एमपी में मेगा प्रोजेक्ट पर करोड़ों की बर्बादी, नहरें सूखी, घरों तक नहीं पहुंचा नल से जल

Sanjay Sharma | May 05, 2026, 23:04 IST
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एमपी में जल परियोजनाओं में करोड़ों का बजट बहा। सागर, छतरपुर, विदिशा, दमोह समेत दर्जनभर जिलों में न नहरों से खेतों को पानी मिला, न नल से घरों तक जल। आधे-अधूरे काम पर ठेकेदार भुगतान लेकर भागे। अफसरों ने कमीशन कमाया। जांच शुरू पर नतीजा नहीं।

News in Short

  • सागर: 42 करोड़ की नहर बनी, पानी खेत तक नहीं पहुंचा
  • छतरपुर: नल-जल योजना में पाइपलाइन गायब, टंकी खाली
  • विदिशा: 18 करोड़ की योजना में आधे गांव प्यासे रहे
  • दमोह: ठेकेदार आधा काम कर 9 करोड़ लेकर फरार
  • दर्जन भर जिलों में जांच शुरू, लेकिन अंजाम उजागर नहीं

News in Detail

BHOPAL. मध्य प्रदेश में जल ही जीवन का नारा फाइलों में तो गूंज रहा है, लेकिन जमीन पर करोड़ों का बजट पानी में बह गया। सागर, छतरपुर, विदिशा, दमोह समेत दर्जनभर जिलों में सिंचाई नहरों और नल-जल योजना में भारी गड़बड़ी सामने आई है। न नहरों से खेतों तक पानी पहुंचा, न नलों से घरों तक जल। ठेकेदार आधे-अधूरे काम पर पूरा भुगतान लेकर भाग गए, अफसरों ने कमीशन से मुनाफा कमाया। सरकार ने जांच शुरू कराई, पर एक भी मामला अंजाम तक नहीं पहुंचा। ग्रामीण आज भी बूंद-बूंद को तरस रहे हैं।



ऐसे लग रहा बड़ी परियोजनाओं में पलीता

1. सागर: जिले में बीना नदी पर 42 करोड़ की लागत से नहर परियोजना निर्माणाधीन है। इससे 12 गांवों के 3 हजार हेक्टेयर रकबे में खेतों में सिंचाई होगी। 2023 में काम पूरा दिखाकर ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया। जबकि नहर में दरारें हैं, माइनर-डिस्ट्रीब्यूटरी बनी ही नहीं। किसानों का कहना है कि एक बूंद भी पानी खेत तक नहीं पहुंचा है। शिकायतों के बाद इसकी जांच भी शुरू हुई और तथ्यों को छिपाकर निर्माण एजेंसी को क्लीन चिट दे दी गई।



2. छतरपुर: जल जीवन मिशन के तहत छतरपुर में बड़ामलहरा जनपद की 22 पंचायतों में 28 करोड़ की नल-जल योजना स्वीकृत हुई। 2024 में काम पूर्ण दिखाकर भुगतान कर दिया गया। जबकि हकीकत में न तो पाइप लाइन बिछी और न ही टंकियों को पानी से भरा गया। ग्राम पंचायत सरवई में टंकी बनाकर छोड़ दिया गया। गांव में अब भी हैंडपंप से पानी की पूर्ति हो रही है। यहां भी ठेकेदार ने 60% भुगतान लेकर काम छोड़ दिया।



3. विदिशा: जिले की ग्यारसपुर तहसील में 18 करोड़ की समूह नल-जल योजना 2022 में शुरू हुई। 37 गांवों को जोड़ना था। 2025 तक सिर्फ 14 गांवों में आधी - अधूरी पाइप लाइन बिछ सकी। अधूरी तैयारी के बीच टेस्टिंग करने पर पाइप फट गए और अब से ये काम अटका है। वहीं ठेकेदार 16 करोड़ लेकर भाग चुका है। वहीं कलेक्टर के आदेश पर शुरू हुई जांच 8 माह से फाइलों में ही दबी है।



4. दमोह: हटा तहसील में केन नदी से लिफ्ट इरिगेशन योजना 9.2 करोड़ में स्वीकृत हुई और 2023 में 80% भुगतान कर दिया गया। मौके पर सिर्फ पंप हाउस की दीवार खड़ी है। न पाइप लाइन, न बिजली कनेक्शन, न नहर। ठेकेदार ने काम बंद कर दिया और पेमेंट लेकर गायब हो गया। जल संसाधन विभाग के ईई ने दबाव में बिल पास किए। ईओडब्ल्यू जांच कर रही है, पर गिरफ्तारी नहीं हुई।



5. टीकमगढ़: टीकमगढ़ की जतारा तहसील में 14 करोड़ की सूक्ष्म सिंचाई योजना में तालाब गहरीकरण और पाइपलाइन बिछनी थी। 2024 में काम पूर्ण बताया गया। हकीकत में तालाब की गहराई 2 फीट भी नहीं बढ़ी। पाइपलाइन के नाम पर पुराने पाइप डाल दिए। किसानों को पानी नहीं मिला। शिकायत पर टीम गई तो एमबी बुक गायब मिली। ठेकेदार ने 30% कमीशन अफसरों को देकर फाइल क्लियर कराई।



ग्राफिक्स से समझें पूरा मामला

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जांचें शुरू, नतीजा शून्य

पिछले 2 साल में सागर, छतरपुर, विदिशा, दमोह, टीकमगढ़, पन्ना, रीवा, सतना, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी में जल परियोजनाओं की जांच शुरू हुई। ईओडब्ल्यू, लोकायुक्त और विभागीय जांच चल रही हैं। पर एक भी अफसर निलंबित नहीं हुआ, न ठेकेदार ब्लैकलिस्ट। फाइलें दबा दी गईं। ग्रामीणों का कहना है कि “पानी के नाम पर सिर्फ कागज गीले हुए, हमारे खेत-घर सूखे रह गए।” जल जीवन मिशन और सिंचाई योजनाओं में 2020 से 2025 तक एमपी में 18 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च हुए, पर 40% से ज्यादा योजनाएं फेल हैं।



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