साफ पानी का दावा खोखला: MP की किसी भी जल लैब में केमिकल जांच की सुविधा नहीं
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में पानी की जांच का सिस्टम अधूरा है।
- राज्य में कुल 155 जल गुणवत्ता जांच लैब हैं।
- इनमें से एक में भी केमिकल जांच नहीं होती।
- केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट में यह सामने आया है।
- कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने इसे लेकर सवाल उठाया है।
जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक नल पानी पहुंचाने का काम चल रहा है। इसी योजना से जुड़ी एक बड़ी खामी अब सामने आई है। मध्य प्रदेश में लाखों घरों तक अभी भी नल कनेक्शन नहीं पहुंचा है। यह मुद्दा पहले से चर्चा में रहा है। लेकिन इससे भी बड़ी दिक्कत पानी की गुणवत्ता जांच को लेकर सामने आई है। राज्य की पूरी जांच व्यवस्था अधूरी नजर आ रही है।
लैब की हकीकत क्या है
प्रदेश में पानी की जांच के लिए कुल 155 जल लैब काम कर रही हैं। इनमें से एक भी लैब पानी में केमिकल टॉक्सिसिटी नहीं जांच पाती। केमिकल टॉक्सिसिटी का मतलब है पानी में मौजूद हानिकारक रासायनिक तत्व। ये तत्व सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकते हैं।
हालांकि राहत की बात यह है कि सभी 155 लैब में एक जांच जरूर होती है। यह जांच माइक्रोबायोलॉजिकल कंटैमिनेशन यानी सूक्ष्मजीवीय संदूषण की है। इसमें पानी में बैक्टीरिया या वायरस जैसे जीवाणु ढूंढे जाते हैं। यानी पानी में जीवाणु तो पकड़े जा सकते हैं, लेकिन केमिकल खतरा नहीं। यह पूरा खुलासा केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट से हुआ है।
एक और अहम जांच बीओडी (Biochemical Oxygen Demand) की भी होती है। यह जांच पानी में मौजूद ऑर्गेनिक प्रदूषण की मात्रा बताती है। वहीं, यह सुविधा भी सिर्फ एक राज्य स्तर की लैब में है। मतलब बाकी 154 लैब में यह जांच भी नहीं हो पाती। इससे साफ है कि पानी की पूरी गुणवत्ता जांचने का सिस्टम अभी कमजोर है।
नल कनेक्शन के आंकड़े क्या कहते हैं
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट में नल कनेक्शन के आंकड़े भी दिए गए हैं। मध्य प्रदेश में 77.21 प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन चालू हैं। यह आंकड़ा सुनने में ठीक लगता है, लेकिन जिलेवार तस्वीर उतनी अच्छी नहीं है। राज्य के 55 जिलों में से 23 जिलों में पेयजल उपलब्धता 70 प्रतिशत से भी कम है। यानी करीब आधे जिले अभी भी पीछे हैं।
सबसे कम कवरेज वाले जिलों की बात करें तो मैहर सबसे नीचे है। मैहर में सिर्फ 40.20 प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन काम कर रहे हैं। सिंगरौली में यह आंकड़ा 40.62 प्रतिशत है। छतरपुर में 42.77 प्रतिशत और अलीराजपुर में 42.78 प्रतिशत घरों तक पानी पहुंच रहा है। इन जिलों में जल जीवन मिशन का काम अभी अधूरा नजर आता है।
सांसद ने उठाए सवाल
राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने इस पूरे मामले को सवाल उठाया है। उन्होंने राज्यसभा में मध्य प्रदेश की नल-जल योजना को लेकर सवाल पूछा था। इसी सवाल के जवाब में लैब की खराब स्थिति की जानकारी सामने आई थी।
तनखा के मुताबिक केंद्र सरकार ने पेयजल को राज्य का विषय बताया है। इसलिए वे अब राज्य सरकार से जांच और सुधार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे इस मामले में पूरे दस्तावेजों के साथ राज्य सरकार को पत्र लिखेंगे। सांसद ने साफ कहा कि पानी की गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए।
आगे क्या होना जरूरी है
पानी सीधे लोगों की सेहत से जुड़ा विषय है। सिर्फ नल कनेक्शन पहुंचाना काफी नहीं है। पानी साफ और सुरक्षित है या नहीं, यह जांचना भी उतना ही जरूरी है। अगर लैब में केमिकल जांच की सुविधा ही नहीं है, तो पानी की असली गुणवत्ता का पता नहीं चल पाएगा। ऐसे में राज्य सरकार को जल्द इन लैब को अपग्रेड करने की जरूरत है। साथ ही जिन जिलों में नल कनेक्शन कम हैं, वहां काम तेज करना होगा। तभी जल जीवन मिशन का असली मकसद पूरा हो सकेगा।
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