उज्जैन जगमगाया, इंदौर गरमाया, भोपाल में फैसलों की हलचल... मध्यप्रदेश की इस हफ्ते की पूरी दास्तां

Ravi Kant Dixit | Sept 19, 2026, 14:52 IST
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एमपी में इस हफ्ते सियासत और सिस्टम गरम रहे। उज्जैन में रिकॉर्ड बने, तो कूनो से चार नए शावकों की खुशखबरी आई। मास्टर प्लान और पेंशन पर भी बड़े अपडेट्स रहे।

देश का दिल है अपना एमपी... और दिल का धड़कते रहना जरूरी है। इस हफ्ते मध्यप्रदेश में सियासत भी गरम रही और सिस्टम भी। उज्जैन में दीयों की रोशनी ने रिकॉर्ड बनाया। इंदौर में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का पहला दौरा चर्चा में रहा। संघ प्रमुख डॉ.मोहन भागवत ने उज्जैन में युवाओं से धर्म और जीवन के रिश्ते पर बात की तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी का इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम सियासत के केंद्र में रहा।



उधर, मास्टर प्लान पर सरकार और कांग्रेस आमने-सामने हैं। सरकारी दफ्तरों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस की तैयारी हो रही है। गांवों में मुफ्त रजिस्ट्री की शुरुआत के साथ पटवारियों और तहसीलदारों का विरोध सामने आ गया है। यूपीआई के नए चार्ज को लेकर कारोबारी नाराज हैं। सरकारी कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है।



और इन सबके बीच कूनो से आई खबर ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। जी हां, भारत में जन्मी मादा चीता KGP-12 ने चार शावकों को जन्म दिया है।


नमस्कार, आदाब, सत श्री अकाल और गुड आफ्टरनून...



'द सूत्र' की 'राज्य की डायरी' में इस हफ्ते मध्यप्रदेश की सियासत, प्रशासन और सिस्टम से जुड़ी ऐसी ही तमाम बड़ी खबरों का लेखा-जोखा।



तो चलिए, शुरू करते हैं...



मोदी के जन्मदिन पर जगमगाया प्रदेश

सबसे पहले बात पंत प्रधान की। 17 सितंबर 2026 को मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर बीजेपी ने 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत कार्यक्रम किए। राज्य स्तरीय आयोजन उज्जैन में हुआ, जहां प्रधानमंत्री के 25 साल के सेवाकाल को याद करते हुए दीप प्रज्वलित किए गए। उज्जैन में शिप्रा तट से महाकाल लोक तक 33 लाख 27 हजार दीये जगमगाए।



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इस आयोजन ने रिकॉर्ड बनाया और उज्जैन का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। कार्तिक मेला मैदान में 9 लाख दीयों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशाल चित्र भी बनाया गया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत पूरे मध्यप्रदेश में कुल 3 करोड़ 55 लाख दीये जलाए गए। यानी इस बार मोदी के जन्मदिन पर मध्यप्रदेश में राजनीति के साथ दीपों की भी अपनी अलग चमक दिखाई दी।



नितिन नवीन का पहला एमपी दौरा चर्चा में

सेवा संकल्प अभियान के तहत इंदौर भी इस हफ्ते बीजेपी की राजनीति का बड़ा केंद्र बना। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन पहली बार मध्यप्रदेश पहुंचे। उनके स्वागत में इंदौर में रोड शो हुआ। अध्यक्ष के स्वागत को लेकर नेताओं में भी उत्साह दिखाई दिया। रोड शो के बाद मंचीय कार्यक्रम हुआ, जहां नितिन नवीन ने ग्रामीण संपत्तियों के मालिकाना हक से जुड़ी स्वामित्व योजना के तहत करीब 50 लाख ग्रामीण संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री के अभियान की शुरुआत की।



NITIN NABIN


सरकार के मुताबिक, इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्तियों का औपचारिक मालिकाना हक उपलब्ध कराना है। नितिन नवीन ने अपने संबोधन में बीजेपी की राजनीति को 'नेशन फर्स्ट' से जोड़ते हुए विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामों के कारण विपक्ष को सत्ता का दरवाजा दिखाई नहीं दे रहा है और उसके नेता बेचैन हैं।



भागवत बोले- उदय हुआ है तो अस्त भी होगा

18 सितंबर को उज्जैन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ.मोहन भागवत ने युवा धर्म संसद को संबोधित किया। भागवत ने युवाओं से धर्म को केवल पूजा-पद्धति या उम्र के किसी एक पड़ाव से जोड़कर देखने के बजाय जीवन और आचरण का हिस्सा बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि धर्म रिटायरमेंट के बाद की चीज नहीं है। अहंकार को लेकर भी उन्होंने युवाओं को संदेश दिया।



