भागीरथपूरा की घटना के बाद जागे अफसर, प्रदेश में 7,755 ट्यूबवेल जांचे, 58 बंद किए गए

Sanjay Dhiman | Jan 17, 2026, 22:03 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के निर्देश पर जल सुरक्षा अभियान शुरू। 58 प्रदूषित ट्यूबवेल बंद और 4893 लीकेज ठीक किए गए। जानें पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।

NEWS IN SHORT

  • प्रदूषित स्रोत बंद: प्रदेश में 7755 ट्यूबवेलों की जांच हुई, जिनमें से 58 प्रदूषित ट्यूबवेल तत्काल बंद कर बिजली काट दी गई।
  • बड़े पैमाने पर सुधार: नगरीय निकायों ने युद्ध स्तर पर काम करते हुए 4893 वाटर पाइपलाइन लीकेज को पूरी तरह ठीक किया।
  • टंकियों की सफाई: शुद्ध पानी सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश की 2903 पानी की टंकियों की विशेष सफाई का अभियान पूरा हुआ।
  • अमृत मित्र तैनात: वार्ड स्तर पर 1024 अमृत मित्रों द्वारा अब तक 45749 वाटर फील्ड टेस्ट सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं।
  • निरंतर निगरानी: 413 निकायों में जल परीक्षण प्रक्रिया जारी है ताकि भविष्य में दूषित पानी से बीमारियां न फैलें।

NEWS IN DETAIL

BHOPAL. मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन विभाग ने हाल ही में एक प्रेस नोट जारी किया है। यह प्रेस नोट सरकारी आंकड़ों की बाजीगरी तो दिखाता है, लेकिन इसके पीछे एक कड़वा सच भी छिपा है। इंदौर के भागीरथपुरा जैसी घटनाओं ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। अब आनन-फानन में पूरे प्रदेश के जल स्रोतों की जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 10 जनवरी 2026 से 'स्वच्छ जल अभियान' की शुरुआत की है। इस अभियान का मकसद हर घर तक शुद्ध पानी पहुंचाना बताया जा रहा है।



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जांच में खुलासा: 58 ट्यूबवेल उगल रहे थे 'ज़हर'

सरकार ने प्रदेश भर में 7755 ट्यूबवेल के पानी की बारीकी से जांच करवाई है। इस जांच के नतीजे बेहद डराने और चौंकाने वाले मिले हैं। प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में 58 ट्यूबवेल पूरी तरह प्रदूषित (Polluted) पाए गए।



इन ट्यूबवेलों का पानी पीने लायक बिल्कुल भी नहीं था। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए इन सभी 58 ट्यूबवेलों को बंद कर दिया है। इतना ही नहीं, इनके बिजली कनेक्शन भी स्थाई रूप से काट दिए गए हैं।



लीकेज और गंदगी: हजारों लोगों की सेहत से खिलवाड़

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश की नगरीय निकायों में 4893 लीकेज सुधारे गए हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या इन लीकेज से गंदा पानी सप्लाई में नहीं मिल रहा था? साथ ही, प्रदेश की 2903 पानी की टंकियों की साफ-सफाई का काम भी पूरा किया गया है। 413 नगरीय निकायों में जल परीक्षण का काम अभी भी जारी है। अमृत मित्रों की टीम वार्ड स्तर पर जाकर पानी के सैंपल ले रही है।



बड़ा सवाल: आखिर हादसे के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन?

भागीरथपुरा की घटना ने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। अगर समय रहते जांच होती, तो क्या इन 58 प्रदूषित ट्यूबवेलों का पानी लोग पीते? क्या 4800 से ज्यादा लीकेज का गंदा पानी लोगों के घरों तक पहुंचता? यह जनता के स्वास्थ्य के साथ सीधा-सीधा खिलवाड़ है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसी जांच साल भर लगातार की जाए। केवल किसी बड़ी घटना या मौत के बाद अभियान चलाना समाधान नहीं है।



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अमृत मित्र और वाटर फील्ड टेस्ट की जमीनी हकीकत

वर्तमान में 1024 अमृत मित्र फील्ड पर तैनात किए गए हैं। इन्होंने अब तक कुल 45749 वाटर फील्ड टेस्ट पूरे कर लिए हैं। सरकार का दावा है कि यह प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी। नगरीय प्रशासन विभाग अब तकनीक का सहारा लेकर पानी की गुणवत्ता सुधारने की बात कर रहा है। लेकिन जनता अब भी डरी हुई है कि उनके नलों में आने वाला पानी कितना सुरक्षित है। अधिकारियों को अब जवाबदेही तय करनी होगी ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।



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