडब्ल्यू की जांच में यह सामने आया कि सैकड़ों वक्फ संपत्तियों को नियम विरूध्द किराए पर दिया गया। इससे बोर्ड को करोड़ों रुपए की आर्थिक हानि हुई। जांच में यह भी पाया गया कि लगभग 185 संपत्तियों का किराया बिना किसी नियम के बदला गया।



इस दौरान, कलेक्टर गाइडलाइन रेट के अनुसार इन संपत्तियों का मूल्य करीब 59 करोड़ रुपए से अधिक था। जबकि बोर्ड को इनसे केवल 21 लाख रुपए की वार्षिक आय हो रही थी। इसके कारण हर साल वक्फ बोर्ड को करीब 2.54 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।



अधिकारियों की भूमिका

जांच में पता चला कि इन अनियमितताओं के पीछे वक्फ बोर्ड की प्रबंध समिति के सदस्य थे। शौकत मोहम्मद खान, फुरकान अहमद, और मोहम्मद जुबेर के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। इन अधिकारियों ने वक्फ संपत्तियों को बिना नियमों के पालन और बिना बोर्ड की अनुमति के नए किरायेदारों को दे दिया। साथ ही, कई संपत्तियों में बिना अनुमति स्थायी निर्माण कार्य किए गए थे।



2.54 करोड़ रुपए का हर साल नुकसान

जांच में सामने आया कि वक्फ बोर्ड की 185 संपत्तियों से सरकार को हर साल लगभग 2 करोड़ 76 लाख रुपए किराया मिलना चाहिए था। लेकिन वास्तव में महज 21 लाख रुपए ही किराया प्राप्त हुआ। इस प्रकार वक्फ बोर्ड को हर साल 2.54 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा।



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EOW ने दर्ज की एफआईआर

इन अनियमितताओं के चलते, EOW ने भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक न्यासभंग), 420 (धोखाधड़ी), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(1)(बी) के तहत आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।



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