MOHAN BHAGVAT


उनका कहना था कि मनुष्य कई बार अपने अहंकार में यह मान बैठता है कि सत्ता और परिस्थितियां उसकी इच्छा के अनुसार चलेंगी। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि उदय हुआ है तो अस्त भी होगा। धर्म और 'रिलिजन' के अंतर पर भी उन्होंने विस्तार से बात की। उनके मुताबिक धर्म व्यक्ति को मुक्त करने वाली व्यवस्था है, जबकि 'रिलिजन' को उन्होंने अनुशासन और बंधन से जोड़ा। संघ प्रमुख ने धर्म की परिभाषा को रोजमर्रा के जीवन से जोड़ने के लिए बेहद सामान्य उदाहरण दिए। उन्होंने बताया कि खाना खाने के बाद कचरा न करना भी धर्म है। ट्रैफिक नियमों का पालन करना भी धर्म है। यानी उज्जैन की युवा धर्म संसद में धर्म की चर्चा शास्त्रों से निकलकर रोजमर्रा के व्यवहार तक पहुंची।



कांग्रेस की गूंज, इंदौर में सियासी हलचल

अब बात इंदौर की उस सियासी हलचल की, जिस पर इस पूरे हफ्ते नजर रही। 19 सितंबर को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम इंदौर में हो रहा है। कार्यक्रम में जेन-जी और छात्रों से शिक्षा, रोजगार, पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर संवाद का कार्यक्रम रखा गया। कांग्रेस की ओर से बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन का दावा किया गया, जबकि प्रशासन की ओर से कार्यक्रम में करीब 15 हजार विद्यार्थियों के शामिल होने की जानकारी दी गई। कार्यक्रम को 31 शर्तों के साथ अनुमति दी गई।



RAHUL GANDHI


कार्यक्रम की सुरक्षा को लेकर पुलिस-प्रशासन और कांग्रेस के बीच खींचतान भी चर्चा में रही। प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों में कार्यक्रम स्थल, मंच, पार्किंग, बैरिकेडिंग और एक्सेस कंट्रोल समेत कई बिंदु शामिल किए गए। सुरक्षा व्यवस्था के संदर्भ में वर्मा आयोग की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया, जो 1991 के राजीव गांधी हत्याकांड की जांच से जुड़ी थी। इसी बीच आयोजन स्थल को लेकर भी विवाद हुआ।



इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी ने कांग्रेस से 4 लाख 3 हजार रुपए अतिरिक्त लीज रेंट जमा कराया। कांग्रेस पहले ही 10 लाख 8 हजार रुपए जमा कर चुकी थी। आईडीए के मुताबिक, 12 हजार वर्गमीटर जमीन 17 से 19 सितंबर के लिए दी गई थी, लेकिन करीब 4800 वर्गमीटर क्षेत्र का इस्तेमाल 14 सितंबर से शुरू हो गया। इसके चलते अतिरिक्त राशि ली गई और कुल भुगतान करीब 14 लाख 11 हजार रुपए हो गया। यानी राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले इंदौर में राजनीति, प्रशासन और सुरक्षा...तीनों मोर्चों पर हलचल बनी रही।



मास्टर प्लान पर सरकार और कांग्रेस आमने-सामने

मध्यप्रदेश के बड़े शहरों के मास्टर प्लान का मुद्दा भी इस हफ्ते फिर गरमाया रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि भोपाल समेत जिन शहरों के मास्टर प्लान लंबित हैं, वहां विभागीय प्रक्रिया चल रही है। उनका कहना है कि मास्टर प्लान से जुड़े सभी विषय सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाकर उसके दिशानिर्देशों के अनुसार आगे बढ़ना जरूरी है। मास्टर प्लान को लेकर कांग्रेस के विरोध पर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि उस समय इस दिशा में काम नहीं हुआ, इसलिए कांग्रेस को इस संवेदनशील विषय पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।





दूसरी तरफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर सरकार को तीन महीने का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि तय समय में मास्टर प्लान जारी नहीं हुए तो कांग्रेस 50 हजार लोगों के साथ इंदौर से भोपाल तक पदयात्रा निकालेगी और मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर विरोध दर्ज कराएगी।



अभिजीत दिपके का 'इस्तीफा'

