MP में गेहूं खरीदी की डेडलाइन बढ़ी : लंबी कतारों और अव्यवस्थाओं के बीच सरकार ने 5 दिन बढ़ाई तारीख

Sanjay Dhiman | May 20, 2026, 23:48 IST
Photograph: (the sootr)
MP में गेहूं खरीदी की तारीख 23 मई से बढ़ाकर 28 मई कर दी गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लंबी कतारों और अव्यवस्था से परेशान किसानों को राहत दी है। अब तक रिकॉर्ड 91 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है।

मध्यप्रदेश में गेहूं बेचने के लिए परेशान किसानों को फिलहाल थोड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में सरकारी गेहूं खरीदी की अंतिम तारीख 23 मई से बढ़ाकर 28 मई करने का ऐलान किया है।



सरकार का कहना है कि जिन किसानों ने स्लॉट बुक कर लिया है लेकिन भीड़, लंबी लाइन या व्यवस्था की सुस्ती के कारण गेहूं नहीं बेच पाए, उनका अनाज भी खरीदा जाएगा।



हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि जब व्यवस्था पहले से तैयार होने का दावा था, तो फिर हजारों किसानों को अंतिम समय में तारीख बढ़ने का इंतजार क्यों करना पड़ा?



रिकॉर्ड खरीदी का दावा, लेकिन जमीन पर दबाव भी भारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश इस बार देश में सबसे ज्यादा गेहूं खरीदने वाला राज्य बन गया है। सरकार के मुताबिक अब तक 91 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है और जल्द ही 100 लाख मीट्रिक टन का आंकड़ा पार करने का लक्ष्य है।



पिछले साल प्रदेश में 75 लाख टन गेहूं खरीदा गया था। यानी इस बार सरकार रिकॉर्ड खरीद का दावा कर रही है। लेकिन दूसरी तरफ कई जिलों में किसानों को स्लॉट, तौल और परिवहन की समस्याओं का सामना भी करना पड़ा।



आखिर तारीख बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी?

सरकारी स्तर पर यह कहा गया कि कई किसान स्लॉट बुकिंग के बावजूद खरीदी केंद्रों तक समय पर गेहूं नहीं बेच पाए।



इसके पीछे मुख्य वजहें बताई जा रही हैं:

खरीदी केंद्रों पर लंबी कतारें- कई मंडियों और केंद्रों पर किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ा।



परिवहन की धीमी व्यवस्था- गेहूं उठाव में देरी से खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हुई।



बारदाने की समस्या- कुछ क्षेत्रों में बारदाने की कमी की शिकायतें सामने आईं।



मौसम की मार- बेमौसम बारिश और बदले मौसम ने भी खरीदी की रफ्तार प्रभावित की।



सरकार ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार किसानों से किए गए वादों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन किसानों ने स्लॉट बुक कर लिया है, उनका गेहूं हर हाल में खरीदा जाएगा। सीएम ने यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों और व्यवस्थागत दबावों के बावजूद सरकार किसानों की उपज का “एक-एक दाना” खरीदने के लिए तैयार है।



रिकॉर्ड के पीछे की सच्चाई पर भी चर्चा

सरकार लगातार रिकॉर्ड खरीदी का दावा कर रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ आंकड़े बढ़ना ही पर्याप्त नहीं है। यदि किसान को केंद्र पर कई दिन इंतजार करना पड़े, भुगतान में देरी हो या परिवहन व्यवस्था लड़खड़ाए, तो रिकॉर्ड खरीदी का दावा किसानों के अनुभव से मेल नहीं खाता। यानी उपलब्धि के साथ-साथ व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।



किसानों के लिए सबसे जरूरी बातें

अब 28 मई तक होगी खरीदी- पहले अंतिम तारीख 23 मई तय थी।



स्लॉट बुकिंग जरूरी रहेगी- सिर्फ उन्हीं किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा जिन्होंने स्लॉट बुक किया है।



रिकॉर्ड खरीदी का दावा- अब तक 91 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है।



सरकार का लक्ष्य- इस बार 100 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा खरीदी का लक्ष्य।



समस्याएं भी बनी रहीं- बारदाना, परिवहन और भीड़ से किसान परेशान रहे।



अब नजर अगले 5 दिनों पर

सरकार ने खरीदी की तारीख बढ़ाकर राहत देने की कोशिश जरूर की है, लेकिन असली चुनौती अब व्यवस्था को संभालने की है। यदि अगले पांच दिनों में खरीदी केंद्रों पर भीड़ कम नहीं हुई और उठाव तेज नहीं हुआ, तो किसानों की परेशानी फिर बढ़ सकती है। अब देखना होगा कि सरकार सिर्फ रिकॉर्ड का दावा करती है या वास्तव में किसानों को बिना परेशानी खरीदी की सुविधा भी दे पाती है।



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