बालाघाट का मामला भी इस हफ्ते राष्ट्रीय चर्चा में रहा। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके आदिवासी बच्चों की मौत के मामले में प्रभावित परिवारों से मिलने बालाघाट पहुंचे। वहां उन्हें मीडिया और स्थानीय लोगों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। उनसे पूछा गया कि बच्चों की मौत के कई दिन बाद वे अब क्यों पहुंचे हैं। दिपके ने देर से आने पर माफी मांगी। इसके बाद जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका दौरा राजनीतिक है, तो वे बिना जवाब दिए आगे बढ़ गए। बाद में उन्होंने कहा कि आदिवासी बच्चे लगातार बीमार हो रहे हैं और उन्हें बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने आदिवासियों की लड़ाई में साथ देने की बात कही। इसके अगले दिन दिपके ने सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक इस्तीफा पत्र जारी कर दिया।



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राज्यपाल मंगूभाई पटेल को संबोधित इस पत्र में उन्होंने खुद को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देने की बात लिखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी टैग किया गया। पत्र में 13 अगस्त 2026 की तारीख लिखी गई और बालाघाट में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत का हवाला देते हुए जिम्मेदारी की बात कही गई। हालांकि यह वास्तविक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं था, बल्कि मध्यप्रदेश सरकार पर राजनीतिक तंज के तौर पर जारी किया गया सांकेतिक पत्र था। मामले पर बालाघाट के प्रभारी मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि बाहरी लोग वहां जाकर वातावरण खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।



मंत्रालय, विंध्याचल और सतपुड़ा में अब बायोमेट्रिक हाजिरी

अब सिस्टम की बात। मध्यप्रदेश सरकार मंत्रालय, विंध्याचल और सतपुड़ा भवन में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए 1 नवंबर 2026 से बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य करने की तैयारी कर रही है। सामान्य प्रशासन विभाग अक्टूबर के तीसरे सप्ताह से इसकी शुरुआत करने की तैयारी में है। शुरुआती सात दिन सिस्टम ट्रायल मोड में चलेगा। इसके बाद मध्यप्रदेश स्थापना दिवस, यानी 1 नवंबर से इसे विधिवत लागू करने की योजना है।



E-ATTENDANCE


ई-अटेंडेंस के साथ कर्मचारियों का वर्क भी सिस्टम में री-असाइन किया जाएगा। जीएडी ने सभी विभागों को अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से पहले प्रोजेक्ट से जुड़े काम पूरे करने के निर्देश दिए हैं। भोपाल के प्रमुख प्रशासनिक परिसरों से शुरुआत के बाद इसे पूरे प्रदेश में विस्तार देने की योजना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी जिलों के कलेक्टोरेट और अन्य संभागीय एवं जिला कार्यालयों में भी बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।



फ्री रजिस्ट्री पर पटवारियों के बाद तहसीलदारों का भी मोर्चा

17 सितंबर से ग्रामीणों को मकानों का मालिकाना हक देने के लिए शुरू हुई स्वामित्व योजना की मुफ्त रजिस्ट्री अभी शुरुआत में ही अटकती दिखाई दे रही है। पटवारी पहले से विरोध में हैं और अब तहसीलदारों ने भी रजिस्ट्री प्रक्रिया से खुद को अलग कर लिया है। सरकार ने एक महीने में करीब 50 लाख निशुल्क रजिस्ट्रियों का लक्ष्य रखा है, लेकिन विरोध के चलते प्रक्रिया प्रभावित हुई है।



PATWARI REGISTRY


तहसीलदार संघ की आपत्ति यह है कि सरकार ने तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को उप-पंजीयक की शक्तियां तो दी हैं, लेकिन प्रक्रिया तय करने से पहले उनसे पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। सबसे बड़ा सवाल पुराने रिकॉर्ड, उनमें संभावित गड़बड़ियों और भविष्य में होने वाली कानूनी कार्रवाई को लेकर है।यानी सरकार की योजना गांवों में मालिकाना हक देने की है, लेकिन इसे जमीन पर उतारने की प्रक्रिया में ही पेच आ गया है।



यूपीआई पर नया चार्ज, कारोबारी नाराज

अब बात उस बदलाव की, जिसका असर सीधे बाजार और आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है। 15 अक्टूबर से 2 हजार रुपए से ज्यादा के कुछ मर्चेंट यूपीआई ट्रांजेक्शन पर एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू होने जा रहा है। ईंधन जैसे क्षेत्रों में 2 हजार रुपए से अधिक के ट्रांजेक्शन पर फ्लैट शुल्क की व्यवस्था बताई गई है। मध्यप्रदेश में पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने इसके विरोध में 2 हजार रुपए से ज्यादा के पेट्रोल-डीजल भुगतान के लिए कैश लेने का फैसला किया है।



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एसोसिएशन के मुताबिक, एक पेट्रोल पंप पर रोज औसतन 100 ऐसे यूपीआई ट्रांजेक्शन होते हैं। 5 रुपए एमडीआर पर 18 प्रतिशत जीएसटी जोड़ने के बाद प्रति ट्रांजेक्शन करीब 5.90 रुपए का खर्च बैठता है। यानी एक पंप पर रोज करीब 590 रुपए और महीने में करीब 17 हजार 700 रुपए का अतिरिक्त खर्च।



डीलर्स का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर उनका मार्जिन पहले से सीमित है, इसलिए अतिरिक्त खर्च उठाना मुश्किल होगा। इंदौर में भी यूपीआई एमडीआर के विरोध में 100 से ज्यादा व्यापारिक संगठनों ने 23 सितंबर को 2 हजार रुपए से ज्यादा का यूपीआई भुगतान नहीं लेने का फैसला किया है। व्यापारियों ने स्कैनर और साउंड बॉक्स पर काला कपड़ा चढ़ाने की बात कही है।



यूपीएस: चार महीने में तस्वीर साफ होने की उम्मीद

सरकारी कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी यूपीएस को लेकर भी मध्यप्रदेश में तैयारी शुरू हो गई है। सरकार ने एसीएस मनु श्रीवास्तव की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमेटी बनाई है। यह कमेटी चार महीने में अपनी रिपोर्ट देगी। इसके बाद प्रस्ताव कैबिनेट के सामने जाएगा। प्रदेश में 1 जनवरी 2005 या उसके बाद नियुक्त करीब 4 लाख 83 हजार कर्मचारी एनपीएस में हैं। इनमें करीब 2 लाख 50 हजार अधिकारी-कर्मचारी यूपीएस के दायरे में आ सकते हैं। अभी एनपीएस में कर्मचारी 10 प्रतिशत और सरकार 14 प्रतिशत अंशदान करती है। रिटायरमेंट के बाद 50 प्रतिशत पेंशन की गारंटी नहीं है।



UNIFIED PENSION SCHEME


यूपीएस व्यवस्था में कर्मचारी का अंशदान 10 प्रतिशत रहेगा, जबकि सरकार का कुल योगदान 18.5 प्रतिशत होगा। इसमें 10 प्रतिशत कर्मचारी के खाते में और 8.5 प्रतिशत अलग पूल में जाने की व्यवस्था बताई गई है। इसी व्यवस्था के आधार पर पात्र कर्मचारियों के लिए तय पेंशन सुनिश्चित करने का प्रावधान है। इस पूरे मामले में अध्यापक संवर्ग के लिए एक और महत्वपूर्ण सवाल है। अध्यापक संवर्ग का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन 2018 में हुआ था। यदि यूपीएस के लिए उनकी सेवा 2018 से गिनी जाती है तो 10 साल 2028 में पूरे होंगे। इसलिए बड़ी संख्या में अध्यापकों के लिए यह तय होना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार उनकी सेवा की गणना किस तारीख से करती है।



कूनो में चीतों का कुनबा बढ़ा, चार शावकों का जन्म

और अब इस हफ्ते की सबसे खूबसूरत खबर। मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी आई है। भारत में जन्मी मादा चीता KGP-12 ने चार शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 56 हो गई है। इनमें कूनो में 53 और मध्यप्रदेश के गांधी सागर में 3 चीते हैं। यदि सिर्फ भारत में जन्मे चीतों की बात करें तो उनकी संख्या भी अब 36 हो गई है।



यानी जिस प्रोजेक्ट को चार साल पहले भारत में चीतों की वापसी के साथ शुरू किया गया था, उसमें अब भारत की धरती पर जन्मी दूसरी पीढ़ी भी दिखाई देने लगी है। इसके साथ एक और खबर है। दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते अक्टूबर से दिसंबर के बीच कूनो नेशनल पार्क लाए जाने हैं। तारीख अक्टूबर में तय की जाएगी, जिसके बाद केंद्रीय वन मंत्रालय इसकी घोषणा करेगा। इससे पहले फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और पहली खेप में नामीबिया से 8 चीते भारत लाए गए थे। कूनो में चीतों की बढ़ती संख्या और इनब्रीडिंग की संभावनाओं को देखते हुए फेज-2 का मास्टर प्लान भी तैयार किया गया है।



इसी के साथ 'राज्य की डायरी' में आज इतना ही। अगले हफ्ते फिर लेकर आएंगे मध्यप्रदेश की नई हलचल, नई दास्तां और नए सवाल।



नमस्कार...!



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